होमExplainersबच्चा बार-बार बीमार पड़ता है? डॉक्टर ने बताया कब घबराएं और कब...

बच्चा बार-बार बीमार पड़ता है? डॉक्टर ने बताया कब घबराएं और कब बिल्कुल नहीं

Parenting Tips: बच्चों में सर्दी, खांसी, बुखार और वायरल संक्रमण आम हैं और ज्यादातर मामलों में अपने आप ठीक हो जाते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि नए माता-पिता को अनावश्यक दवाओं की बजाय सही देखभाल और धैर्य पर ध्यान देना चाहिए.

Parenting Tips: आज के समय में नए माता-पिता के मन में बच्चों की परवरिश को लेकर ढेरों सवाल होते हैं. बच्चे को बुखार हो जाए, खांसी-जुकाम हो जाए या वह खाना कम खाए, तो माता-पिता अक्सर घबरा जाते हैं. लेकिन बाल रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) डॉ. सौरभ कटारिया का मानना है कि ज्यादातर मामलों में बच्चे से ज्यादा माता-पिता की चिंता का इलाज करने की जरूरत होती है.

डॉ. कटारिया बताते हैं कि बच्चों में होने वाली अधिकांश समस्याएं सामान्य वायरल संक्रमण होती हैं. सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार और पेट के वायरल संक्रमण बच्चों में आम हैं और ज्यादातर मामलों में ये अपने आप ठीक हो जाते हैं. उनके अनुसार, अगर वायरल संक्रमण में दवा दी जाए तो भी बच्चा लगभग 7 दिन में ठीक होता है और अगर दवा न दी जाए तो भी लगभग एक हफ्ते में ठीक हो जाता है. इसलिए हर बार ज्यादा दवाइयों की जरूरत नहीं होती.

बच्चों का बीमार पड़ना भी है सामान्य

विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों का साल में 5 से 6 बार वायरल संक्रमण से बीमार पड़ना बिल्कुल सामान्य माना जाता है. दरअसल, ऐसे संक्रमण बच्चों की इम्यूनिटी को विकसित करने में मदद करते हैं. जो बच्चे पहली बार प्ले-स्कूल या स्कूल जाना शुरू करते हैं, वे शुरुआती वर्षों में ज्यादा बीमार पड़ते हैं क्योंकि उनका शरीर नए वायरस और बैक्टीरिया के संपर्क में आता है.

कई बार दवाइयां बच्चे से ज्यादा माता-पिता की चिंता के लिए लिखी जाती हैं

डॉ. कटारिया के मुताबिक कई बार माता-पिता इतनी चिंता में होते हैं कि उन्हें लगता है डॉक्टर ने ज्यादा दवाइयां नहीं लिखीं तो इलाज अधूरा है. ऐसे में कुछ दवाइयां केवल उनकी मानसिक संतुष्टि के लिए भी लिखी जाती हैं. अगर माता-पिता धैर्य रखें और डॉक्टर की सलाह पर भरोसा करें, तो कई मामलों में कम दवाओं से भी काम चल सकता है.

यहां देखें पूरा VIDEO:

खांसी-जुकाम में क्या करें?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि वायरल खांसी और जुकाम में:

  • बच्चों को गुनगुना पानी पिलाएं.
  • बड़े बच्चों को शहद और अदरक का मिश्रण दिया जा सकता है.
  • ठंडी चीजों से बचाएं.
  • नंगे पैर ठंडी जमीन पर न चलने दें.
  • पर्याप्त आराम करवाएं.

क्या बच्चों को कफ सिरप देना सुरक्षित है?

डॉ. कटारिया के अनुसार, छोटे बच्चों में कफ सिरप का उपयोग बहुत सोच-समझकर करना चाहिए.

  • 6 महीने से छोटे बच्चों को किसी भी तरह की कफ मेडिसिन नहीं दी जानी चाहिए.
  • 4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कई कफ सिरप संयोजन (कॉम्बिनेशन) प्रतिबंधित हैं.
  • कई कफ सिरप केवल नींद लाते हैं, बीमारी को जल्दी ठीक नहीं करते.

इसलिए बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के कफ सिरप देना उचित नहीं है.

बच्चे को बुखार हो तो कब घबराएं?

अगर बुखार के साथ ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

  • 104-105°F तक तेज बुखार
  • दवा देने के बाद भी बुखार न उतरना
  • बच्चा बहुत सुस्त हो जाना
  • बार-बार उल्टी होना
  • सांस लेने में दिक्कत होना

वहीं सामान्य वायरल बुखार में शुरुआती 2-3 दिन बुखार ज्यादा रह सकता है और फिर धीरे-धीरे कम होने लगता है.

बच्चों के गिरने पर क्या करें?

छोटे बच्चों का गिरना सामान्य बात है. अधिकतर मामलों में गंभीर नुकसान नहीं होता क्योंकि खोपड़ी (स्कल) मस्तिष्क की अच्छी सुरक्षा करती है.

लेकिन यदि बच्चे में ये लक्षण दिखें तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं:

  • लगातार उल्टियां होना
  • अत्यधिक सुस्ती
  • असामान्य चिड़चिड़ापन
  • बेहोशी या प्रतिक्रिया कम होना

हल्की सूजन होने पर डॉक्टर की सलाह से पैरासिटामोल दी जा सकती है और ठंडी सिकाई भी की जा सकती है.

एयर पॉल्यूशन बच्चों को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है

विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों के फेफड़े लगभग 12 साल की उम्र तक विकसित होते रहते हैं. इसलिए वायु प्रदूषण का असर बच्चों पर वयस्कों की तुलना में अधिक होता है.

बचाव के लिए:

  • प्रदूषण वाले दिनों में बच्चों को कम बाहर ले जाएं.
  • घर में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें.
  • बच्चों को पर्याप्त पानी पिलाएं.
  • AQI बहुत खराब होने पर बाहरी गतिविधियां सीमित करें.

बच्चे का पहला नहाना कब होना चाहिए?

डॉ. कटारिया के अनुसार:

  • जन्म के बाद कम से कम 2 सप्ताह तक बच्चे को पूरी तरह नहलाने से बचना चाहिए.
  • शुरुआती दिनों में स्पंज बाथ पर्याप्त होता है.
  • नहलाने के लिए गुनगुने पानी का उपयोग करें.
  • कमरे का तापमान लगभग 25-30 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए.

तेल मालिश कितनी जरूरी है?

बच्चों की मालिश फायदेमंद मानी जाती है क्योंकि इससे:

  • माता-पिता और बच्चे की बॉन्डिंग मजबूत होती है.
  • बच्चे को आराम मिलता है.
  • त्वचा और तंत्रिकाओं (नर्व्स) के विकास में मदद मिलती है.

हालांकि मालिश से हड्डियां मजबूत नहीं होतीं। हड्डियों की मजबूती के लिए उचित पोषण, विटामिन D और कैल्शियम जरूरी हैं.

कौन-सा तेल बेहतर माना जाता है?

विशेषज्ञों के अनुसार नारियल तेल (Coconut Oil) बच्चों की मालिश के लिए सुरक्षित और प्रभावी विकल्प माना जाता है। गर्मी और सर्दी दोनों मौसम में इसका उपयोग किया जा सकता है.

अगर मां का दूध न बने तो क्या करें?

डॉ. कटारिया बताते हैं कि यदि किसी कारणवश मां स्तनपान नहीं करा पा रही हैं, तो डॉक्टर की सलाह से फॉर्मूला मिल्क दिया जा सकता है. फॉर्मूला मिल्क अपने आप बच्चों को मोटा नहीं बनाता. समस्या तब होती है जब बोतल से जरूरत से ज्यादा दूध पिला दिया जाता है, जिससे ओवरफीडिंग हो सकती है.

स्तनपान में दिक्कत क्यों आती है?

स्तनपान में परेशानी के कुछ सामान्य कारण हैं:

  • मां का तनाव
  • सही लैचिंग तकनीक की जानकारी न होना
  • पर्याप्त पारिवारिक सहयोग न मिलना
  • प्रसव के बाद स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं
  • बच्चे का NICU में भर्ती होना

विशेषज्ञों का मानना है कि सही मार्गदर्शन और सहयोग मिलने पर अधिकांश माताएं सफलतापूर्वक स्तनपान करा सकती हैं.

यह भी पढ़ें: ‘कल से नहीं पियूंगा’… फिर भी क्यों नहीं छूटती सिगरेट की लत?

(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं.)

author avatar
sarthak arora Senior Sub Editor
अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
sarthak arora
sarthak arora
अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
RELATED ARTICLES

खांसी हो रही है तो कब पीना चाहिए कफ सिरप? जानें कब पड़ती है दवा की जरूरत

Khansi Mein Cough Syrup Kab Peena Chahiye: : खांसी शुरू होते ही कफ सिरप पीना सही है या नहीं? जानें सूखी और बलगम वाली खांसी में क्या फर्क है, कब दवा लेनी चाहिए और किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से मिलना जरूरी है.

Baby Teething Symptoms: दांत निकलते समय बच्चा क्यों रोता है? जानें चिड़चिड़ापन कम करने के आसान और सुरक्षित उपाय

Baby Teething Symptoms: जानें दांत निकलते समय बच्चे क्यों रोते और चिड़चिड़े हो जाते हैं. एक्सपर्ट्स के बताए सुरक्षित उपाय और देखभाल के आसान टिप्स.

World IVF Day 2026: कब कराना चाहिए IVF? जानिए किसे होती है जरूरत, सफलता किन बातों पर करती है निर्भर

World IVF Day 2026: IVF क्या है, किन लोगों को इसकी जरूरत पड़ती है, कब फर्टिलिटी एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए और सफलता किन बातों पर निर्भर करती है, जानिए.

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Most Popular

क्या होता है यूरिक एसिड? जानें बढ़ जाए तो कैसे कर सकते हैं कंट्रोल

High Uric Acid Symptoms: यूरिक एसिड क्या होता है, क्यों बढ़ता है, इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं और इसे कैसे कंट्रोल करें? जानिए डाइट, वजन और लाइफस्टाइल से जुड़े जरूरी उपाय.

ऐसे बनाएं रिच प्रोटीन ब्रेकफास्ट, मिनटों में होगा तैयार

High Protein Breakfast: सुबह का नाश्ता पूरे दिन की एनर्जी का काम करता है. इसलिए गलती से भी सुबह का नाश्ता स्किप नहीं होना चाहिए.

खांसी हो रही है तो कब पीना चाहिए कफ सिरप? जानें कब पड़ती है दवा की जरूरत

Khansi Mein Cough Syrup Kab Peena Chahiye: : खांसी शुरू होते ही कफ सिरप पीना सही है या नहीं? जानें सूखी और बलगम वाली खांसी में क्या फर्क है, कब दवा लेनी चाहिए और किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से मिलना जरूरी है.

जमीन पर बन रही थी सोया चाप, वायरल वीडियो के बाद मचा हड़कंप!

Soya Chaap Viral Video: सोया चाप बनाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें हाइजीन को लेकर सवाल उठे हैं. जानें क्या है पूरा मामला, फूड सेफ्टी विभाग ने क्या कार्रवाई की और किन बातों का रखें ध्यान.

Recent Comments