Positive Parenting Tips: कई पेरेंट्स को आपने ये कहते सुना होगा कि हमारे बच्चे हमारी एक नहीं सुनते. बच्चे हर समय फोन में लगे रहते हैं. जिस उम्र में हमने सोचा था कि हम फ्री हो जाएंगे हमें उस उम्र में परेशान करते हैं. इस तरह कि शिकायतें कई पेरेंट्स करते हैं. लेकिन क्या कभी ये सोचा है कि बच्चें इस तरह की परेशानी लाते कहां से हैं?
क्योंकि कई बार घर में ही ऐसी सिचुएशन महौल बन जाता है जिसके कारण बच्चे ऐसा बर्ताव करते हैं. या यूं कहा जाए कि बच्चों की प्रॉब्लम्स को किसी ने सुना ही नहीं जैसे आखिर बच्चा आपसे चाहता क्या है. इन्हीं सब मुद्दों पर फिट रहे इंडिया ने दिल्ली अपोलो हॉस्पिटल में चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर एकता पूरी से खास बातचीत की. उन्होंने पेरेंट्स के लिए क्या सलाह दी आइए डिटेल में जानते हैं.
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कम होता जा रहा पेशंस लेवल
डॉक्टर एकता बताती हैं कि आजकल लोगों का पेशंस लेवल काफी कम हो गया है. इसका भी एक कारण है दौड़ती हुई लाइफ. यानी तेजी से भागना, डेली ऑफिस, ट्रैफिक जाम, इन सभी परेशानियों के चलते पेरेंट्स बच्चों की प्रॉब्लम्स को डील नहीं कर पाते क्योंकि पेशंस लेवल काफी कम हो गया है. क्योंकि इस लाइफस्टाइल के कारण आजकल पेरेंट्स के पास समय कम हो गया है. इसलिए सीमित समय में ही बच्चों के साथ टाइम स्पेंड करने की कोशिश करते हैं.
उदहारण के तौर पर अगर आपके पास एक घंटे का समय है और आप ऐसी भागदौड़ वाली लाइफस्टाइल जी रहे हैं, तो आप ये सोचेंगे कि आप उसी एक घंटे के अदंर बच्चे को पढ़ा भी पाएं, उनको सिखा भी पाएं, उनसे बात भी कर पाएं कि आखिर पूरे दिन में क्या हुआ. कैसा दिन गया. लेकिन क्योंकि आपके पास उस दौरान समय होता है. ये सब चीजें करने का लेकिन बच्चे का अगर मन नहीं है या फिर उसके पास समय नहीं होता तो पेरेंट्स और बच्चों के बीच बहस होने लगती है. जिसके चलते पेरेंट्स को लगता है कि बच्चा बदतमीजी कर रहा है.
पेरेंट्स को फॉलो करने चाहिए ये रूल्स
ऐसी परेशानियों से बचा जा सकता है. जिससे आपका बच्चा आपकी बात भी सुनेगा और उसे पूरा भी करेगा. डॉक्टर एकता ने कुछ रूल्स बताए जिसे हर पेरेंट्स को फॉलो करना चाहिए. जैसे बच्चे आपसे आपके टाइम की मांग करते हैं. लेकिन आजकल पेरेंट्स का ऐसा लाइफस्टाइल हो गया है कि वो समय के बजाए वो सभी चीजें देने को तैयार होते हैं जो बच्चे उनसे मांग कर लेते हैं. उदहारण के तौर पर खिलौने या फिर कई चीजें. जिसके चलते बच्चों और पेरेंट्स में बॉन्ड की कमी हो जाती है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं. )

