Cancer Treatment: कैंसर एक खतरनाक बीमारी है. ये बीमारी सुनने में जितनी खतरनाक है उतनी ही लाइलाज है. इस बीमारी को ठीक करने के लिए एक खास प्रकार की कीमोथेरेपी का प्रयोग किया जाता है. कीमोथेरेपी के बिना इस बीमारी का ठीक होना संभव नहीं, वहीं नई रिसर्च में ये बात निकलकर आई है कि बिना कीमोथेरेपी कैंसर का इलाज किया जाएगा.
ये बात सुनने में भले ही चौंकाने वाली लगे, लेकिन साइंटिस्टों की नई खोज न ये संभव कर दिखाया है कि, कैंसर का इलाज बिना कीमोथेरेपी के संभव है. विस्तार से जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर.
दरअसब कैंसर शरीर की कोशिकाओं यानि सेल्स का एक अनियंत्रित और असामान्य रूप से बढ़ना है, जो हेल्दी टिश्यू यानि ऊतकों को संक्रमित करके ट्यूमर बनाता है. शरीर में कैंसर के कई प्रकार हो सकते हैं. लेकिन अगर समय रहते कैंसरों के लक्षणों की पहचान कर इसका इलाज शुरू कर दिया जाए तो इसे ठीक करना आसान हो जाता है.
क्या है कीमोथेरेपी?
कीमोथेरेपी कैंसर के इलाज के लिए सबसे मशहूर है. कीमोथेरेपी में खास दवाईयों की मदद से शरीर में बढ़ने वाले कैंसर कोशिकाओं को संक्रमित होने से बचाया जाता है. कीमोथेरेपी कैंसर को फैलने से रोकता है, ट्यूमर को छोटा करने और लक्षणों को कम करने में मदद करता है. यह आमतौर पर नसों के माध्यम से (IV), गोलियों के रूप में, या इंजेक्शन द्वारा दी जाती है.
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क्या कीमोथेरेपी में बहुत दर्द होता है?
दरअसल कीमोथेरेप सुनने में बहुत भारी लगता है. लेकिन कीमोथेरेपी प्रक्रिया के दौरान आम तौर पर तेज दर्द नहीं होता. लेकिन सुई लगाने या दवा के साइड इफेक्ट्स (जैसे नसों में झुनझुनी, बदन दर्द, या छाले) के कारण मरीजों को थोड़ी पेरशानी हो सकती है. कीमोथेरेपी के दौरान होने वाले दर्द को कीमो पोर्ट की मदद से कम किया जा सकता है.
महंगी होती कीमोथेरेपी
दरअसल कीमोथेरेपी का इलाज काफी महंगा है, जो मुख्य रूप से कैंसर के प्रकार, चरण और अस्पताल पर निर्भर करता है. बता दें कि कैंसर से लड़ने वाले CAR-T सेल्स को लैब में बनाना पड़ता है, जो बहुत महंगा और मरीज को परेशान करने वाला होता हैं. लेकिन नई रिसर्च में एक ऐसी तकनीक खोज निकाली है, जिससे ये सेल्स सीधे मरीज के शरीर के अंदर ही तैयार किए जा सकेंगे.
नई तकनीक में क्या नया?
कैंसर के इलाज में जिस पुरानी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, इसमें सबसे पहले मरीज के शरीर से सेल्स निकाले जाते हैं, फिर उन्हें लैब भेजा जाता है जहां उन्हें कैंसर से लड़ने के लिए री-प्रोग्राम किया जाता है. वहीं इसमें खर्च भी ज्यादा आता है. इसके अलावा, कीमोथेरेपी के दौरान मरीज को कई परेशानियों से भी गुजरना पड़ता है.
नई रिसर्च में साइंटिस्टों ने एक डुअल-पार्टिकल सिस्टम तैयार किया है. यह शरीर के अंदर जाकर सीधे सिर्फ इम्यून सिस्टम की कोशिकाएं को पहचानता है और उनमें नया DNA फिट कर देगा. इस तकनीक की सबसे अच्छी बात यह है कि यह नया DNA तभी एक्टिव होता है जब वह अपनी सही जगह पर पहुंच जाए. इससे शरीर की दूसरी हेल्दी सेल्स को कोई नुकसान नहीं पहुंचता.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


