Chronic Fatigue Syndrome: कई लोग घंटों-घंटों सोने के बाद भी थका हुआ-सा महसूस करते हैं. उनको लगता है कि उन्हें और नींद लेने की जरूरत है. शरीर की थकान अभी मिटी नहीं ऐसे में वह कई-कई घंटों तक सोते रहते हैं. व्यक्ति का सेहतमंद रहने के लिए सोना भी जरूरी होता है. लेकिन यहां पर ये बात उल्टी हो जाती है, जब कोई व्यक्ति घंटों-घंटों तक सोता है तो उसे अलर्ट होने की जरूरत होती है.
दरअसल लंबे समय और पर्याप्त मात्रा में नींद लेने के बाद भी अगर आपके शरीर की थकान नहीं मिटती तो आप क्रॉनिक फैटिग सिंड्रोम (CFS) के शिकार हैं. गौरतलब है कि हर साल 12 मई को वर्ल्ड क्रोनिक फटिग सिंड्रोम डे मनाया जाता है. ताकि इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके. इसके अलावा अगर आपको लगता है कि आप भी इस बीमारी के शिकार हैं तो कुछ तरीको को अपनाकर इसे ठीक कर सकते हैं.
क्रॉनिक फैटिग सिंड्रोम से कैसे बचें
- कोशिश करें कि शारीरिक और मानसिक तनाव ना हो.
- जंक फूड से दूरी बनाए और संतुलित और पौष्टिक आहार का सेवन करें.
- भरपूर मात्रा में पानी पीते रहें.
- बीमार होने पर शरीर को आराम दें, थकान ना होने दें.
- ध्यान, योग और मेडिटेशन को लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाए.
- नियमित और पर्याप्त नींद लें.
- कैफीन और अल्कोहल से दूरी बनाए.
क्या है क्रोनिक फटिग सिंड्रोम?
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (CDC) के अनुसार यह बीमारी हमारे शरीर के सिस्टम को बुरी तरह प्रभावित कर देती है. ये बीमारी दिनचर्या पर गहरा असर डालती है. व्यक्ति अपनी सामान्य गतिविधियां तक नहीं कर पाते. इस बीमारी को नाम मायल्जिक एन्सेफेलोमाइलाइटिस/क्रोनिक फैटीग सिंड्रोम (Myalgic Encephalomyelitis/Chronic Fatigue Syndrome) कहा जाता है. इसे शॉर्ट में ME/CFS भी कहा जाता है.इस बीमारी में शरीर और दिमाग दोनों जल्दी थक जाते हैं. कई लोगों में हल्का काम, तनाव या मानसिक मेहनत करने के बाद भी कमजोरी और बढ़ जाती है. ये समस्या सीधे तौर पर व्यक्ति के फिजिकल और मेंटल हेल्थ से जुड़ी हुई है.
क्रोनिक फैटिग सिंड्रोम से बचाव क्यों जरूरी?
यहां ये समझना जरूरी है कि इस बीमारी से बचाव क्यों जरूरी है. दरअसल इस बीमारी से बचना इसलिए जरूरी है क्योंकि ये मेंटल हेल्थ से जुड़ी हुई है. एक्सपर्ट कहते हैं कि यह एक लाइलाज स्थिति है, जिसमें अत्यधिक शारीरिक और मानसिक कमजोरी हो जाती है, , जो लंबे आराम के बाद भी ठीक नहीं होती.
क्रॉनिक फैटिग सिंड्रोम के लक्षण
- लगातार थकान महसूस होना.
- हल्का काम करने पर भी बहुत ज्यादा कमजोरी आना.
- नींद पूरी होने के बाद भी ताजगी महसूस न होना.
- ध्यान लगाने और याददाश्त में परेशानी.
- सिरदर्द या चक्कर आना.
- मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द.
- गले में खराश या बार-बार संक्रमण जैसा महसूस होना.
- लंबे समय तक खड़े रहने पर कमजोरी या बेचैनी.
- शारीरिक या मानसिक मेहनत के बाद लक्षणों का बढ़ जाना.
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FAQs
सवाल: क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम (Chronic Fatigue Syndrome) क्या है?
जवाब: यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को लंबे समय तक अत्यधिक थकान रहती है, जो आराम करने के बाद भी पूरी तरह दूर नहीं होती.
सवाल: क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
जवाब: लगातार थकान, नींद के बाद भी तरोताजा महसूस न होना, ध्यान लगाने में कठिनाई, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द तथा हल्का काम करने के बाद भी ज्यादा थकान महसूस होना इसके सामान्य लक्षण हैं.
सवाल: क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम का इलाज कैसे किया जाता है?
जवाब: इसका उपचार लक्षणों के आधार पर किया जाता है. संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, तनाव कम करना, डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं और हल्की शारीरिक गतिविधि से लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है.
(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

