World No Tobacco Day 2026: हीरोगिरी फू-फू करने में नहीं है. ये डायलोग आपने फिल्म स्टार्ट होने से पहले अक्षय कुमार के मुंह से सुना होगा. भारत में आज भी करीब 26 करोड़ लोग ऐसे हैं जो किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रहे हैं. ये बात हम नहीं कह रहे बल्कि WHO के आंकड़े बताते हैं. सबसे चिंता की बात तो ये भी है कि स्मोकिंग छोड़ने की दर अब भी कम मानी जाती है.
यानी आज भी लोग फू-फू करते हुए अपने शरीर के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा रहे हैं. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि हर 100 में से लगभग 95 लोग कुछ समय सिगरेट छोड़ते हैं, लेकिन फिर बाद में वहीं लौट जाते हैं. जबकी ये उन्हें भी मालूम है कि तंबाकू से कैंसर का खतरा हो सकता है. हालांकि लोगों के प्रति इससे बचने और उनके बीच जाग्रुकता फैलाने के लिए हर साल 31 मई को World No Tobacco Day 2026 के रूप में मनाया जाता है.
हेल्थ के प्रति जाग्रुक होगा इंडिया
ऐसा नहीं है कि लोगों को इससे होने वाले नुकसान के बारे में नहीं मालूम है. उन्हें मालूम है जिसके चलते लोग अपने लाइफस्टाइल में बदलाव भी ला रहे हैं. जल्द ही भारत उन देशों में शामिल होने जा रहा है जहां लोग अपनी हेल्थ को प्रायोरटाइज कर रहे हैं. इसके लिए लोगों ने कई फिटनेस ऐप्स को इस्तेमाल में लाना शुरू कर दिया है. हेल्दी डाइट अपना रहे हैं. जिम जाना शुरू किया है. यानी अपनी हेल्थ का भी खास ख्याल लोग रख रहे हैं. फिर भी चिंता इसी बात की है कि तंबाकू और सिंगरेट की लत लोगों से छूटे नहीं छूट रही. इसलिए ये जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर क्यों नहीं लत छूटती.
क्यों नहीं छोड़ पाते सिगरेट की लत
सिगरेट पीने की लत ऐसी है कि इसे चाह कर भी व्यक्ति छोड़ नहीं पा रहा है. हालांकि स्मोकिंग सिर्फ इच्छाशक्ति का मामला नहीं है. यानी आपने सोचा और छोड़ दिया. क्योंकि इनमें निकोटीन होता है. और निकोटीन की लत जब लगती है तो ये हमारे शरीर और दिमाग दोनों पर अफेक्ट डालती है. यही वजह है कि जब लोग सिरगेट छोड़ने के बारे में सोचते हैं. एक या फिर दो हफ्ते तक छोड़ भी देते हैं. लेकिन कुछ दिन बाद फिर से स्मोकिंग शुरू. वही पुरानी आदत और इस तरह एक बार फिर से आप स्मोकिंग करना शुरू कर देते हैं.
इस बात को मशहूर WHO के मेडलिस्ट प्रोफेसर एमेरिट्स डॉक्टर कार्ल फेगरस्ट्रॉम की बात सच करेगी. उनका कहना है कि लोगों के बीच में स्मोकिंग को लेकर ये गलतफहमी है कि इनसे जो बीमारी होती है उसका कारण निकोटीन है. लेकिन ऐसा नहीं है. कई सालों से इसपर रिसर्च हो रही है और रिसर्च ही बताती है कि सिगरेट से होने वाली गंभीर बीमारियों का मेन कारण निकोटीन था ही नहीं. फिर क्या कारण था? तो इसका जवाब है कि तंबाकू जब जलता है और उससे धुआं निकलता है वो धुंआ जहरीला है और नुकसानदेह है. फिर निकोटीन का क्या काम है? तो इसका जवाब है निकोटीन आपको स्मोकिंग की लत लगाए रखता है. यानी निकोटीन सिर्फ लत पैदा करती है. नुकसान सिगरेट से निकलने वाले धुएं से हो रहा है.
स्मोकिंग छोड़ने पर होती है ये समस्या
अब कुछ लोग ठान ही लेते हैं कि वो स्मोकिंग को छोड़ देंगे. धीरे-धीरे अपनी सिगरेट पीने की आदत को कम करेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हो पाता. क्योंकि जब स्मोकिंग छोड़ते हैं तो कई तरह के Withdrawal Symptoms का सामना करना पड़ता है. आसान भाषा में कहें तो लोगों को चिड़चिड़ापन, बेचैनी, सिरदर्द, बार-बार क्रेविंग्स होना, नींद की समस्या होना, फोकस करने में मुश्किल पैदा हो जाना. इस तरह के लक्षण दिखने लगते हैं. इसलिए लोग फैसला तो ले लेते हैं कि छोड़ देंगे और कोशिश भी करते हैं. लेकिन जब ये सब समस्याएं सताती है तो वो फिर से स्मोकिंग शुरू कर देते हैं.
क्या इसका कोई इलाज नहीं?
इलाज पर बात करें तो ऐसा नहीं है कि इसका कोई इलाज नहीं है. निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपीज मार्केट में मौजूद है. जैसे गम और लोजेंजेस को स्मोकिंग छुड़वाने में काफी हेल्पफुल माना जाता है. स्टडीज कहती है कि इस थेरेपी की मदद से 50 से 70 प्रतिशत तक बेहतर रिजल्ट देखने को मिल सकते हैं. स्मोकिंग को छोड़ना मुश्किल भी नहीं है बस जरूरत है तो जानकारी की जैसे जब आप इसे छोड़ना चाहें तो ये जरूर पता करें कि सही मात्रा में निकोटीन मिल पा रहा है या नहीं क्योंकि निकोटीन की क्रेविंग्स और विड्रॉल सिम्प्टम्स को कंट्रोल किया जा सके. लेकिन लोग क्या करते हैं जब कोई समस्या जैसे सांस लेने में तकलीफ या फिर अन्य समस्या हो तो सिगरेट अचानक छोड़ने का फैसला ले लेते हैं.
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