Short Term Memory Loss: लोगों के सामने रील्स और शॉर्ट वीडियो फॉर्मेट को इसलिए लाया गया था ताकि कम समय में लोग ज्यादा सूचना पाने का ऑप्शन पा सके. लेकिन इसी शॉर्ट वीडियो कॉन्सेप्ट और फॉर्मेट के कारण लोगों की आदत बिगड़ती जा रही है. लोग घंटों स्क्रॉलिंग करते रहते हैं. क्योंकि इससे टाइम पास हो जाता है.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी टाइम पास के चक्कर में लोगों की मेमोरी लॉस हो रही है. लोग धीरे-धीरे शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस का शिकार हो रहे हैं. आज इसी पर बात करने वाले है. आखिर ऐसा क्यों हो रहा है. किस कारण से ऐसा हो रहा है. इसी पर डिटेल्ड में बात करेंगे.
याद रखने में ये तीन स्टेज अहम
- -एन्कोडिंग
- -कन्सालिडेशन
- -रिट्रीवल
हमारा माइंड तीन स्टेज से गुजरते हुए मेमोरी को याद रखता है. इसमें पहला होता है एन्कोडिंग, कन्सालिडेशन और रिट्रीवल जो प्रमुख है. हमारा माइंड इन्हीं तीनों के जरिए कोई जानकारी कंज्यूम करता है उसे याद रखता है. जब कभी जरूरत पढ़े तो उसे वापस लाने का काम कर पाता है. इस तरह से माइंड मेमोरी को याद रखने में सफल हो पाता है. लेकिन इसमें सबसे जरूरी है हमारी नींद.
रील कैसे बना रही मेमोरी लॉस का कारण?
अब बात आई कि आखिर मेमोरी लॉस का कारण घंटो रील स्क्रॉल करना, शॉर्ट फॉर्मेट कैसे हो गया? तो इसका जवाब है कि जब हम घंटो भर रील्स या फिर शॉर्ट वीडियो स्क्रॉल करते रहते हैं तो ये तीन प्रोसेस बिगड़ने लगते हैं. दिमाग एन्कोड नहीं कर पाता क्योंंकि एक ही दम से आप इतना सारा कॉन्टेंट कंज्यूम कर लेते हैं. जिसके कारण जानकारी ओवरलोड हो जाती है.
इसका नतीजा ये होता है कि 15 से 30 सेकंड की रील्स देखने के बाद हमारा माइंड उसे प्रोसेस नहीं कर पाता तो हमारा फोकस भटकता है. फोकस करने में परेशानी होती है, जो शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस का कारण बन जाता है. क्योंकि जब हम हर 10 से 15 सेकंड में रील चेंज करते हैं, तो डोपामाइन जो हमें खुशी का एहसास करवाने वाला हार्मोन होता है वो थक जाता है. क्योंकि वो बार-बार रिलीज होता है. हर बार नया चेहरा, नई जानकारी मिलती जाती है. इसलिए ऐसी समस्या पैदा हो सकती है.
कैसे पा सकते हैं छुटकारा?
ऐसी आदत से घबराने की जरूरत नहीं छुटकारा पाने की जरूरत है. छुटकारा पाने के लिए आपको 20-20-20 का रूप अपनाना पड़ेगा. 20-20-20 रूल यानी हर 20 मिनट की स्क्रॉलिंग उसके बाद 20 सेकंड का ब्रेक लेना इस तरह आप इस आदत से छुटकारा पा सकते हैं. इससे आपकी स्लीप क्वालिटी भी बेहतर होगी तभी सोने से पहले अक्सर स्क्रीन को दूर करने की सलाह दी जाती है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं.)

