होमHealth NewsOral Cancer Treatment: खुशखबरी...अल्ट्रासाउंड तकनीक से हो पाएगा इलाज, मरेगी लाखों कोशिकाएं

Oral Cancer Treatment: खुशखबरी…अल्ट्रासाउंड तकनीक से हो पाएगा इलाज, मरेगी लाखों कोशिकाएं

Ultrasound Kills Cancer Cells: कैंसर की बीमारी जानलेवा बीमारियों की लिस्ट में आती है. जिसके इलाज में लोगों के जेब खर्च से लेकर दुआ तक खत्म हो जाती है.

Ultrasound Kills Cancer Cells: कैंसर की बीमारी जानलेवा बीमारियों की लिस्ट में आती है. जिसके इलाज में लोगों के जेब खर्च से लेकर दुआ तक खत्म हो जाती है. लेकिन अगर व्यक्ति कैंसर में लास्ट स्टेज पर होता है तो उसकी जान बच पाना लगभग नामुमकिन है. ऐसे में कैंसर पीड़ितों के लिए एक खुशखबरी सामने आई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अब अल्ट्रासाउंड से ही कैंसर कोशिकाओं का काम तमाम हो जाएगा.

दरअसल वैज्ञानिकों ने ओरल कैंसर के इलाज में बड़ी सफलता हासिक की है. उन्होंने रिसर्च से पता लगाया है कि कैसे अल्ट्रासाउंड की मदद से कैंसर सेल्स को मारा जा सकता है. गौरतलब है कि मुंह का कैंसर कितना घातक है. अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो व्यक्ति की जान जा सकती है. वहीं ये कैंसर जीभ, मसूड़ों, गाल, होंठ और गले तक फैल सकता है. देर से इलाज शुरू होने पर खाने, बोलने और सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है. ऐसे में एक्सपर्ट कहते हैं कि मुंह में लंबे समय तक रहने वाला छाला, गांठ, सफेद या लाल धब्बे और निगलने में परेशानी जैसे लक्षणों को अनदेखा न करें.

IISc के वैज्ञानिकों का दावा

गौरतलब है कि कैंसर कोशिकाएं कितनी खतरनाक होती है. इन्हें मारने के लिए कीमोथेरेपी का सहारा लिया जाता है. ताकि ये कोशिकाएं बढ़ ना सकें. लेकिन अब IISc के वैज्ञानिकों के अनुसार केवल अल्ट्रासाउंड से ही कैंसर की कोशिकाएं को खत्म करने में मदद मिलेगी.

वैज्ञानिकों के अनुसार अल्ट्रासाउंड से निकलने वाले वेव से ही कैंसर कोशिकाओं को मारा जा सकेगा. ऐसे में कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए अल्ट्रासाउंड की मशीन बड़े काम आने वाली है. मशीन से ही कैंसर कोशिकाओं को मार दिया जाएगा.

वैज्ञानिकों ने की रिसर्च

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) बैंगलोर, कर्नाटक में स्थित भारत का सर्वोच्च अनुसंधान और उच्च शिक्षा संस्थान है. यहां के वैज्ञानिकों ने ओरल कैंसर कोशिकाओं को मारने का नया तरीका निकाला है. उन्होंने ओरल कैंसर से पीड़ित मरीजों में से ट्यूमर के नमूनों को लिया, उन नमूनों पर वैज्ञानिकों ने लो फ्रीक्वेंसी वाले अल्ट्रासाउंड की तकनीक अपनाई. इसके बाद उन्होंने परीक्षण किया और पाया कि जब इन कोशिकाओं पर लो-फ्रीक्वेंसी अल्ट्रासाउंड किया गया तो कैंसर कोशिकाएं नष्ट हो चुकी थी.

हर साल नए मामले आते सामने

गौरलतब है कि भारत में हर साल ओरल कैंसर से पीड़ित लगभग 70,000 से 1,00,000 से अधिक नए मामले सामने आते हैं. वहीं इसके इलाज के लिए सर्जरी (ट्यूमर निकालना), रेडिएशन थेरेपी, और कीमोथेरेपी शामिल हैं, लेकिन अब अल्ट्रसाउंड की मदद से इलाज में मदद मिलेगी. वैज्ञानिकों का कहना है कि कीमोथेरेपी में कैंसर कोशिकाएं तो मर जाती है, लेकिन इनके साथ ही वहां मौजूद हेल्दी कोशिकाएं भी मरने लगती है. दूसरी ओर ये कोशिकाएं दोबारा से कैंसर कोशिकाओं में विकसित होने लगती है. ऐसे में लो-फ्रीक्वेंसी अल्ट्रासाउंड की मदद से अब ओरल कैंसर के इलाज में नई सफलता मिलेगी.

अल्ट्रासाउंड के ध्वनि तरंगों से कैंसर का इलाज

आईआईएससी के वैज्ञानिकों ने बताया कि हमने अपनी रिसर्च में पाया है कि कम-आवृत्ति यानी लो-फ्रीक्वेंसी अल्ट्रासाउंड ओरल कैंसर की कोशिकाओं को सटीकता से नष्ट कर सकता है. इसमें हेल्दी कोशिकाओं को काफी हद तक सुरक्षित रखता है. इस रिसर्च से भविष्य में लाखों ओरल कैंसर के मरीज बिना किसी कष्ट के इलाज करा सकेंगे.

क्या है अल्ट्रासाउंड?

बता दें कि अल्ट्रासाउंड एक ऐसी जांच प्रक्रिया हैं जिसमें हाई-फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स (ध्वनि तरंगों) की मदद से शरीर के अंदर के अंगों का हालचाल देखा जाता है. कि वह कितनी बीमार हैं. इस जांच पड़ताल में व्यक्ति को किसी प्रकार का कोई दर्द नहीं होता.

किस-किस स्थिति में अल्ट्रासाउंड किया जाता है?

  • गर्भावस्था के दौरान शिशु की जांच के लिए.
  • लिवर, किडनी, गॉलब्लैडर और पैंक्रियास जैसी समस्या को देखने के लिए.
  • गॉलब्लैडर या किडनी में पथरी का पता लगाने के लिए भी अल्ट्रासाउंड किया जाता है.
  • वहीं शरीर में सूजन, गांठ या अन्य समस्याओं की जांच के लिए भी अल्ट्रासाउंड तकनीका का इस्तेमाल किया जाता है.

बता दें कि अल्ट्रासाउंड को आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें किसी प्रकार की कोई X-ray रेडिएशन का इस्तेमाल नहीं होता. इसलिए गर्भावस्था में भी डॉक्टर जरूरत पड़ने पर इसकी सलाह देते हैं.

यह भी पढ़ें: रोज 30 मिनट पैदल चलने का पैसा देगी सरकार, जानें NHS की ये स्कीम कैसे करेगी काम

(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं.)

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Surbhi . Content Writer
लिखने-पढ़ते लिखने की रूचि पैदा हुई. पिछले 1 साल से मीडिया इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं. फिलहाल फिट रहे इंडिया के साथ बतौर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. इससे पहले जनता टीवी में सोशल मीडिया डिपार्टमेंट में काम किया. उन्हें लाइफस्टाइल, फूड, हेल्थ से जुड़े विषय में लिखने-पढ़ने और नई चीजें जानने का खूब शौक है.
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लिखने-पढ़ते लिखने की रूचि पैदा हुई. पिछले 1 साल से मीडिया इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं. फिलहाल फिट रहे इंडिया के साथ बतौर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. इससे पहले जनता टीवी में सोशल मीडिया डिपार्टमेंट में काम किया. उन्हें लाइफस्टाइल, फूड, हेल्थ से जुड़े विषय में लिखने-पढ़ने और नई चीजें जानने का खूब शौक है.
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