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पैरों में नसों का दर्द? कहीं ये Varicose Veins तो नहीं…जानें लक्षण

What Is Varicose Veiens: क्या आपके घर में बढ़े बुजूर्ग पैरों में नसों के दर्द के चलते चिल्ला उठते हैं. क्या ये दर्द उनके लिए अनकंट्रोल्ड सा साबित हो जाता है?

What Is Varicose Veiens: क्या आपके घर में बढ़े बुजूर्ग पैरों में नसों के दर्द के चलते चिल्ला उठते हैं. क्या ये दर्द उनके लिए अनकंट्रोल्ड सा साबित हो जाता है? अगर ऐसा है तो आपको ध्यान देने की आवश्यकता है. क्योंकि संभव है कि ये वेरिकोज़ वेन्स का संकेत न हो.अगर ऐसा है तो जल्द से जल्द डॉ. से सलाह लेनी की आवश्यकता है. लेकिन उससे पहले ये जान लेते हैं कि आखिर वेरिकोज़ वेन्स होता क्या है. इसका शिकार हुए लोगों को किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है. क्या इसका कोई इलाज नहीं? इन सभी सवालों का जवाब आज हम इस वीडियो में समझाने वाले हैं. चलिए शुरू करते हैं..

भारत में कुल 20 से 30 प्रतिशत आबादी में शामिल लोग इस समस्य समस्या से जूझ रहे हैं. हालांकि ये रिपोर्ट साल 2024 के नवंबर महीने में जारी की गई है.. वहीं द हिंदू ने भी इस समस्या पर एक रिपोर्ट जारी की जिसमें बताया गया कि 30 प्रतिशत आबादी वेरिकोज की समसया से प्रभावित हैं.

हमारे शरीर में नसों का क्या है काम?

अगर पैरों में नीली और उभरी हुई नसें दिख रही हैं, तो ये सामान्य है. लेकिन तब तक जब तक ये आपस में फैली न हो, यानी आपस में एक दूसरे से किसी मकड़जाल की तरह जुड़ी न हो. अब समझते हैं कि नसों का शरीर में क्या काम है. पहला जो सभी को मालूम है कि नसों के जरिए ब्लड हमारे शरीर में सर्कुलेट होता है. साथ ही ऑक्सीजन और न्यूट्रिशंस को भी हमारी बॉडी में भेजने का काम करती हैं. लेकिन अगर ये खराब हो तो काफी मुश्किलों का सामना आपको करना पड़ सकता है.

अगर ये सिस्टम बिगड़े तो आपको कई कॉम्प्लिकेशंस का सामना करना पड़ सकता है. इन्हीं में से एक वेरिकोज़ वेन्स भी है..जिसके बारे में हम आज आपसे बात करने वाले हैं. बता दें कि जो व्यक्ति वेरिकोज़ से परेशान है उन्हें नसों में सूजन की शिकायत रहती है. Fit Rahe India की टीम ने Varicose Veins पर डॉ. शिव चौधरी से खास बातचीत की.. उन्होंने समझाया कि आप इसकी पहचान कैसे कर सकते हैं.

यहां देखें पूरा Explainer VIDEO

डॉक्टर से जांच करवाना कब जरूरी?

जो व्यक्ति नसों में सूजन की दर्द से परेशान हैं आप उनकी नसों को चेक कर सकते हैं, कहीं उनकी नसें नीली, मोटी या फिर मुड़ी हुई न हो. अगर ये सब नहीं है, तो सामान्य दर्द भी हो सकता है. लेकिन दर्द अगर ज्यादा समय तक रहे तो डॉ. से जांच करवाना जरूरी है. कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि दुनिया में 30 से 40 प्रतिशत आबादी वैरिकोज़ की समस्या से परेशान है. यानी हर 5 में से 1 अडल्ट व्यक्ति इसी समस्या से परेशान है.. अब सवाल ये कि आखिर ये समस्या होती क्यों है? और आप इससे बचने के लिए क्या उपाय कर सकते हैं.

नसों में मौजूद वाल्व पहुंचा सकता नुकसान?

पहले इसका कारण जान लेते हैं, पैरों की नसों में वाल्व मौजूद होता है. अगर ये कमजोर होने लगे या फिर इसे नुकसान पहुंचे तो ये पैरों में खराब ब्लड सर्कुलेशन का कारण बन सकता है. इसी कारण पैरों की नसों में दबाव बनता है. वॉल्व हमारे खून को दिल की ओर वापस ले जाने का काम करता है. लेकिन अगर ये ठीक से काम न करें तो ऐसी कंडीशन बन सकती है. नसों के अंदर खून जमा होने लग सकता है, इसी कारण नसें सूज सकती, मुड़ सकती हैं, या फिर नीली या बैंगनी रंग की दिखाई देने लग सकती हैं.

किन लोगों में ज्यादा पाई जाती ये समस्या?

अब ये सवाल आता है कि आखिर ये समस्या किन लोगों में ज्यादा पाई जाती है? तो बता दें जो व्यक्ति ज्यादा देर तक खड़े रहने या फिर बैठे रहने का काम करते हैं. बैठे रहने का काम यानी डेस्क जॉब. अगर आप डेस्क जॉब करते हैं और लगातार 9 घंटे अपनी कुर्सी से उठने का समय नहीं निकाल पा रहे, तो ये समस्या आपको परेशान कर सकती है. हालांकि सिर्फ ज्यादा बैठने से ही नहीं बल्कि ज्यादा देर खड़े रहने से भी ये समस्या आपको परेशान कर सकती है. उदहारण के तौर पर ट्रैफिक पुलिस, सिक्योरिटी गार्ड, दुकानदार.. जिन्हें अपने काम से फुर्सत न मिले और वह लगातार खड़े रहकर काम करते हैं, उन्हें भी ये समस्या परेशान कर सकती है. कहा जा सकता है कि ऐसे लोग ही डेंजर जोन में आ सकते हैं. क्योंकि ज्यादा चल नहीं पाते.

Varicose से पीड़ितों को किन मुश्किलों का करना पड़ता सामना

अब जान लेते हैं कि आखिर जो व्यक्ति इस समस्याओं से पीड़ित हैं, तो उन्हें किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. पीड़ितों को को लगातार पैरों में दर्द, सूजन, खुजली, स्किन का कलर बदलना. इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ सकता है. कई गंभीर मामलों में नसें भी फट सकती हैं. ब्लीडिंग हो सकती है. स्किन में अल्सर के घाव हो सकते हैं. खून के थक्के जिसे DVT कहा जाता है, वो बन सकते है. इससे आपको पल्मोनरी एम्बोलिज्म का खतरा भी हो सकता है. हालांकि कई बार सामान्य दर्द भी काफी परेशान कर सकता है. जैसे मसल्स में खिचांव के कारण भी आप दर्द से परेशान हो सकते हैं.

वैरिकोज में करवा सकते ये ट्रीटमेंट

वहीं जान लेते हैं कि आखिर इस प्रॉब्लम को ठीक करने के लिए कैसे ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ती है, या फिर दवाओं के सेवन से डॉ. पीड़ितों को राहत दिलाने की कोशिश करते हैं, तो बता दें कि इसका भी इलाज है.वेरिकोज का ट्रीटमेंट किया जा सकता है.. लेकिन कैसे? आइए समझते हैं. जो व्यक्ति इस समस्या से परेशान हैं, वो कपिंग, लीच थेरेपी, मिट्टी लेप और धूप थेरेपी कर सकते है. इससे ब्लड फ्लो में सुधार, दर्द और सूजन को कम करने में मदद मिल सकती है.

पीड़ित व्यक्तियों के पास एक ऑप्शन मालिश का भी है. वैरिकोज की समस्या से परेशान लोग एप्पल साइडर विनेगर, जैतून का तेल या फिर बर्फ से सिकाई का तरीका अपना सकते हैं. इससे भी ब्लड के फ्लो में सुधार मिल सकता है. पैरों में होने वाली दर्द या फिर सूजन को कम किया जा सकता है.

आयुर्वेदिक उपाय भी अपना सकते हैं आप

आयुर्वेदिक उपाय की बात करें तो जड़ी-बूटियां जैसे गिलोय, अश्वगंधा, गुग्गुल, गोखरू सब उपाय सूजन कम कर सकते हैं. साथ ही नसों को मजबूत बनाए रखने में काफी सहायक साबित हो सकते हैं. अगर आप इस समस्या का सामना कर रहे हैं, तो आप कुछ काम ऐसे काम को करने से बचें जैसे अगर आपका काम ऐसा है कि जिसमें आपको बैठने का समय नहीं मिल पा रहा तो थोड़ा ही सही लेकिन 30 मिनट चलने की कोशिश कीजिए.. अगर बैठने का काम ज्यादा है तो कुछ देर में उठकर अपनी बॉडी को फुल स्ट्रेच करें सोते समय पैरों के नीचे तकिया लगाकर उन्हें दिल के स्तर से थोड़ा ऊपर रखें.

क्या करें और क्या न करें?

पैरों को क्रोसिंग लेग के पोश्चर यानी आलती-पालती मारकर न बैठें. इससे नसों पर दबाव बनता है और ब्लड सर्कुलेशन में प्रॉब्लम पैदा कर सकती है. डाइट में बदलाव करें ज्यादा नमक खाते हैं, तो बंद कर दीजिए इससे नसों में सूजन आ सकती है और दबाव बढ़ सकता है. वजन अगर ज्यादा है तो वो भी शरीर पर ज्यादा प्रेशर डालता है. इसलिए मोटापे को कंट्रोल कीजिए अगर पेट नहीं साफ हो पा रहा यानी कब्ज की समस्या है तो कम फाइबर वाला खाना न खाएं. अपने कपड़ों के स्टाइल में थोड़े चेंज लाइए जैसे हाई हील्स शूस पहने से बचें, इससे आपकी पिंडलियों की एक्सरसाइज कम होगी और खून का सर्कुलेशन ऊपर की ओर ठीक से नहीं हो पाएगा इसलिए फ्लैट जूते ही पहने.. टाइट कपड़े पहने से बचें क्योंकि ये भी ब्लड फ्लो रोक सकता है.

कब गंभीर रूप ले सकता वैरिकोज

वेरिकोज वेंस गंभीर रूप भी ले सकता है जब खून नसों में जमा रहता है और वो गाढ़ा होकर एक Clot बन जाता है. इसका नतीजा अगर क्लोट नस से निकलकर फेफड़ों तक पहुंच जाए तो ये जान लेवा भी हो सकता है.. जिसे पल्मोमरी एमबोलिजम कहते हैं. किसी भी सलाह को मानने या फिर उसपर अमल करने से पहले आप डॉ. की सलाह जरूर लें. बिना डॉ. की सलाह के जानकारी को अपनाना.. शरीर के लिए काफी नुकसानदेह हो सकता है. डॉ द्वारा सुझावाया हुआ ट्रीटमेंट ही सही रास्ता साबित हो सकता है.आज की इस वीडियो में बस इतना ही हेल्थ से जुड़े इस तरह के कॉन्टेंट को समझने के लिए हमारे साथ जुड़े रहिये.

यह भी पढ़ें: Empty Stomach Ghee: सुबह खाली पेट घी पीने से मिलते कई फायदें, ये एक्ट्रेस भी करती इस रूटीन को फॉलो

(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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sarthak arora Senior Sub Editor
अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
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