Over-Screening Health Risks: सोशल मीडिया पर कई इंफ्लुएंसर्स आपको हेल्थ रिलेटेड जानकारी देते मिल जाएंगे. कुछ लोग तो ऐसे भी हैं जो सेलिब्रिटीज को देखते हैं और अपनी सेहत की चिंता करने लगते हैं. अगर आप भी उन लोगों में से हैं, तो ये जानकारी आपके काम की होने वाली है. क्योंकि सोशल मीडिया पर जो दिखाई देता है जरूरी नहीं वो हमेशा सच ही हो.
ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि कुछ लोग ऐसे ही सोशल मीडिया पर वीडियोज देख लेने के बाद पहुंच रहे हैं सीधे लैब सेंटर्स अपना टेस्ट करवाने के लिए. आप कहेंगे कि ये तो अच्छी बात है कि लोग अपने हेल्थ के प्रति जागरूक हो रहे हैं और रूटीन चेकअप करवा रहे हैं. लेकिन ऐसा नहीं है. क्योंकि यही चेकअप करवाना लोगों को भारी पड़ रहा है और मानसिक तनाव बढ़ रहा है. कैसे आइए जानते हैं.
फुल बॉडी MRI करवा लिया
एक जानकारी हाल ही में सामने आई थी जिसमें बताया गया कि एक व्यक्ति ने हेल्थ अवेयरनेस वीडियो को देखा और इस सोशल मीडिया के प्रभाव के चलते आलीशान लैब का रुख किया औऱ कर दिए लाखों रुपये खर्च. सिर्फ फुल बॉडी MRI टेस्ट करवाने में. व्यक्ति को ऐसा लग रहा था कि ये काफी अच्छा स्टेप है. अपना चेकअप करवा लेगा और उसे बीमारी का पता चल जाएगा. लेकिन रिपोर्ट में सामने आया कि व्यक्ति के फेफड़ों के पास एक छोटा सा नोड्यूल और किडनी के पास एक छोटा सिस्ट दिखा. जिसे देखते ही व्यक्ति काफी तनाव में आ गया.
ये मामला सुनने में ऐसा लग रहा है कि व्यक्ति किसी बड़ी बीमारी का शिकार होने से बच गया. लेकिन हकीकत कुछ और ही थी. व्यक्ति के अगले तीन महीने इसी रिपोर्ट के कारण क्लीनिकों के चक्कर लगाने में लगे. इतना ही नहीं उसने और भी महंगे टेस्ट करवा लिए. जिससे क्या हुआ वो स्ट्रेस में आने लगा. अंत में पता चला कि जो रिपोर्ट में दिख रहा था वो एक मामूली गांठ थी जो अक्सर जब उम्र बढ़ती है तो शरीर में अपने आप बन ही जाती है. मेडिकल टर्म कहती है कि इस तरह की परेशानी को ओवर स्क्रीनिंग कहा जाता है.
क्या होता है ओवर स्क्रीनिंग
ओवर स्क्रीनिंग की कंडिशन तब होती है जब आप इसी तरह बिना किसी कारण चेकअप करवाने चले जाते हैं यानी आपके शरीर ने आपसे नहीं कहा किसी की जांच करवाने के लिए लेकिन वीडियो में आपने देखा था. जानकारी पाने के लिए आप चले गए टेस्ट करवाने नतीजा ये हुआ बिना जरूरत के की गई जांच करवाना सिर्फ तनाव ही दिया और पैसों का नुकसान भी हुआ.
कब करवानी चाहिए स्क्रीनिंग
अब आपको इस तरह की स्क्रीनिंग का रुख तभी करना चाहिए जब किसी बीमारी को पकड़ पाना ही मुश्किल हो रहा हो. आप इसकी पहचान कैसे करेंगे कि आपको कोई बाहरी लक्षण नहीं दिख रहा. उदहारण के तौर पर ब्लड शुगर, हाई बीपी की समस्या. ये कुछ ऐसी बीमारियां है, जो हमें खामोशी से हमारे दिल और आंखों को नुकसान पहुंचाती हैं. हालांकि अगर समय रहते इनका पता चल जाए, तो बहुत सस्ती दवाओं और लाइफस्टाइल में मामूली बदलाव करके इन्हें रोका जा सकता है. अब जो लोग सोशल मीडिया देखकर ऐसे टेस्ट करवा लेते हैं उन्हें ऐसे टेस्ट करवाने से रोका इसलिए जाता है क्योंकि आजकल इंफ्लुएंसर्स अपने मुनाफे में लोगों को महंगे टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं. जिससे उन्हें मुनाफा मिल सके.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं.)

