Tannaz Irani Hip Replacement: तनाज ईरानी मशहूर एक्ट्रेस ने हाल ही में एक गेम शो तुम हो ना के दौरान बड़ा खुलासा किया कि उनकी हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी हुई थी. उन्होंने बताया कि इस सर्जरी में कूल्हा बदलवाने का ऑपरेशन करवाना पड़ा. इसके बाद से ही लोग इंटरनेट पर उनके नाम को खोज रहे हैं.
इस बड़े खुलासे के बाद लोग इंटरनेट पर इस सर्जरी के बारे में सर्च कर रहे हैं. लोग ये जानना चाहते हैं कि आखिर इसके फायदे और नुकसान क्या हैं. आइए इसके बारे में डिटेल में जानते हैं कि आखिर ये हिप सर्जरी रिप्लेसमेंट कैसे होती है और इससे जुड़े क्या रिस्क हो सकते हैं.
हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी क्या होता है?
दरअसल जब बढ़ती उम्र में किसी चोट या फिर गंभीर गठिया की समस्या के कारण हिप घिस जाता है. खराब हो जाता है, तो इंसान को उठना-बैठना मुश्किल हो जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारा हिप एक बॉल और सॉकेट की तरह होता है. जो हमारे चलने, बैठने हमें झुकने में हमारी मदद करता है. हिप रिप्लेसमेंट की सर्जरी में डॉक्टर खराब कूल्हे के ज्वाइंट को हटा देते हैं. उसे हटाकर उसकी रिप्लेसमेंट में मेटल, प्लास्टिक या फिर सिरेमिक से बना हुए आर्टिफिशियल ज्वाइंट लगाया जाता है. जिसे हिप रिप्लेसमेंट कहा जाता है. यही होती है हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी.
कब करवानी पड़ सकती है ये सर्जरी?
अब जान लेते हैं कि कब इस सर्जरी की जरूरत पड़ती है? क्या हर किसी को इसकी जरूरत होती है? हर किसी को इसकी जरूरत पड़े तो इसका जवाब है कि नहीं. हर किसी को नहीं होती इसकी जरूरत. अक्सर डॉक्टर इस सर्जरी को करवाने की सलाह तभी ही देते हैं जब दवा, लाठी, फिजियोथेरेपी, वॉकर का इस्तेमाल करने के बाद भी दर्द ठीक नहीं हो रहा.
दर्द एकदम मुश्किल हो जाए. सीढ़ियां चढ़ने में, कुर्सी से उठने में परेशानी महसूस हो तो इस तरह की सर्जरी की सलाह दी जाती है. क्या इसके कोई रिस्क भी होता है ये अक्सर लोगों का सवाल रहता है, तो इसका जवाब है कि वैसे ये सर्जरी को कामियाब सर्जरी माना जाता है. लेकिन कुछेक इसके रिस्क हो सकते हैं. जिसकी भी जानकारी होना जरूरी होता है.
सर्जरी के बाद होती ये परेशानियांः
- पैरों में खून के क्लॉट: कई केस में ऐसा होता है कि सर्जरी के बाद पैरों की नसों में खून के क्लॉट बन जाए. इसका होने खतरा अधिक रहता है. उसमें भी अगर क्लॉट फेफड़ों तक पहुंच जाए तो ये स्थिती जानलेवा हो सकती है. यही वजह है कि डॉक्टर्स सर्जरी के बाद खून को पतलाक करने की दवा देते हैं.
- इंफेक्शन का खतरा: वहीं कई बार जहां डॉक्टरों ने कट लगाया होता है उस नकली जोड़ के आसपास इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है. अब ऐसे अगर स्थिती हो जाए तो नकली ज्वाइंट को निकालना पड़ सकता है. यहां तक की सर्जरी भी दोबारा करवानी पड़ सकती है.
- खिसक जाते हैं जोड़: एक रिस्क ये भी है कि सर्जरी के कुछ हफ्तों बाद खास ख्याल रखना होता है क्योंकि इन कुछ हफ्तों में मसल्स को मजबूती दी जाती है. जब तक मसल्स मजबूत नहीं होती तब तक ये आर्टिफिशियल बॉल सॉकेट से बाहर निकल सकती है. इसका खतरा रहता है. डॉक्टर्स ऐसे में पैरों को क्रॉस पॉजिशन में न बैठने की सलाह देते हैं.
- छोटा-बड़ा हो सकता है पांव: अब कई केस में ऐसा देखा जा सकता है कि सर्जरी के बाद मरीजों को ऐसा महसूस हो कि एक पैर दूसरे पैर से छोटा या फिर बड़ा हो गया है. इसे भी ठीक करने की कोशिश की जाती है. डॉक्टर्स इसका खास ख्याल रखते हैं. ऐसा होने के पीछे का कारण है मसल्स में खिंचाव. इस कारण ऐसा होने की संभावना होती है.
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