होमExplainersकैसे 'लत लगाने वाली मशीनें' बनते जा रहे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म? कोर्ट...

कैसे ‘लत लगाने वाली मशीनें’ बनते जा रहे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म? कोर्ट ने मेटा, Youtube और गूगल को दोषी पाया

Meta Youtube Verdict 2026: अमेरिका से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. जूरी ने महिला को सही जताया और प्लेटफॉर्म पर जुर्माना लगाया.

Meta Youtube Verdict 2026: अमेरिका से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. जहां एक जूरी ने महिला को सही जताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ बड़ा जुर्माना लगाया. महिला का आरोप था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक, व्हाट्सऐप या फिर यूट्यूब, गूगल इन प्लेटफॉर्मस को जान बूझकर बनाया गया है. जिनसे लोगों को इसकी लत लगती जा रही है.

जानकारी सामने आई कि इस एडिक्शन के कारण महिला की तबियत खराब हुई. जिससे 20 साल की उम्र में उनके स्वास्थ्य को काफी नुकसान पहुंचा. अब इसपर अमेरिकन महिला केली के पक्ष में फैसला सुनाते हुए हर्ज़ाने के तौर पर 60 लाख अमेरिकी डॉलर यानी करीब साढ़े 56 करोड़ रुपये चुकाने का फ़ैसला भी सुनाया गया है. क्या है ये मामला आइए डिटेल में जानते हैं और जानेंगे कि आखिर कैसे सोशल मीडिया का असर आम लोगों की लाइफ पर पड़ रहा है.

परिवार से मिलना जुलना हुआ बंद

कोर्ट में दलील देने के दौरान केली ने बताया कि उसने 9 साल की उम्र में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम और छह साल की उम्र से यूट्यूब का इस्तेमाल किया था. हालांकि इस ऐज में प्लेटफॉर्म की ओर से रोकने की कोई कोशिश नहीं की गई. जिस कारण उन्हें लत लगी और यहां तक कि अपने परिवार से भी मिलना-जुलना बंद कर दिया था. क्योंकि केली अपना सारा समय सोशल मीडिया पर ही बिताने लगी थी. 10 साल की उम्र में ही केली डिप्रेशन का शिकार हो गई. हालांकि इसके इलाज के लिए उन्होंने कई साल बाद थेरेपिस्ट से इलाज भी लिया.

सोशल मीडिया पर उठे सवाल

जब इस तरह के मामले सामने आते हैं, तो एक इन प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ सवाल जरूर छोड़ जाते हैं. क्योंकि सोशल मीडिया आजकल के युवाओं की लाइफ बेकार करता जा रहा है. दरअसल इंटरनेट को इस तरह से तैयार किया गया है कि आप चाहकर भी दूर नहीं रह सकते हैं. भारत सरकार ने भी एक सर्वे के दौरान डिजिटल एडिक्शन को लेकर गहरी चिंता जताई है. इस सर्वे में बच्चों की Age Limit तय करने और ऐसे एडिक्टिव फीचर्स पर रोक लगाने की मांग की गई है.

यह भी पढ़ें: सिगरेट, गुटखे वालों को हड्डियां टूटने का अधिक खतरा; डॉक्टर से जानें क्या करें

कई देश उठा रहे ऐसे कदम

वहीं सिर्फ इन प्लेटफॉर्मस की लत भारत में नहीं बल्कि कई देशों में देखी जाती है. इसपर एक्शन लेते हुए कई सरकारे बच्चों के सोशल मीडिया यूसेज पर बैन लगाने या फिर उसे सीमित करने का कदम उठा रहे हैं. ब्रिटेन में फिलहाल ऐसा पायलट प्रोग्राम जारी है. वहीं अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इन प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ फैसला सुनाया.

कंपनी ने बुना डिजिटल जाल

कोर्ट का कहना है कि अगर बच्चे या फिर युवा इनसे दूर नहीं रह पा रहे. या फिर रातभर बिना वजह रील्स स्क्रॉल करते रहते हैं तो ये साबित होता है कि ये सिर्फ कमजोरी नहीं बल्कि इन कंपनियों का बना हुआ एक डिजिटल जाल है. अब जब ऐसे मामले उजागर होते हैं, तो कंपनिया अपना पल्ला झाड़ लेती हैं, कि हमने सिर्फ प्लेटफॉर्म बनाए कॉन्टेंट के लिए हम जिम्मेदार नहीं है. लेकिन इस केस में वकीलों का कहना था कि ये इन्फिनिट स्क्रॉल यानी कभी न खत्म होने वाली फीड और ऑटोप्ले इस तरह के फीचर्स स्लॉट मशीन की तरह काम करती हैं.

इसलिए ये फैसला केली के पक्ष में सुनाया गया और कोर्ट का मानना है कि ये फीचर्स मासूम बच्चों को हुक करकर यानी उन्हें ऐसे फीचर्स इस्तेमाल करने के लिए बांधे रखते हैं. जिसके कारण वो घंटो तक स्क्रीन से चिपपकर ही बने रहते हैं. वहीं इस मामले में कोर्ट में मेटा की ओर से डॉक्यूमेंट्स भी पेश किए गए थे. जिसमें ये साफ था कि अधिकारियों को ये मालूम है कि ये प्लेटफॉर्म बच्चों के लिए किस तरह हानिकारक हो सकता है. लेकिन इसके बावजूद इसमें कोई कदम नहीं उठाए गए. न ही उनमें किसी तरह का बदलाव किया गया.

यह भी पढ़ें: अजगर के खून से घटेगा वजन! नहीं कोई Side Effect; जानें कैसे होगा ये कमाल

author avatar
sarthak arora Senior Sub Editor
अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
sarthak arora
sarthak arora
अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
RELATED ARTICLES

खांसी हो रही है तो कब पीना चाहिए कफ सिरप? जानें कब पड़ती है दवा की जरूरत

Khansi Mein Cough Syrup Kab Peena Chahiye: : खांसी शुरू होते ही कफ सिरप पीना सही है या नहीं? जानें सूखी और बलगम वाली खांसी में क्या फर्क है, कब दवा लेनी चाहिए और किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से मिलना जरूरी है.

Baby Teething Symptoms: दांत निकलते समय बच्चा क्यों रोता है? जानें चिड़चिड़ापन कम करने के आसान और सुरक्षित उपाय

Baby Teething Symptoms: जानें दांत निकलते समय बच्चे क्यों रोते और चिड़चिड़े हो जाते हैं. एक्सपर्ट्स के बताए सुरक्षित उपाय और देखभाल के आसान टिप्स.

World IVF Day 2026: कब कराना चाहिए IVF? जानिए किसे होती है जरूरत, सफलता किन बातों पर करती है निर्भर

World IVF Day 2026: IVF क्या है, किन लोगों को इसकी जरूरत पड़ती है, कब फर्टिलिटी एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए और सफलता किन बातों पर निर्भर करती है, जानिए.

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Most Popular

क्या होता है यूरिक एसिड? जानें बढ़ जाए तो कैसे कर सकते हैं कंट्रोल

High Uric Acid Symptoms: यूरिक एसिड क्या होता है, क्यों बढ़ता है, इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं और इसे कैसे कंट्रोल करें? जानिए डाइट, वजन और लाइफस्टाइल से जुड़े जरूरी उपाय.

ऐसे बनाएं रिच प्रोटीन ब्रेकफास्ट, मिनटों में होगा तैयार

High Protein Breakfast: सुबह का नाश्ता पूरे दिन की एनर्जी का काम करता है. इसलिए गलती से भी सुबह का नाश्ता स्किप नहीं होना चाहिए.

खांसी हो रही है तो कब पीना चाहिए कफ सिरप? जानें कब पड़ती है दवा की जरूरत

Khansi Mein Cough Syrup Kab Peena Chahiye: : खांसी शुरू होते ही कफ सिरप पीना सही है या नहीं? जानें सूखी और बलगम वाली खांसी में क्या फर्क है, कब दवा लेनी चाहिए और किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से मिलना जरूरी है.

जमीन पर बन रही थी सोया चाप, वायरल वीडियो के बाद मचा हड़कंप!

Soya Chaap Viral Video: सोया चाप बनाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें हाइजीन को लेकर सवाल उठे हैं. जानें क्या है पूरा मामला, फूड सेफ्टी विभाग ने क्या कार्रवाई की और किन बातों का रखें ध्यान.

Recent Comments