Heatwave Health Risks: घर से बाहर किसी काम के लिए निकलों तो धूप के थपेडे़ हमें पड़ने लगते हैं. ऐसा ही महसूस आज हर किसी को हो रहा होगा. इन दिनों भारत किसी आग के गोले में बदल गया हो ऐसा लगता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत दुनिया के सबसे 20 गर्म शहरों में से एक है.
जानकारी के अनुसार बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल यहां तक का टेंप्रचर 44-55 डिग्री छू रहा है. हालांकि मौसम विभाग की ओर से पहले भी लू का अलर्ट जारी किया जा चुका है. इतना ही नहीं ये भी जानकारी सामने आ चुकी है कि आने वाले समय में हालात और भी बिगड़ सकते हैं. जिसके कारण सवाल सिर्फ टेंप्रेचर तत सीमित नहीं रह जाता है. क्योंकि इस भीषण गर्मी में हमारी बॉडी अंदर से काफी कुछ झेल रही है.
45 डिग्री में कैसे रिएक्ट करता शरीर?
क्या आप जानते हैं कि 45 डिग्री टेंप्रेचर में हमारा शरीर कैसा रिएक्टर करता है? कई लोगों के लिए गर्मी जानलेवा तक साबित हो सकती है. ऐसे ट्रेंप्रेचर में हमारा शरीर का कूलिंग सिस्टम भी फेल जाता है. दरअसल जब टेंप्रेचर 40 से ऊपर जाता है, तो हमारा शरीर का कूलिंग सिस्टम यानी पसीना ही मुख्य सहारा होता है. लेकिन ये सिस्टम फेल हो जाता है. ऐसे में इस माहौल में आपको अपने शरीर का शास ख्याल रखना चाहिए.
शरीर को हाइड्रेट रखें
क्योंकि मौसम ऐसा है कई लोगों को डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है. क्योंकि ऐसे मौमसम में हमारी बॉडी तेजी से पानी सोख लेती है. पसीना भी ज्यादा निकलता है जिसके कारण शरीर में जरूरी नमक इलेक्ट्रोलाइट्स कम होने लग जाते हैं. नतीजा आपको कई समस्या जैसे चक्कर आना, कमजोरी होना, मुंह सूखने की परेशानी हो सकती है. कई बार हमारी बॉडी पार्ट्स भी सही से काम नहीं कर पाते. इसलिए बॉडी को हाइड्रेट रखने की जरूरत है.
हीट स्ट्रोक का खतरा
वहीं ऐसे मौसमम में हीट स्ट्रोक का खतरा भी अधिक रहता है, जो कि सबसे खतरनाक कंडिशन से एक है. ये तब होता है जब हमारी बॉडी का टेंप्रेचर 40 डिग्री से ऊपर चला जाता है. जिसके बाद बॉडी अपने आप पर से कंट्रोल खो देती है. इससे कई समस्या जैसे तेज बुखार, बेहोशी, उलझन महसूस हो सकती है. ऐसे में अगर आप सही समय पर इलाज न लें तो जान तक जाने का खतरा हो सकता है. ऐसे मौसम में बीपी की भी समस्या हो सकती है. दरअसल गर्म मौसम में शरीर की नसें फैलना शुरू हो जाती है. जिसके कारण बीपी अचानक गिर सकता है. नतीजा चक्कर आने की समस्या, बेहोशी, हार्ट पर प्रेशर पड़ सकता है.
इन लोगों को रहता अधिक खतरा
वहीं अब जान लेते हैं कि आखिर किन लोगों को अधिक खतरा रहता है. खासतौर पर बच्चे, बुजुर्गों को अधिक खतरा रहता है. क्योंकि उनका शरीर ऐसे टेंप्रेचर को कंट्रोल करने में कमजोर होता है. इसी के साथ प्रेग्नेंट महिलाएं. उन्हें डिहाइड्रेशन और थकान का काफी असर ज्यादा देखने को मिल सकता है. वहीं जो लोगों को दिल की बीमारी परेशान करती है. जैसे बीपी की समस्या है उन्हें अधिक खतरा रह सकता है. इतना ही नहीं डिलिवरी बॉय जो अधिक समय तक बाहर धूप में काम करते हैं, मजदूर, ट्रैफिक पुलिस उन्हें इस तापमान का अधिक खतरा हो सकता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

