Loneliness and Health: तेजी से होता ग्लोबलाइजेशन, लेकिन फिर क्यों बढ़ रहा अकेलापन. विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में लोग तेजी से अकेलापन का शिकार हो रहे हैं. दुनिया भर में बढ़ता अकेलापन (Loneliness) और सामाजिक अलगाव (Social Isolation) लोगों के स्वास्थ्य, जीवन की गुणवत्ता और समाज पर गंभीर असर डाल रहा है. WHO का कहना है कि सामाजिक जुड़ाव केवल भावनात्मक जरूरत नहीं है, बल्कि यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. मजबूत सामाजिक संबंध लोगों के बेहतर स्वास्थ्य, लंबी उम्र और बेहतर जीवन स्तर से जुड़े होते हैं.
WHO की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में हर 6 में से 1 व्यक्ति अकेलेपन का सामना कर रहा है. यह समस्या केवल भावनात्मक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डालती है. रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक स्तर पर लगभग 16 प्रतिशत लोग अकेलेपन से प्रभावित हैं. किशोरों और युवाओं में यह समस्या और अधिक देखने को मिल रही है, जहां लगभग हर पांच में से एक युवा खुद को अकेला महसूस करता है. वहीं, कम आय वाले देशों में स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां करीब 25 प्रतिशत लोग सामाजिक अलगाव या अकेलेपन का अनुभव करते हैं. WHO के अनुसार, अकेलापन और सामाजिक अलगाव हर साल लगभग 8.71 लाख मौतों से जुड़ा हो सकता है.
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स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर
रिपोर्ट में बताया गया है कि अकेलापन और सामाजिक अलगाव दिल की बीमारी, डिप्रेशन, चिंता, स्ट्रोक और समय से पहले मृत्यु के जोखिम को बढ़ा रहा हैं. इसके अलावा, यह बच्चों की शिक्षा, कार्यक्षमता और प्रोडक्टिविटी को भी प्रभावित कर रहा है.
अकेलेपन से सबसे ज्यादा कौन प्रभावित?
- किशोर और युवा
- बुजुर्ग लोग
- कम इनकम वाले लोग
- अकेले रहने वाले लोग
- विकलांग
WHO ने बताया हल
डब्लूएचओ की रिपोर्ट कहती है कि सामाजिक जुड़ाव बढ़ाने के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है. जैसे, सामुदायिक गतिविधियों को बढ़ावा देना, लोगों के बीच संवाद और सहभागिता बढ़ाना, स्कूलों और कार्यस्थलों में सामाजिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना और नीतियों में सामाजिक जुड़ाव को शामिल करना शामिल जरूरी है. ऐसे में आप सोशल कनेक्टिविटी बढ़ा सकते हैं.
इसके अलावा आप अकेलेपन को दूर करने के लिए परिवार और दोस्तों के साथ बातचीत करें. स्क्रीन टाइम कम करने की कोशिश करें. सोशल एक्टिविटीज में हिस्सा लेते रहें. योग, मेडिटेशन और एक्सरसाइज को लाइफस्टाइल में जोड़ें.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

