Smart Toys for Baby: बढ़ते आधुनिक दौर में बच्चों के खेलने की दुनिया में भी तेजी से बदलाव आया है. अब उनके खेलने की दुनिया किसी गली-मोहल्ले में नहीं बल्कि घर के किसी कौने में सिमट गई है. उनके हाथों में गेंद, गुड़िया या फिर लड्डू जैसी चीज़ें नहीं रह गई बल्कि अब उनके हाथों में स्मार्ट गैजेट आ गई है.
वहीं अब तो दुनिया ने इतनी तेजी से करवट बदली है कि स्मार्ट गैजेट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीक भी आ गई है. लेकिन सवाल ये है कि क्या ये स्मार्ट टॉयज बच्चों की सोशल और इमोशनल स्किल्स को प्रभावित कर रहे हैं? अगर कर भी रहें हैं तो कितना प्रभावित कर रहे हैं? उनकी स्किल्स किस रूप में आ रही है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
एक्सपर्ट कहते हैं कि बच्चों का मानसिक और सामाजिक डेवलपमेंट बातचीत पर आधारित होता है. जब वह खेल के दौरान एक दूसरे से बात करते हैं तो उनका मानसिक विकास और सामाजिक विकास होता है. लेकिन इन स्मार्ट और AI बेस्ड टॉयज ने उनकी सामाजिक और मानसिक विकास को काफी हद तक प्रभावित किया है.
बन रही सामाजिक दूरी
दरअसल स्मार्ट गैजेट की मदद से बच्चे भले बातचीत कर लेते हैं. लेकिन ऐसे में उनका असली सामाजिक दुनिया से दूरी बन जाती है. वह व्यक्ति के हाव-भाव और मानसिक स्तर को नहीं समझ सकते जितना असली व्यक्ति से बातचीत के दौरान समझा जा सकता है.
पैरेंट्स ऐसे रखें ध्यान
हम ये कह सकते हैं कि बदलते दौर के साथ अगर बच्चों को इन आने वाली तकनीक से अवगत नहीं कराया तो वह नयी चीज नहीं सीख पाएंगे. लेकिन इन्हें देने का एक सीमित समय रखें. सीमित समय में बच्चों को अपनी निगरानी में स्मार्ट टॉयज के बारे में बताएं. ऐसे में बच्चा उनकी नकारात्मकता से भी बचा रहेगा. और मेंटली सही विकास करेंगा. इसके अलावा बच्चा का आउटडोर और ग्रुप एक्टिविटी करने को दें. ऐसे टॉयज सिलेक्ट करें जो उनकी क्रिएटिविटी और इंटरैक्शन को बढ़ावा दें. बच्चे के व्यवहार और सोशल एक्टिविटी पर ध्यान रखें. अगर आपको बच्चे का सही दिशा में सामाजिक और मानसिक विकास करना है तो इन बातों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है.
स्मार्ट टॉयज के फायदे-नुकसान
स्मार्ट गैजेट के कुछ फायदे और नुकसान दोनों ही हैं. जो आपको जानना बेहद जरूरी है. स्मार्ट टॉयज की मदद से आप अपने बच्चों की लैंग्वेज और कम्युनिकेशन स्किल्स में सुधार करवा सकते हैं. कहा जाता है कि शिक्षा देने का सबसे सरल तरीका है, खेल-खेल में देना. ऐसे में बच्चा जल्दी और आसान तरीके से सीख पाता है. स्मार्ट गैजेट की मदद से आप अपने बच्चों को अक्षर, नंबर और बेसिक नॉलेज का ज्ञान दे सकते हैं. वहीं कुछ माता-पिता अपने बच्चों के शर्मीलेपन से परेशान रहते हैं जो कि आप इन गैजेट की मदद से उनका शर्मीला पन और कॉन्फिडेंस बढ़ा सकते हैं.
वहीं बात करें अगर स्मार्ट गैजेट के नुकसान की तो इनके नुकसान भी बहुत हैं. जैसे, सामाजिक दुनिया से दूरी हो जाना. क्योंकि स्मार्ट गैजेट एक लत की तरह होती है जिनसे दूरी बनवाना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में बच्चे असली सामाजिक दुनिया से दूर हो जाते है. वे असली लोगों से बातचीत कम करने लगता है. इसके अलाव ऐसे बच्चों में इमोशनली समझ की कमी भी देखी जाती है. वे असली भावनाओं को महसूस या समझने में परेशानी महसूस करते हैं. वहीं ये गैजेट अकेले रहने की आदत को बढ़ावा देते हैं. ऐसे में उनमें ग्रुप प्ले और टीम इंटरैक्शन कम होने लगता है.
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FAQs
सवाल: क्या स्मार्ट टॉयज बच्चों के सोशल स्किल्स को प्रभावित कर रहे हैं?
जवाब: हां, स्मार्ट टॉयज बच्चों के सोशल स्किल्स को प्रभावित कर सकते हैं. कुछ टॉयज बच्चों को अकेले खेलने की आदत बढ़ाते हैं, जिससे वे असली लोगों से बातचीत कम कर सकते हैं. हालांकि, कुछ इंटरएक्टिव टॉयज सीखने और कम्युनिकेशन स्किल्स सुधारने में भी मदद करते हैं.
सवाल:क्या स्मार्ट टॉयज बच्चों के लिए फायदेमंद भी हो सकते हैं?
जवाब: जी हाँ, अगर सही तरीके से इस्तेमाल किए जाएँ तो स्मार्ट टॉयज बच्चों के लिए फायदेमंद हैं. ये उनकी क्रिएटिविटी, भाषा सीखने की क्षमता और समस्या सुलझाने की स्किल को बढ़ा सकते.
सवाल:माता-पिता को स्मार्ट टॉयज के इस्तेमाल में क्या ध्यान रखना चाहिए?
जवाब: माता-पिता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चे ज्यादा समय सिर्फ स्मार्ट टॉयज के साथ न बिताएँ. उन्हें आउटडोर खेल, दोस्तों के साथ बातचीत और फैमिली इंटरैक्शन के लिए भी समय देना चाहिए, ताकि उनका सोशल डेवलपमेंट संतुलित रहे.
(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

