WHO approved malaria treatment: मलेरिया की जंग में अक्सर बड़े-बड़े हार जाते हैं. वहीं अगर ये खतरनाक बीमारी नवजात शिशुओं को हो जाए तो उन्हें खास केयर की सख्त जरूरत होती है. लेकिन अब डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि डब्ल्यूएचओ (WHO) ने मलेरिया की पहली ऐसी दवा को मंजूरी दी है, जिन्हें शिशुओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है. बता दें कि अब तक नवजात शिशुओं का इलाज उन दवाओं से किया जाता था जो वयस्कों के लिए बनाई गई थीं.
बता दें कि हर साल 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है. इसी खास मौके पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नवजात शिशुओं की इस दवा को मंजूरी दी गई. WHO के महानिदेशक Tedros Adhanom Ghebreyesus ने कहा कि नए टीके, बेहतर जांच तकनीक और प्रभावी दवाईयां मलेरिया के खिलाफ लड़ाई को नई दिशा दे रही हैं.
नवजात के लिए खास दवा
नवजात बच्चों के लिए आर्टीमेथर-ल्यूमेफैन्ट्रिन नाम की दवा को मंजूरी मिली है. मलेरिया से लड़ने में कामयाब इस दवा को प्री-क्वालिफिकेशन मंजूरी मिली है. इसका मतलब है कि ये दवा गुणवत्ता के लिहास से अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करती है. ये दवा 5 किलोग्राम से कम वजन वाले नवजात शिशुओं के लिए सुरक्षित है. इन दवाओं को मेडिसिन कंपनी Novartis ने Medicines for Malaria Venture के साथ मिलकर बनाया गया है.
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क्यों खास है ये दवा?
मलेरिया दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारी में आती है. वहीं अफ्रीका में मलेरिया से हर साल 3 से 18 प्रतिशत नवजात शिशु इन बीमारी की चपेट में आते हैं. लेकिन इससे पहले नवजात के लिए किसी प्रकार की कोई दवा मार्किट में उपलब्ध नहीं थी. उनका इलाज उन दवाओं से किया जाता था जो बड़े बच्चों के लिए बनाई गई है. इस कारण उनके ठीक होने में अधिक समय लगता था, लेकिन अब नवजात के लिए बनाई गई स्पेशल दवा से वह जल्दी रिकवर हो सकेंगे.
मच्छर जनित बीमारी
मलेरिया मच्छर के काटने से होता है लेकिन यह एक फैलने वाली बीमारी भी है. इस बीमारी में मरीज को तेज बुखार के साथ-साथ, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, अत्यधिक थकान, उल्टी जैसे लक्षण नजर आते हैं. ब्लड प्लेटलेट्स तेजी से गिरती है और शरीर कमजोर हो जाता है. समय पर इलाज न मिलने पर मृत्यु हो सकती है. यह बीमारी 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए खासतौर पर खतरनाक है.
मलेरिया से हुई 6 लाख मौत
गौरतलब है कि हर साल 2024 में 80 देशों में मलेरिया के लगभग 282 मिलियन मामले सामने आए थे, वहीं 6.10 लाख लोगों की मौत हुई. इसके बाद साल 2023 में मलेरिया के मामलों में लगभग 9 मिलियन की बढ़ोतरी हुई. इसके अलावा अफ्रीकी क्षेत्र में मलेरिया के मामले तेजी से देखने को मिलते हैं. वहां 5 साल से कम उम्र के बच्चों का आंकड़ा 75% तक होता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

