Brain Health: आज के समय में मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं. ऑफिस का काम हो, पढ़ाई हो या फिर मनोरंजन, ज्यादातर समय हमारी उंगलियां और कलाई किसी न किसी स्क्रीन से जुड़ी रहती हैं. हालांकि डिजिटल डिवाइस ने हमारी जिंदगी को आसान बनाया है, लेकिन इनके लगातार इस्तेमाल का असर हमारी सेहत पर भी पड़ने लगा है. खासकर लंबे समय तक टाइपिंग करने और माउस इस्तेमाल करने से हाथों, कलाई और उंगलियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है.
हिन्दुस्तान टाइम्स के साथ बात करते हुए हैदराबाद के यशोदा हॉस्पिटल्स में सीनियर कंसल्टेंट और ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अभिषेक बारली के अनुसार, बार-बार एक जैसी गतिविधियां करने से शरीर में रिपिटिटिव स्ट्रेन इंजरी (RSI) विकसित हो सकती है. यह ऐसी समस्या है जो धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआत में इसके लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग अक्सर इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं.
लंबे समय तक टाइपिंग से क्या होता है?
जब हम घंटों तक कीबोर्ड पर टाइप करते हैं या माउस का इस्तेमाल करते हैं, तो हाथों की मांसपेशियां, टेंडन और नसें लगातार काम करती रहती हैं. पर्याप्त आराम न मिलने पर इन हिस्सों में सूजन और तनाव बढ़ सकता है. समय के साथ यह परेशानी कलाई, उंगलियों और हाथों में दर्द का कारण बन सकती है.
विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल यह समस्या केवल ऑफिस कर्मचारियों तक सीमित नहीं है. ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले छात्र, लंबे समय तक स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले युवा और वीडियो गेम खेलने वाले किशोर भी इसकी चपेट में आ रहे हैं.
इन लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
शुरुआत में हाथों में हल्की थकान या दर्द महसूस हो सकता है, लेकिन यदि यह समस्या लगातार बनी रहती है तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए. उंगलियों में झुनझुनी, हाथों का सुन्न पड़ना, अंगूठे में दर्द, कलाई में असहजता, पकड़ कमजोर होना और हाथों में जलन जैसे लक्षण इस बात का संकेत हो सकते हैं कि नसों और टेंडन पर दबाव बढ़ रहा है.
कुछ लोगों में उंगलियों के लॉक होने या मोड़ने पर क्लिक जैसी आवाज आने की समस्या भी देखी जाती है, जिसे ट्रिगर फिंगर कहा जाता है. यदि समय रहते उपचार न किया जाए तो यह समस्या दैनिक कार्यों को भी प्रभावित कर सकती है.
क्या हो सकता है स्थायी नुकसान?
डॉक्टरों के अनुसार, अधिकांश मामलों में यदि शुरुआती चरण में पहचान हो जाए तो समस्या का सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है. लेकिन लंबे समय तक लक्षणों को नजरअंदाज करने से नसों पर दबाव बढ़ सकता है और कार्पल टनल सिंड्रोम जैसी स्थितियां विकसित हो सकती हैं. गंभीर मामलों में हाथों की पकड़ कमजोर हो सकती है और अंगूठे के आसपास की मांसपेशियां भी प्रभावित हो सकती हैं.
हाथों को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि काम करते समय सही एर्गोनॉमिक्स का पालन करना बेहद जरूरी है. कीबोर्ड और माउस को ऐसी ऊंचाई पर रखें जहां कलाई पर अनावश्यक दबाव न पड़े. लगातार काम करने के बजाय हर 45 से 60 मिनट में कुछ मिनट का ब्रेक लें और हाथों तथा कलाई की हल्की स्ट्रेचिंग करें। इसके अलावा बैठने का पोस्चर सही रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि खराब पोस्चर शरीर के कई हिस्सों पर अतिरिक्त तनाव पैदा कर सकता है.
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