Prediabetes Cause Heart Attack: दुनिया भर में डायबिटीज तेजी से पैर पसारने वाली बीमारियों में से एक हैं. IDF Diabetes Atlas 2025 के अनुसार, भारत में करीब 9 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जो दुनिया में सबसे अधिक प्रभावित देशों में से एक है. वहीं अगर इसे सही समय पर पहचान लिया जाए तो इसका इलाज संभव है. बता दें कि डायबिटीज कई स्टेज पर होती है. अगर इसे पहले स्टेज पर ही पहचान लिया जाए तो इसके जोखिम को रोका जा सकता है. आज के आर्टिकल में हम बात करेंगे कि क्या प्री-डायबिटीज का दिल को नुकसान पहुंचा सकती है?
डायबिटीज उस स्थिति को कहते हैं जब शरीर में इंसुलिन सही तरह से काम नहीं करता, ऐसे में ब्लड लेवल बढ़ जाता है. अगर व्यक्ति का लंबे समय तक ब्लड शुगर लेवल हाई रहता है तो उसके हार्ट, किडनी, आंखों और नसों को नुकसान पहुंचाता है. बता दें कि इंसुलिन एक हार्मोन है, जो ब्लड में मौजूद शुगर को कोशिकाओं तक पहुंचाकर ऊर्जा में बदलने का काम करता है. इसके बिगड़ने पर ही ब्लड शुगर बढ़ जाता है.
प्री-डायबिटीज दिल को पहुंचा रही नुकसान
प्री-डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति का ब्लड शुगर लेवल सामान्य से अधिक होता है, लेकिन इतना नहीं बढ़ा होता कि उसे डायबिटीज माना जाए. इसलिए इसे डायबिटीज से पहले की कैटेगरी में रखा जाता है. यह डायबिटीज का शुरुआती चेतावनी संकेत होता है. अगर डायबिटीज को इसी स्टेज पर पहचान लिया जाए तो ब्लड शुगर कंट्रोल किया जा सकता है.
एक्सपर्ट कहते हैं कि प्री-डायबिटीज केवल शुगर की समस्या नहीं है, बल्कि यह दिल की सेहत पर भी असर डालती है. प्री-डायबिटीज में शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने लगता है, जिससे ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) का स्तर बढ़ सकता है. साथ ही, शरीर में सूजन (Inflammation) भी बढ़ सकती है, जो रक्त वाहिकाएं (Blood Vessels) को भी नुकसान पहुंचाती है.
इन बदलावों के कारण नसों में फैट जमा होने लगता है, जिससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य दिल की सेहत का खतरा बढ़ जाता है. दरअसल प्री-डायबिटीज के स्टेज में ही हार्ट को नुकसान होने लगता है. इस बात को समझ जाना बेहद जरूरी है. इसलिए, इस स्थिति की अनदेखी करना व्यक्ति के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. वहीं कई लोगों को प्री-डायबिटीज के लक्षण पता नहीं चलते. ऐसे में जरूरी है कि आप रोजाना ब्लड शुगर लेवल जांचे. इसलिए बैलेंस्ड डाइट लें, हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर प्री-डायबिटीज को कंट्रोल में रखा जा सकता है और दिल को होने वाले नुकसान से भी बचाया जा सकता है.
प्री-डायबिटीज के लक्षण
- बार-बार प्यास लगना
- सामान्य से अधिक भूख लगना
- बार-बार पेशाब आना
- जल्दी थकान महसूस होना
- धुंधला दिखाई देना
- वजन में बदलाव
- गर्दन, बगल या शरीर के अन्य हिस्सों की त्वचा का काला पड़ना (Acanthosis Nigricans)
एक्सपर्ट के अनुसार, यदि आपके परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, वजन अधिक है या शारीरिक गतिविधि कम है, तो नियमित ब्लड शुगर जांच कराना जरूरी है. समय रहते प्री-डायबिटीज की पहचान कर ली जाए तो खानपान और जीवनशैली में बदलाव करके टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
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