Injection & Diet Tips: आजकल हेल्थ चेकअप में सबसे ज्यादा जो समस्याएं सामने आती हैं, उनमें बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) शामिल हैं. लेकिन चिंता की बात यह है कि कई लोगों को लंबे समय तक पता ही नहीं चलता कि उन्हें ये समस्याएं हैं.
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. हरनीश के अनुसार, 40 साल की उम्र के बाद पूरी तरह सामान्य लिपिड प्रोफाइल वाले लोग काफी कम मिलते हैं. 10 में से केवल 2-3 लोगों की रिपोर्ट पूरी तरह आदर्श होती है. कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट में सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली वैल्यू LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल) होती है. यदि LDL बढ़ा हुआ है तो भविष्य में हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ सकता है.
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Lipoprotein(a) बढ़ा सकता है खतरा
- HDL (गुड कोलेस्ट्रॉल) कम होना भी ठीक नहीं है.
- ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ना भी नुकसानदायक हो सकता है.
- Lipoprotein(a) नाम का एक फैक्टर भी हार्ट डिजीज का जोखिम बढ़ा सकता है.
Lipoprotein(a) क्या है?
यह एक ऐसा कोलेस्ट्रॉल फैक्टर है जो ज्यादातर आनुवंशिक (Genetic) होता है. यानी यह परिवार से मिल सकता है. अगर इसका स्तर ज्यादा है तो हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है, खासकर कम उम्र के लोगों में. हालांकि इसका स्तर बढ़ा होने का मतलब यह नहीं है कि हार्ट अटैक निश्चित रूप से होगा। यह केवल एक जोखिम कारक है.
कोलेस्ट्रॉल कितना बढ़े तो चिंता करनी चाहिए?
आमतौर पर LDL को 100 mg/dL से कम रखना बेहतर माना जाता है. अगर LDL 150 से ऊपर हो, परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास हो, डायबिटीज या हाई बीपी हो, मोटापा हो, तो अधिक सतर्क रहने की जरूरत होती है.
क्या केवल लाइफस्टाइल से कोलेस्ट्रॉल कम हो सकता है?
कई मामलों में हां डॉक्टर सबसे पहले इन बदलावों की सलाह देते हैं:
- रोज 30-45 मिनट एक्सरसाइज करें.
- तेज चाल से चलें (Brisk Walk).
- तला-भुना और पैकेज्ड फूड कम करें.
- मीठे खाद्य पदार्थ और शुगर ड्रिंक्स से बचें.
- रेड मीट कम करें.
- ज्यादा फाइबर और प्रोटीन वाली डाइट लें.
- वजन नियंत्रित रखें.
- अक्सर 3 महीने बाद दोबारा टेस्ट करके देखा जाता है कि सुधार हुआ या नहीं.
क्या कोलेस्ट्रॉल की दवा जिंदगीभर खानी पड़ती है?
जरूरी नहीं. यदि बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल मुख्य रूप से खराब लाइफस्टाइल की वजह से है और व्यक्ति वजन कम कर लेता है, नियमित व्यायाम करता है और खानपान सुधार लेता है, तो कई मामलों में दवा बंद भी की जा सकती है. लेकिन यह फैसला केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए.
स्टैटिन दवाओं से डरना चाहिए?
डॉक्टरों के मुताबिक नहीं, स्टैटिन दवाएं कोलेस्ट्रॉल कम करती हैं. हार्ट अटैक का खतरा घटाती हैं. धमनियों की सूजन कम करने में मदद करती हैं. कुछ लोगों में मांसपेशियों में दर्द, लिवर एंजाइम बढ़ना या शुगर बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन गंभीर साइड इफेक्ट बहुत दुर्लभ होते हैं.
कोलेस्ट्रॉल के इंजेक्शन किन लोगों को दिए जाते हैं?
ज्यादातर मरीजों को इंजेक्शन की जरूरत नहीं पड़ती.
इनकी जरूरत आमतौर पर उन लोगों को होती है:
- जिन्हें स्टैटिन दवाएं सूट नहीं करतीं.
- जो दवा लेने के बावजूद लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते.
- जिन्हें हाल ही में हार्ट अटैक हुआ हो.
उपलब्ध इंजेक्शन
- Evolocumab – हर 2 सप्ताह में एक बार.
- Inclisiran – हर 6 महीने में एक बार.
हाई बीपी को “साइलेंट किलर” क्यों कहा जाता है?
क्योंकि ज्यादातर लोगों में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते.डॉक्टर बताते हैं कि भारत में लगभग 50% लोगों को यह भी नहीं पता कि उन्हें हाई बीपी है.
हाई बीपी के संभावित संकेत
हालांकि कई लोगों में कोई लक्षण नहीं होते, फिर भी कुछ संकेत हो सकते हैं:
- बार-बार सिरदर्द
- धुंधला दिखाई देना
- आंखों के सामने अंधेरा छाना
- जल्दी थकान होना
- सांस फूलना
- सीने में भारीपन महसूस होना
किस उम्र से बीपी चेक कराना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार:
- 18 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को कम से कम एक बार बीपी जरूर चेक कराना चाहिए.
- यदि सब सामान्य है तो हर 2-3 साल में जांच कराते रहें.
- परिवार में हाई बीपी का इतिहास हो तो और ज्यादा सतर्क रहें.
मोटापा, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल का क्या संबंध है?
ये तीनों समस्याएं अक्सर साथ-साथ चलती हैं. मोटापा बढ़ने पर कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है. हाई बीपी हो सकता है. टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है. इसे डॉक्टर “मेटाबॉलिक सिंड्रोम” कहते हैं.
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