Keytruda Injection: कैंसर पेशंट के इलाज में Keytruda नामक दवा का इस्तेमाल किया जाता है. इस समय इस दवा काफी चर्चा हो रही है. इस दवा पर चर्चा का कारण है कालाबाजारी साथ ही नकली दवाओं की बिक्री. जानकारी के लिए बता दें कि ये एक ऐसी बीमारी है जो इम्यूनिटी को एक्टिव करती है और कैंसर के सेल्स से लड़ने में मदद करती है.
इस दवा को इम्यूनोथेरेपी कहा जाता है. वहीं जानकर हैरानी होगी कि इस दवा का इस्तेमाल न सिर्फ कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने में किया जा रहा है. फेफड़ों, किडनी और सर्वाइकल यहां तक की स्किन कैंसर जैसी गंभीर मामलों से लड़ने में भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है.
दवा हासिल करना हुआ मुश्किल
इंडियन एक्स्प्रेस में इस दवा को लेकर बड़ी जानकारी का खुलासा हुआ. जिसमें बताया गया कि मरीजों को ये दवा मिल पाना काफी मुश्किल हो रहा है. ये दवा मरीजों की पहुंच से बाहर होती जा रही है. जारी हुई रिपोर्ट में जिन मरीजों को ये दवा नहीं मिल पा रही उन्होंने अपना दुख साझा किया.
क्या है ये दवा और क्यों हो रही चर्चा?
इस दवा के ट्रेंड होने का क्या कारण है? तो बता दें कि कई हेल्थ रिपोर्ट्स के अनुसार कई मरीजों ने इस दवा को लेकर अपना एक्सपीरिएंस शेयर किया है. जिसके बाद से ये काफी चर्चा में है. साथ ही कुछ एक मामले ऐसे थे जिनमें कीमोथेरेपी जहां असरदार नहीं थी वहां इम्यूनोथेरेपी से अच्छे रिजल्ट मिल रहा है. इसी कारण लोग इसे लाइफ सेविंग इंजेक्शन के तौर पर देखने लगे हैं. दरअसल Keytuda हमारे इम्यून को और मजबूत बनाती है. इससे ये दवा कैंसर सेल्स को पहचानकर खत्म करने में मदद मिलती है.
कितनी है इस दवा की कीमत?
बात करें दवा की कीमत की तो भारत में इसका एक डोज 3 लाख रुपये से भी अधिक में बेचा जा रहा है. यानी जो ये दवा लेना चाहते हैं उन्हें लाखों रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं. हालांकि कुछ ऐसे पेशंट्स भी हैं जो इस दवा को एक्सेस प्रोग्राम के जरिए पा रहे हैं वो भी कम कीमत में. लेकिन कम कीमत के बावजूद भी 10 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं.
मरीजों को करना पड़ रहा समस्या का सामना
अब मरीजों को इस दवा पाने के लिए काफी समस्या जैसे दवा मिल जाए तो इलाज में अधिक खर्च होना, मुश्किल डॉक्यूमेंटेशन प्रोसेस, आप जिस अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं वहा ये दवा होगी साथ ही डॉक्टर की उपलब्धता होगी कि नहीं. सही जानकारी की कमी होना. क्योंकि अगर सही जानकारी नहीं होती तो मरीजों को डॉक्यूमेंटेशन में काफी दिक्कत होती है.
जिसके कारण इलाज में देरी हो सकती है. हालांकि कई हेल्थ एक्सपर्ट्स का ऐसा भी मानना है कि भले ही ये दवा अफेक्टिव है. लेकिन ये जरूरी नहीं कि ये हर मरीज के लिए काम करेगी ही करेगी. डॉक्टर्स पहले मरीज की कंडिशन को जांचते हैं. कंडिशन जांचने के बाद उसे ध्यान में रखकर ही मरीज को ये दवा दी जाती है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


