Food packaging health: नुक्कड़ पर मिलने वाला खाना यानी स्ट्रीट फूड कितना स्वाद लगता है. स्वाद होता भी है. चाहे समोसा हो, कचौड़ी हो, आलू-पूड़ी या फिर जलेबी ही क्यों न हो. कुछ दुकानदार इन्हें डिस्पोजेबल प्लेट में परोसते हैं, लेकिन कई दुकानदार अखबारों में ही पूड़ी, कचौड़ी या फिर जलेबी परोस देते हैं. स्वाद भले ही बेहतरीन हो लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये सेहत के लिए कितना नुकसानदायक हो सकते हैं?
दरअसल अखबारों में कैमिकल वाले इंक का इस्तेमाल किया जाता है. कैमिकल वाला इंक हमारी सेहत के लिए काफी नुकसानदायक होता है. ऐसी इंक इंसानों के शरीर को काफी खतरा पहुंचा सकता है. लेकिन हम आपसे इस बारे में क्यों बात कर रहे हैं? तो इसका जवाब है कि मुंबई से एक मामला सामने आया जो खूब सुर्खियां बटौर रहा है. जिसके बाद ही FSSAI ने एक एडवाइजरी जारी की है.
मुंबई वाला मामला क्या है?
जानकारी है कि एक मशहूर वड़ा-पाव दुकानदार ग्राहकों को अखबार में खाना परोस रहा और पैक करता हुआ नजर आया. इसकी खबर फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट (FSSAI) तक पहुंची. जिसके बाद FSSAI और मुंबई नगर निगम ने मिलकर दुकान पर पहुंचकर कार्रवाई की. वहीं इस कार्रवाई के बाद ऑथोरिटी ने दुकानदारों को साफ और कड़े शब्दों में ये आदेथ दिए कि आदेश को नहीं मानेगा उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. आदेश है कि इस तरह अखबारों में खाना न परोसा जाए.
सुरक्षित तरीके से परोसा जाए खाना
दरअसल इस कदम के पीछे का मकसद ये सुनिश्चित करना है कि शहर या फिर कस्बों में खाने को सेफ तरीके से संभाला जाए और सर्व किया जाए. हालांकि ये जानकारी सामने आने के बाद कुछ लोगों के मन में ये सवाल जरूर आया होगा कि इससे पहले क्यों नहीं टोका गया? अब क्यों टोका जा रहा है? तो बता दें कि अखबारों में खाना परोसे जाने से हेल्थ को काफी नुकसान पहुंच सकता है.
हालांकि ये पहली बार नहीं है कि जब अखबारों में खाना न परोसे जाने को लेकर इंस्ट्रक्शंस जारी किए गए हों. इससे पहले भी FSSAI की ओर से इस तरह की गाइडलाइंस बनाई गई थी और जारी भी हुई है. FSSAI के ही अनुसार अखबार खाने के कॉन्टैक्ट में आना सेफ नहीं होता है. इसका कारण साफ है पेपर में छपने वाली इंक. इस इंक में कितने तरीके के कैमिकल रंग और दूसरे भी पदार्थ होते हैं, जैसे लेड और भी कई भारी धातुएं शामिल होती हैं. जब गर्म या तेल वाला खाना अखबार में रखा जाता है, तो इसमें ये तत्व मिल सकते हैं.
सिर्फ इंक ही नहीं कारण
वहीं सिर्फ इंक के कारण ही नहीं मना किया जाता है. दरअसल जब अखबारों को बांटा जाता है तो उस समय भी अखबार ढुलाई के समय या फिर बांटने के समय में धूल-मिट्टी के संपर्क में आती है. जो बीमारी फैलने के खतरे को बढ़ाती है. क्योंकि गंदगी में छोटे बैक्टीरिया हो सकता है कि नजर न आए, और अब ऐसे में अगर आप खाने को अखबारों में रखेंगे तो वो खराब हो सकता है. आप फूड पॉइजनिंग का भी शिकार हो सकते हैं.
नई गाइडलाइन में क्या कहा?
FSSAI द्वारा जारी नई गाइडलाइन में कहा गया कि ये ध्यान रखना काफी महत्वपूर्ण है कि छपाई या फिर इंक में कई खतरनाक रंग, पिगमेंट, बाइंडर और कैमिकल्स होते हैं, जिनमें खास तौर पर सीसा और अन्य भारी धातुएं शामिल होती हैं. ये खाने में घुल सकती हैं और लंबे समय में इससे गंभीर बीमारियां हो सकती है. रिसर्चर्स का मानना है कि ये इंक केमिकल कैंसर पैदा करने की क्षमता रखते हैं.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

