Smartphone Brain: पहले के समय में अक्सर लोग न्यूरोलॉजिस्ट के पास स्ट्रोक, पार्किंसंस, मिर्गी या फिर डिमेंशिया जैसी बमारी होती थी तब जाते थे. इसी से इसे जोड़ते देखा जाता था. हालांकि बढ़ती हुई उम्र के साथ इस परेशानी को देखा जाता था. खासतौर पर याददाश्त कमजोर होने से चलने फिरने की समस्या सबसे आम शिकायतों में से एक हुआ करती थी. लेकिन आज समय बदल गया है.
न्यूरोलॉजिस्ट के पा अब युवा और टीनएजर्स पहुंच रहे हैं. इतना ही नहीं वो न्यूरोलॉजिस्ट के पास इस समस्या के साथ नहीं बल्कि सिरदर्द, ध्यान न लगना, नींद में परेशानी होना, चक्कर आने की समस्या, ब्रेन-फॉग और चीजों को याद रखने में मुश्किल होने की समस्या की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं.
क्या है इन सबका कारण?
इन सभी के कारणों की अगर बात की जाए तो लोग मोबाइल फोन, स्मार्टफोन्स को जिम्मेदार ठहराते हैं. डॉक्टर्स कहते हैं कि न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का कारण स्मार्टफोन नहीं होता है. लेकिन अधिक स्क्रीन टाइम जिसे अब लोग स्मार्टफोन ब्रेन के नाम से जानते हैं. ये सभी लक्षण स्मार्टफोन ब्रेन का एक पैटर्न बनते जा रहे हैं, जो अनहेल्दी डिजिटल आदतों से जुड़ा है.
दरअसल सभी जानते हैं कि मोबाइल फोन ने हमारी लाइफ में कैसी स्पेस ली है. काम करने से लेकर पढ़ाई में यहां तक की बातचीत का जरिया भी स्मार्टफोन ही है. लेकिन लोग इसका इस्तेमाल लीमिट में न करके बेहिसाब इस्तेमाल कर रहे जो सोने के तरीके, मूड, सोचने-समझने में परेशानी पैदा कर सकता है.
डिजिटल थकावन बनती जा रही चिंता
अब एक्पर्ट्स की सबसे बड़ी चिंता बनती जा रही है यही डिजिटल थकान. यानी लगातार नोटिफिकेशन आते रहना, एंडलेस स्क्रॉलिंग, एक ऐप से दूसरे पर डोल जाना ये लगातार स्टिम्युलेशन की कंडिशन पैदा करता है. एक्सपर्ट्स इसपर कहते हैं कि इससे हमारे दिमाग पर अफेक्ट पड़ता है. लंबे समय तक एक चीज़ पर फ़ोकस करना मुश्किल हो जाता है, जिससे पढ़ना, काम करना या सीखना भी और मुश्किल हो जाता है. एक्पर्ट्स बताते हैं कि लोग उनके पास ये शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं कि वो बार-बार फोन चेक किए बगैर किताबें नहीं पढ़ पाते हैं. अपनी मीटिंग में ध्यान नहीं लगा पाते हैं. पढ़ाई में फोकस नहीं रहता है.
क्या है बचने के उपाय?
इनसे बचने के उपाय की अगर बात करें तो देर रात तक स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने से बचें, रात को आंखों पर नीली रोशनी पड़ती है जो मेलाटोनिन बनने के प्रोसेस को कम कर देती है. मेलाटोनिन एक हार्मोन होता है जो हमारे सोने और जागने के साइकल को चलाता है. डॉक्टर्स कहते हैं कि इससे नींद की क्वालिटी खराब होती है और नींद की खराब क्वालिटी कॉन्संट्रेशन यहां तक की याददाश्त पर असर डालती है. इससे एंग्जायटी, डिप्रेशन यहां तक की सिरदर्द की समस्या हो सकती है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

