What is time blindness: आपकी लाइप में कुछ ऐसे होंगे जो काफी देरी से ऑफिस पहुंचते हैं. इतना ही नहीं किसी भी जगह पर पहुंचने में वो काफी लेट पहुंच जाते हैं. कुछ लोगों की ऐसी भी आदत होती है कि वो बातों में ही इतना समय बिता देते हैं, कि समय नहीं पता चलता. कुछ लोग देर रात तक सीरियल्स देखते हैं. इस तरह समय बिता देते हैं.
जो लोग इस तरह के का रूटीन या फिर ऐसे लाइफस्टाइल को फॉलो करते हैं उन व्यक्तियों को आप जानते हैं कि क्या कहते हैं? इसे टाइम ब्लाइंडनेस (Time Blindness) कहा जाता है. अगर आप कभी कबार लेट होते हैं, या यहां बताई गई कुछ आदत आपकी है तो ये कभी कबार होना दिक्कत नहीं है. लेकिन ये स्थिती आगे चलकर गंभीर हो सकती है. कैसे आइए समझते हैं.
ये टाइम ब्लाइंडनेस क्या होता है?
ये शब्द नया-नया सा लगता है न? अगर आपने पहली बार इसे सुना तो घबराइए नहीं. हम आपको समझाने वाले हैं कि आखिर टाइम ब्लाइंडनेस होता क्या है What is time blindness. जब आप ये नहीं पहचान पाते कि आखिर कितना समय बीत चुका है. आप ये अंदाजा नहीं लगा पाते. या फिर कई बार ऐसा होता कि कितना समय आपको लगने वाला है. इसे टाइम ब्लाइंडनेस कहा जाता है. क्या ये कोई बीमारी है? अगर आप ऐसा सोच रहे हैं तो इसका जवाब है नहीं. ये कोई बीमारी नहीं है न ही इसका कोई खास लक्षण है. लेकिन कुछ लोग हैं जिनके लिए ये स्थिति काफी गंभीर हो सकती है.
आपको हुआ कभी एक्सपीरिएंस
टाइम ब्लाइंडनेस कभी आपको एक्सपीरिएंस हुआ है? इसका जवाब है हां. इसका अनुभव कभी न कभी आपको भी हुआ होगा. क्योंकि हम सभी कभी कबार अपने काम में इतना मशगूल हो जाते हैं कि समय का पता ही नहीं चल पाता. तो ये आपने भी महसूस किया होगा. वहीं अक्सर ये ADHD पीड़ित लोगों को अंदाजा लगाने में मुश्किल होती है. किसी काम को पूरा होने में कितना समय लगेगा, या वे अक्सर समय का हिसाब खो बैठते हैं.”
ADHD क्या होता है?
अगर आपने ADHD पहली बार सुना है तो बता देते हैं कि ये आखिर होता क्या है. ADHD का मतलब है अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर होता है. जो इस समस्या से जूझ रहे हैं उनके फोकस करने में काफी परेशानी होती है. वहीं एडीएचडी वाले लोगों को खास कामों को करने में या फिर फोकस करने में दिक्कत होती है.
बदलता रहता है हमारा माइंड
आप जानते हैं कि हमारा दिमाग दो तरह से काम करता है. यानी दो तरह के ध्यान के बीच हमारा माइंड बदलता रहता है. इसे ऑटोमैटिक अटेंशन और डिरेक्टिड अटेंशन कहा जाता है. इसमें हमारा माइंड दिमाग के नेटवर्क के अनुसार रिएक्ट करता है. इसे डिफॉल्ट मोड कहा जाता है. यह आपकी ‘खुशी की जगह’ (happy place) होती है. आप इसका इस्तेमाल तब करते हैं जब आप कोई ऐसा काम कर रहे होते हैं जिसमें आपको मज़ा आता है.
डिरेक्टेड अटेंशन की अगर बात की जाए तो ये तब होने लगता है जब हम ऐसे काम करने लगते हैं जिनकी हमें जरूरत ही नहीं. या हम करना ही नहीं चाहते. उदहारण के तौर पर बोरिंग लेक्चर हो गया. क्योंकि आपको ये काम करने में मजा नहीं आता इसलिए आप अटेंटिव नहीं होते. आपका दिमाग आपको भटकाने और उस काम को न करने पर अधिक जोर देता है.
कब होता है टाइम ब्लाइंडनेस
इसी के साथ टाइम ब्लाइंडनेस का एक्सपीरिएंस आपको तब होता है जब आपका ध्यान ऑटोमैटिक मोड में चल रहा हो. या फिर आप किसी काम में पूरी तरह मग्न हो जाएं. उसे करने में एक्साइटेज रहे. यानी वो काम करने में आपको मजा आता है और आपको समय का पता नहीं चल पाता.
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