Global Fatty Liver Day 2026: देशभर में फैटी लिवर की समस्या काफी आम होती जा रही है. हालांकि इस समस्या का पता भी तब चलता है जब किसी अन्य बीमारी की जांच करवाने जाते हैं. डॉक्टर इसी कारण से फैटी लिवर को साइलेंट डिजीज भी कहते हैं. वहीं ग्लोबल फैटी लिवर डे के रूप में मनाया जा रहा है. ऐसे में इस दिन पर ये समझना जरूरी हो जाता है कि आखिर वो कौन सी बीमारी है जो चुपचाप बढ़ जाती है और इस समस्या का कारण बनती है. साथ ही कोई संकेत भी नहीं देती.
सबसे पहले ये जान लेते हैं कि आखिर फैटी लिवर होता क्या है. लिवर हमारे कई तरह से मदद करते है जैसे खाने को एनर्जी में बदलने, विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में और शरीर के कई जरूरी कार्यों को संभालने का काम करता है. अब फैटी लिवर की समस्या तब होती जब लिवर के सेल्स में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा होने लगती है. इस कंडिशन को फैटी लिवर कहा जाता है. वहीं समस्या भी तब शुरू होती है जब शरीर में जमा चर्बी धीरे-धीरे लिवर के नॉर्मल कामकाज प्रभावित करने लगे.
ज्यादातर लक्षण नहीं होते महसूस
फैटी लिवर आज के समय में तेजी से बढ़ने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है. चिंता की बात यह है कि इस बीमारी के शुरुआती चरण में ज्यादातर लोगों को कोई खास लक्षण महसूस नहीं होते. यही कारण है कि कई लोगों को लंबे समय तक यह पता ही नहीं चल पाता कि उनके लिवर में चर्बी जमा हो रही है.
एक्सपर्ट के अनुसार, फैटी लिवर की शुरुआत में व्यक्ति पूरी तरह सामान्य महसूस कर सकता है. वह रोजाना ऑफिस जा सकता है, व्यायाम कर सकता है और अपने सामान्य कामकाज करता रह सकता है. अक्सर इस बीमारी का पता तब चलता है जब किसी अन्य कारण से करवाए गए ब्लड टेस्ट, हेल्थ चेकअप या अल्ट्रासाउंड में इसकी जानकारी सामने आती है.
क्या शरीर कोई संकेत देता है?
हालांकि ज्यादातर मामलों में शुरुआती लक्षण साफ दिखाई नहीं देते, लेकिन कुछ लोगों में शरीर छोटे-छोटे संकेत देना शुरू कर सकता है. इनमें लगातार थकान महसूस होना, शरीर में ऊर्जा की कमी, कमजोरी लगना, काम में मन न लगना और पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में हल्का भारीपन महसूस होना शामिल है.
समस्या यह है कि ये लक्षण बहुत सामान्य होते हैं. लोग अक्सर इन्हें तनाव, पर्याप्त नींद न लेने या व्यस्त जीवनशैली का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं.
क्या सिर्फ शराब पीने वालों को होता है फैटी लिवर?
बहुत से लोगों का मानना है कि फैटी लिवर केवल शराब पीने वालों को होता है, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है. आज बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी फैटी लिवर की समस्या का सामना कर रहे हैं जो शराब का सेवन नहीं करते. खराब खानपान, बढ़ता वजन, शारीरिक गतिविधियों की कमी और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी फैटी लिवर का कारण बन सकती हैं. इसलिए शराब न पीने वाले लोगों को भी इस बीमारी को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है.
किन लोगों में ज्यादा होता है खतरा?
फैटी लिवर का जोखिम उन लोगों में अधिक देखा जाता है जिनका वजन ज्यादा होता है या जिनके पेट के आसपास अतिरिक्त चर्बी जमा होती है. इसके अलावा टाइप-2 डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, लंबे समय तक बैठे रहकर काम करना और शारीरिक गतिविधियों की कमी भी इसके प्रमुख जोखिम कारक हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली सीधे तौर पर लिवर की सेहत को प्रभावित करती है. इसलिए स्वस्थ खानपान और नियमित व्यायाम बेहद जरूरी है.
क्या फैटी लिवर गंभीर बीमारी बन सकता है?
अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए, तो कुछ मामलों में फैटी लिवर आगे चलकर लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस और सिरोसिस जैसी गंभीर स्थितियों का कारण बन सकता है. गंभीर मामलों में यह लिवर फेलियर का खतरा भी बढ़ा सकता है.
हालांकि राहत की बात यह है कि शुरुआती चरण में फैटी लिवर की पहचान हो जाए तो सही डाइट, नियमित एक्सरसाइज और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

