Research on First Cousin Marriages: अक्सर मुस्लिम देशों में भाई-बहन की शादी को लेकर चर्चा होती रहती है. भाई-बहन के बीच भी शादी कई देशों में पॉपुलर है. अब इसपर हेल्थ रिपोर्ट जारी की गई है. ये रिपोर्ट वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू द्वारा जारी की गई है. रिपोर्ट बताती है कि कजिन मैरिज पाकिस्तान में सबसे अधिक होती है.
क्योंकि उन देशों में ऐसी शादियां हो रही है, इसलिए इसे एक्सेप्ट किया जाता है. साथ ही इसपर कोई आपत्ति भी किसी को नहीं होती है. लेकिन क्या ये साइंटिफिक तरह से शादी सही है या फिर नहीं? कजिन मैरिज की वजह से जेनेटिक डिसॉर्डर और कई जानलेवा बीमारी का रिस्क बढ़ जाता है. कैसे आइए डिटेल में जानते हैं.
आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरनाक
अब जो दो भाई-बहन मैरिज कर रहे हैं भले ही उन्हें कोई रिस्क न हो. लेकिन रिसर्च बताती है कि कजिन मैरिज करने से आने वाली पीढ़ियों को हेल्थ रिस्क बढ़ जाता है. उनके जेनेटिक डिसॉर्डर होने का खतरा अधिक रहता है. जब किसी इंसान का कोई एक न एक जीन काम करना बंद हो जाता है या फिर गायब हो जाता है तो इस कंडिशन को कहा जाता है ह्यूमन नॉकआउट. जो नई रिपोर्ट सामने आई है उसमें पाकिस्तान इस समय ह्यूमन नॉकआउट पर है. जानकारी है कि रिसर्च के अंदर लगभग 34 हजार लोग इस ह्यूमन नॉकआउट का शिकार है.
दो जीन की कॉपी होती है
आपको बता दें कि किसी भी इंसान में हर जीन की दो कॉपियां होती है. जैसे एक जीन मां का और दूसरा जीन पिता से मिलता है. लेकिन जब कजिन की मैरिज हो जाती है, तो बच्चों में जीन एक जैसा म्यूटेशन देखने को मिलता है. यानी शरीर में से जीन पूरी तरह गायब हो जाते हैं. अब जान लेते हैं कि अगर जीन शरीर से गायब हो जाते हैं, तो इसका असर शरीर पर क्या पड़ता है? इसके क्या साइड इफेक्ट्स होते हैं या फिर इसका इलाज क्या है.
नेचर में छपी स्टडी के अनुसार दक्षिण एशियाई देशों में जीनोमिक अध्य्यन में 1,73,303 जीनोम का आकलन किया गया. इस शोध से इंसान के जीन, आनुवंशिकी विकास को अच्छे से समझ और इस इलाज के लिए दवाई का विकास कर सके. रिसर्च में पाया गया है कि पाकिस्तान जीनोम रिसोर्स में शामिल हर पांच में एक इंसान में कम से कम एक जीन गायब है. स्टडी के मुताबिक 6500 जीन स्विच ऑफ मिले.इस स्टडी में देखा गया है कि इंसान के शरीर से जीन गायब होने पर उनकी सेहत पर क्या असर पड़ सकता है.
चूहों पर होती थी स्टडी
ये भी जानकारी है कि इससे पहले तक जीन की स्टडी करने के लिए चूहों पर रिसर्च किया जाता था. रिसर्च की गई और नोट किया गया कि चूहों और इंसानों के जीन दोनों अलग-अलग तरीके से काम करते हैं. यानी जो दवा चूहों पर काम करेगी वो इंसानों पर नहीं करेगी. इसी कारण लाखों रुपये समय और मेहनत सभी बर्बाद हो जाती है. पर नई स्टडी रिसर्च में बड़ी खोज हुई और एक बड़ा क्यू मिल सकने की उम्मीद है.
यह भी पढ़ें: WHO की चेतावनी! बच्चों में तेजी से बढ़ रहा डेंगू का खतरा, जानें लक्षण और इलाज
(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

