Sehat Ki Khabar Fit Rahe India: नमस्कार फिट रहे इंडिया की लेटेस्ट अपडेट में आपका स्वागत है. बच्चों में आसानी से होगी डायबिटीज की पहचान इसपर बात करेंगे सेहत की खबर के पहले सेगमेंट में. बच्चों के लिए बनाए जाएंगे डिजिटल हेल्थ कार्ड सिस्टम इसपर बात करेंगे सेहत की खबर के दूसरे सेगमेंट में. अस्थमा से कैसे करें बचाव इसपर बात करेंगे तीसरे और आखिरी सेगमेंट में.
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पहले सेगमेंट में जानेंगे बच्चों में होगी डायबिटीज की आसानी से पहचान
भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के निरंतर कार्य जारी है. इसी कड़ी में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है. इसके तहत बच्चों में होने वाली डायबिटीज की आसानी से पहचान की जाएगी. इसके लिए सरकार की ओर से नई गाइडलाइंस भी जारी कर दी गई हैं.
इस गाइडलाइंस के मुताबिक 18 साल तक के सभी बच्चों पर जोर दिया जाएगा. इनमें स्कूल और समुदाय स्तर पर बच्चों की स्क्रीनिंग की जाएगी. जिससे की बीमारी का जल्द से जल्द पता लगाया जा सके. साथ ही अगर किसी बच्चे में लक्षण दिखाई देंगे तो तुरंत ब्लड शुगर टेस्ट किया जाएगा. साथ ही जरूरत पड़ने पर जिला अस्पताल भेजा जाएगा.
दूससे सेगमेंट में जानेंगे बच्चों का बनेगा डिजिटल हेल्थ कार्ड
एक कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य मंत्राय द्वारा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम को लेकर एक नई गाइडलाइंस जारी की गई है. इसका उद्देश्य बच्चों में होने वाली बीमारियों की समय पर पहचान इलाज और उनकी पूरी देखभाल बेहतर तरीके से हो पाएगी. RBSK 2.0 में पहले से चल रहे 4Ds मॉडल को और मजबूत किया गया है. यानी जन्म से जुड़ी समस्याएं, बीमारियां, पोषण की कमी और विकास में देरी. अब इसमें नई चुनौतियों को भी जोड़ा गया है, जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मानसिक स्वास्थ्य और बच्चों के व्यवहार से जुड़ी समस्याएं.
तीसरे सेगमेंट में जानेंगे अस्थमा को कैसे करें कंट्रोल
मौसम में बार-बार बदलाव होने का सबसे ज्यादा असर अस्थमा के मरीजों पर पड़ता है. जब तापमान अचानक बदलता है, हवा में नमी बढ़ती या घटती है, या फिर धूल और प्रदूषण बढ़ जाता है, तो सांस से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं. ऐसे में लोगों को खांसी, सांस फूलना और सीने में जकड़न जैसी दिक्कतें महसूस होने लगती हैं, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है.
मौसम बदलने पर शरीर को नए माहौल में ढलने में थोड़ा समय लगता है, और इसी दौरान अस्थमा के लक्षण जल्दी ट्रिगर हो सकते हैं. खासकर सुबह और शाम के समय ठंडी या नम हवा परेशानी बढ़ा सकती है. कई लोग इन शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे समस्या धीरे-धीरे गंभीर हो सकती है. इसलिए जरूरी है कि शरीर के संकेतों को समझा जाए और समय रहते सावधानी बरती जाए.
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