Blood Test for Diabetes: आजकल लोग अपनी सेहत को लेकर जागरूक हो रहे हैं और नियमित रूप से ब्लड टेस्ट करा रहे हैं. लेकिन अक्सर देखा जाता है कि रिपोर्ट आने के बाद लोग कन्फ्यूज हो जाते हैं कभी एक लैब में कुछ और रिजल्ट आता है तो दूसरी जगह कुछ और ऐसे में सही रिपोर्ट क्या है, इस पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है.
फिट रहे इंडिया ने पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट Dr. Sameer Bhati से खास बातचीत की. डॉक्टर समीर के अनुसार, सिर्फ टेस्ट कराना ही नहीं बल्कि टेस्ट से पहले की तैयारी और सही तरीके से सैंपल देना भी उतना ही जरूरी है. अगर इन बातों का ध्यान न रखा जाए तो रिपोर्ट में फर्क आ सकता है.
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सैंपल देने से पहले बरतें ये सावधानियां
डॉक्टर बताते हैं कि सैंपल देने से पहले कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए. जैसे अगर फास्टिंग टेस्ट है तो 8–12 घंटे तक कुछ न खाएं, लेकिन पानी पी सकते हैं. शरीर का हाइड्रेटेड रहना बेहद जरूरी है, क्योंकि डिहाइड्रेशन की वजह से खासकर किडनी से जुड़े टेस्ट प्रभावित हो सकते हैं. इसके अलावा बहुत ज्यादा देर तक भूखे रहना यानी ओवर-फास्टिंग भी रिपोर्ट को गलत दिखा सकती है.
खानपान का भी रिपोर्ट पर सीधा असर पड़ता है. अगर आपने टेस्ट से एक दिन पहले बहुत ज्यादा तला-भुना, नॉनवेज या शराब का सेवन किया है, तो ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल जैसे पैरामीटर बढ़े हुए आ सकते हैं. इसी तरह भारी एक्सरसाइज या जिम करने से भी कुछ टेस्ट, खासकर किडनी और मसल्स से जुड़े मार्कर्स में बदलाव आ सकता है.
दवाइयां और सप्लीमेंट्स से प्रभावित होती हैं रिपोर्ट्स
दवाइयां और सप्लीमेंट्स भी रिपोर्ट को प्रभावित करते हैं. जैसे बायोटिन (Biotin) जैसे सप्लीमेंट्स थायरॉइड की रिपोर्ट को गलत दिखा सकते हैं. पेनकिलर, एंटीबायोटिक्स या जिम सप्लीमेंट्स भी कई बार रिपोर्ट में बदलाव ला सकते हैं. इसलिए टेस्ट से पहले डॉक्टर की सलाह से गैर-जरूरी दवाइयों को कुछ समय के लिए बंद करना बेहतर होता है.
टेस्ट से हो सकती है गड़बड़ी या कंफ्यूजन
डॉ. भाटी बताते हैं कि कई टेस्ट ऐसे होते हैं जिनमें अक्सर गड़बड़ी या कन्फ्यूजन हो सकता है. उदाहरण के लिए टाइफाइड के कुछ टेस्ट जैसे टाइफी डॉट या विडाल कई बार गलत पॉजिटिव या नेगेटिव आ सकते हैं. ऐसे मामलों में ब्लड कल्चर ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है. इसी तरह डेंगू, चिकनगुनिया जैसे वायरल बुखार में भी सही समय पर टेस्ट कराना जरूरी होता है, क्योंकि शुरुआती दिनों में रिपोर्ट नेगेटिव आ सकती है.
समय-समय पर करना चाहिए मॉनिटर
कुछ टेस्ट बेहद सेंसिटिव होते हैं, जैसे किडनी फंक्शन, हार्ट मार्कर्स (Troponin), या शुगर का HbA1c टेस्ट. इनकी रीडिंग में थोड़ा सा भी बदलाव गंभीर संकेत हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से डायबिटीज या ब्लड प्रेशर की समस्या है. इसलिए इन टेस्ट को समय-समय पर मॉनिटर करना जरूरी है.
इसके अलावा यह भी जरूरी है कि आप जिस लैब में टेस्ट करा रहे हैं वह भरोसेमंद और एक्रेडिटेड हो, जैसे NABL सर्टिफाइड लैब. सैंपल सही तापमान में और सही समय पर लैब तक पहुंचे, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है. घर से सैंपल देने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सैंपल सही तरीके से कलेक्ट और ट्रांसपोर्ट किया जा रहा है.
सही डायग्नोसिस जरूरी
डॉक्टर यह भी सलाह देते हैं कि किसी एक रिपोर्ट के आधार पर घबराना नहीं चाहिए. अगर कोई रीडिंग ज्यादा या कम आती है, तो उसे दोबारा टेस्ट कराकर कन्फर्म करना बेहतर होता है. साथ ही अपनी मेडिकल हिस्ट्री और लक्षणों की जानकारी डॉक्टर को देना जरूरी है, ताकि सही डायग्नोसिस हो सके.
आखिर में यही समझना जरूरी है कि लैब रिपोर्ट को खुद से समझने की बजाय डॉक्टर की सलाह लेना सबसे बेहतर है. छोटी-मोटी वेरिएशन सामान्य हो सकती हैं, लेकिन किसी भी गंभीर बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. सही जानकारी, सही समय पर टेस्ट और सही लैब का चुनाव यही सटीक और भरोसेमंद रिपोर्ट की कुंजी है.
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