Sehat Ki Khabar: नमस्कार, फिट रहे इंडिया की लेटेस्ट अपडेट्स में आपका स्वागत है. क्या आप जानते हैं कि अब भारत में 10 में से 9 से ज्यादा बच्चों का जन्म अस्पताल में हो रहा है? इतना ही नहीं, बच्चों के टीकाकरण, महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं और हेल्थ इंश्योरेंस जैसी सुविधाओं में भी बड़ा सुधार देखने को मिला है. आखिर NFHS-6 रिपोर्ट में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं, जानेंगे सेहत की खबर के पहले सेगमेंट में. क्या आप भी दही में सिर्फ चीनी या नमक मिलाकर खाते हैं? अगर हां, तो आज की जानकारी आपके लिए बेहद काम की है. एक्सपर्ट्स ने दही के साथ खाने वाली 5 ऐसी चीजों के बारे में बताया है, जो पाचन बेहतर करने, पेट को स्वस्थ रखने और वजन नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं. जानेंगे इसके बारे में दूसरे सेगमेंट में, और क्या आप भी रविवार को देर तक सोते हैं, लेकिन सोमवार सुबह उठते ही थकान महसूस करते हैं? इसकी वजह सिर्फ नींद की कमी नहीं, बल्कि Social Jet Lag भी हो सकता है. आखिर क्या है Social Jet Lag और यह आपकी सेहत को कैसे प्रभावित करता है, जानेंगे तीसरे और आखिरी सेगमेंट में.
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पहला सेगमेंट में जानेंगे NFHS-6 रिपोर्ट में क्या सामने आया?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 यानी NFHS-6 की रिपोर्ट जारी कर दी है. इस रिपोर्ट में भारत की स्वास्थ्य सेवाओं, बच्चों के पोषण और महिलाओं की स्थिति में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं. रिपोर्ट के अनुसार अब देश में 90.6 प्रतिशत प्रसव अस्पतालों में हो रहे हैं. गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार हुआ है. करीब 95.9 प्रतिशत महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान एंटीनेटल केयर (ANC) मिली. पहली तिमाही में जांच कराने वाली महिलाओं की संख्या भी बढ़ी है. इसके अलावा चार या उससे ज्यादा बार ANC जांच कराने वाली महिलाओं की संख्या में भी इजाफा हुआ है.
बच्चों के टीकाकरण में सुधार
रिपोर्ट के मुताबिक 12 से 23 महीने के बच्चों का पूर्ण टीकाकरण 83.8 प्रतिशत से बढ़कर 87.1 प्रतिशत हो गया है. ज्यादातर बच्चों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर वैक्सीन लगी है. रोटावायरस वैक्सीन कवरेज में भी अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है. पांच साल से कम उम्र के बच्चों में स्टंटिंग यानी उम्र के हिसाब से कम लंबाई की समस्या पहले की तुलना में कम हुई है. गंभीर रूप से कमजोर बच्चों की संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई है.
हेल्थ इंश्योरेंस का दायरा बढ़ा
अब पहले से ज्यादा परिवार स्वास्थ्य बीमा योजनाओं से जुड़ रहे हैं. हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज 41 प्रतिशत से बढ़कर 60.2 प्रतिशत हो गया है. इसमें आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं की बड़ी भूमिका मानी जा रही है. रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अब अधिक महिलाएं इंटरनेट का उपयोग कर रही हैं. बैंक अकाउंट और मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या भी बढ़ी है.हालांकि रिपोर्ट यह भी बताती है कि मोटापा और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां अभी भी देश के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं.
दूसरा सेगमेंट में जानेंगे दही के साथ क्या खाना सबसे फायदेमंद है?
दही भारतीय भोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह प्रोबायोटिक्स से भरपूर होता है, जो पेट और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है. लेकिन अगर इसे सही चीजों के साथ खाया जाए, तो इसके फायदे और भी बढ़ सकते हैं. दही में भुना जीरा और थोड़ा सा आयोडीन युक्त नमक मिलाकर खाने से पाचन बेहतर हो सकता है. यह गैस, एसिडिटी और पेट फूलने जैसी समस्याओं में राहत देने में मदद कर सकता है.
गर्मियों में दही और खीरे का कॉम्बिनेशन शरीर को ठंडक और हाइड्रेशन देने का अच्छा तरीका माना जाता है. यह पाचन को बेहतर बनाने और कब्ज की समस्या कम करने में मदद कर सकता है. दही और अनार का मिश्रण पेट की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है. अनार में मौजूद फाइबर और दही के प्रोबायोटिक्स मिलकर आंतों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. अगर आपको मीठा पसंद है, तो दही में शहद मिलाकर खा सकते हैं. यह शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ पेट के लिए भी फायदेमंद माना जाता है.
तीसरा सेगमेंट में जानेंगे कि क्या है Social Jet Lag?
क्या आप पूरे हफ्ते जल्दी उठते हैं, लेकिन रविवार को देर तक सोते हैं? अगर ऐसा है, तो आपकी बॉडी क्लॉक प्रभावित हो सकती है. जब आप सप्ताह के दिनों में एक समय पर सोते और उठते हैं, लेकिन वीकेंड पर देर रात तक जागते हैं और देर से उठते हैं, तो शरीर की प्राकृतिक सर्केडियन रिदम यानी बॉडी क्लॉक गड़बड़ा सकती है. इसी स्थिति को Social Jet Lag कहा जाता है. यह बिल्कुल वैसा ही महसूस हो सकता है जैसा किसी दूसरे टाइम ज़ोन में यात्रा करने के बाद होने वाला Jet Lag.
इससे क्या नुकसान हो सकते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार Social Jet Lag की वजह से सोमवार को थकान और सुस्ती महसूस हो सकती है. काम में फोकस और प्रोडक्टिविटी कम हो सकती है. मूड खराब रह सकता है. दिनभर नींद और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है. कुछ रिसर्च में इसे हृदय रोग, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और खराब लाइफस्टाइल से भी जोड़ा गया है. अगर पूरे हफ्ते आपकी नींद पूरी नहीं हुई है, तो वीकेंड पर थोड़ा अतिरिक्त आराम करना गलत नहीं है. लेकिन हर सप्ताह 2-3 घंटे देर तक सोना और फिर सोमवार को अचानक जल्दी उठना बॉडी क्लॉक को प्रभावित कर सकता है.
इससे बचने के आसान उपाय
रोज लगभग एक ही समय पर सोएं और उठें.
वीकेंड पर भी उठने का समय ज्यादा न बदलें.
रात में स्क्रीन टाइम कम करें.
सुबह कुछ समय धूप में बिताएं.
देर रात कैफीन और भारी भोजन से बचें.
विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी सेहत और अच्छी नींद के लिए नियमित Sleep Schedule बनाए रखना बेहद जरूरी है, तो अगली बार रविवार को देर तक सोने से पहले यह जरूर सोचिए कि कहीं आप अपनी बॉडी क्लॉक को भ्रमित तो नहीं कर रहे.
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