Tandoori Chai: क्या आपने तंदूरी चाय का सेवन किया है? सुनने में थोड़ा सा अलग ख्याल आ सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है. भारत के कई राज्यों में इसका सेवन बड़े चाव से किया जाता है. ये चाय अपने स्वाद और सुगंध के लिए जानी जाती है. इसके अलावा इस चाय के दिवाने आपको जगह-जगह मिल जाएंगे. आज के आर्टिकल में हम जानेंगे कि क्या तंदूरी चाय बनाते कैसे हैं? साथ ही जानेंगे कि इस चाय के दिवाने क्यों हैं? चाय की खासियत के बारे में भी जानेंगे.
अब तक आपने ब्लैक टी, ग्रीन टी, व्हाइट टी, ऊलोंग टी, पुएर टी और येलो टी जैसी चाय के बारे में सुना होगा. वहीं अगर आपने तंदूरी चाय के बारे में नहीं सुना तो आपको जरूर पता होना चाहिए. दरअसल भारत में भी चाय की कई लोकप्रिय वैरायटी मिलती हैं, जिनमें मसाला चाय, अदरक चाय, इलायची चाय, तुलसी चाय, लेमन टी, कश्मीरी कहवा और तंदूरी चाय प्रमुख हैं. इसके अलावा दार्जिलिंग, असम और नीलगिरि जैसी क्षेत्रीय चाय भी अपनी खास सुगंध और स्वाद के लिए प्रसिद्ध हैं.
तंदूरी नाम क्यों पड़ा?
तंदूरी शब्द तंदूर से लिया गया है, जिस तरह तंदूर में रोटी, नान या दूसरे प्रकार के खाने बनाए जाते हैं, उसी तरह तंदूरी चाय में मिट्टी के कुल्हड़ को बहुत अधिक तापमान पर गर्म किया जाता है. जब गर्म कुल्हड़ में चाय डाली जाती है तो उससे धुआं और बुलबुले निकलते हैं, जो चाय को एक अलग स्वाद और सुगंध देते हैं.
तंदूरी चाय की खासियत
- मिट्टी की सौंधी खुशबू.
- स्मोकी (धुएं जैसा) फ्लेवर.
- सामान्य चाय की तुलना में अलग स्वाद.
- सर्दियों में विशेष रूप से पसंद की जाती है.
तंदूरी चाय कैसे बनाए
तंदूरी चाय बनाने के लिए सबसे पहले दूध, पानी, चायपत्ती, चीनी और स्वादानुसार अदरक या इलायची डालकर सामान्य चाय तैयार की जाती है. दूसरी ओर, मिट्टी के कुल्हड़ को तंदूर या तेज आंच पर तब तक गर्म किया जाता है जब तक वह लाल न हो जाए. इसके बाद गर्म कुल्हड़ को एक बर्तन में रखकर उसमें तैयार चाय डाली जाती है. गर्म कुल्हड़ के संपर्क में आते ही चाय में धुएं जैसी खुशबू और मिट्टी का सौंधा स्वाद आ जाता है. फिर चाय को कप या कुल्हड़ में छानकर गर्मागर्म परोसा जाता है. चाय में गर्म कुल्हड़ में से आने वाली स्वाद और सुगंध के कारण ही इसे तंदूरी चाय कहा जाता है.
तंदूरी चाय के फायदे
- चाय में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में मदद करते हैं.
- अदरक, दालचीनी और इलायची जैसे मसाले पाचन को बेहतर बनाने और सूजन कम करने में फायदेमंद है.
- चाय में मौजूद फ्लेवोनॉयड्स दिल की सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं.
- मिट्टी के कुल्हड़ में तैयार होने से चाय में सौंधी खुशबू और स्वाद आती है, जो लोगों आकर्षित करती है.
किन बातों का ध्यान रखें?
अगर चाय में ज्यादा चीनी डाली जाए तो कैलोरी और शुगर का सेवन बढ़ जाता है.
चाय में कैफीन होता है, इसलिए अधिक मात्रा में पीने पर नींद की समस्या, घबराहट या पेट की परेशानी हो सकती है.
खाली पेट अधिक चाय पीने से कुछ लोगों में मतली या एसिडिटी की शिकायत हो सकती है.
कुल्हड़ या मिट्टी के बर्तन खाद्य-सुरक्षित (food-grade) और अच्छी गुणवत्ता के होने चाहिए.
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FAQs
सवाल: क्या तंदूरी चाय स्वास्थ्य के लिए अच्छी होती है?
जवाब: तंदूरी चाय सीमित मात्रा में पी जाए तो सामान्य चाय की तरह सुरक्षित मानी जाती है. इसके स्वास्थ्य लाभ मुख्य रूप से चाय और उसमें डाले गए मसालों से मिलते हैं. हालांकि, अधिक चीनी और अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए.
सवाल: तंदूरी चाय कैसे बनाई जाती है?
जवाब: सबसे पहले दूध, चायपत्ती और चीनी से सामान्य चाय बनाई जाती है. इसके बाद मिट्टी के कुल्हड़ को तंदूर या तेज आंच पर गर्म किया जाता है. गर्म कुल्हड़ में चाय डालने पर उसमें स्मोकी फ्लेवर आ जाता है, फिर उसे परोस दिया जाता है.
सवाल: क्या तंदूरी चाय स्वास्थ्य के लिए अच्छी होती है?
जवाब: तंदूरी चाय सीमित मात्रा में पी जाए तो सामान्य चाय की तरह सुरक्षित मानी जाती है. इसके स्वास्थ्य लाभ मुख्य रूप से चाय और उसमें डाले गए मसालों से मिलते हैं. हालांकि, अधिक चीनी और अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए.
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