Rat fever symptoms: देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर शुरू हो चुका है. कहीं रूक-रूक कर बारिश आ रही है तो कहीं लगातार बारिश हो रही है. ऐसे में पल-पल बदलता मौसम सेहत पर खास प्रभाव डालता है. ये सेहत पर कई तरह से असर करता है. ऐसा मौसम खासतौर पर कमजोर इम्यूनिटी वालों पर असर डालता है. उन्हें गले में खराश और बुखार जैसी समस्याएं बढ़ जाती है.
वहीं इन दिनों में खासतौर पर कहा जाता है कि रैट बुखार जैसी समस्या भी देखने को मिलती है. आज के आर्टिकल में हम जानेंगे कि क्या होता है रैट फीवर? इससे कैसे बचा जाएं? एक्सपर्ट कहते हैं कि रैट फीवर का समय पर इलाज नहीं करनवाने से यह जानलेवा साबित हो सकता है. इसलिए बारिश के दिनों में तेज बुखार आने पर तुरंत इसके लक्षण पहचानें और डॉक्टर से चेकअप जरूर कराएं.
क्या होता है रैट फीवर?
रैट फीवर (Rat Fever) को साइंटिस्ट भाषा में लेप्टोस्पायरोसिस कहा जाता है. यह एक बैक्टीरियल बीमारी है, जो Leptospira नामक बैक्टीरिया के कारण फैलती है. यह बीमारी जानवरों (जैसे चूहों, कुत्ते, सूअर, गाय) के पैशाब से फैलती है. वहीं गौरतलब है बारिश के मौसम में वॉटर ओवरफ्लो हो जाता है जिसके कारण चारों तरफ बैक्टीरिया, फंगस और फंफूदी फैलना का खतरा होता है. वहीं बैक्टीरियल बीमारियों के तेजी से फेलने का खतरा होता है. इसलिए बारिश के दिनों में रैट फीवर बढ़ जाता है.
कैसे फैलता है रैट फीवर?
बारिश के दिनों में रैट फीवर फैलने का खतरा ज्यादा रहता है. जगह-जगह दूषित पानी रहता है. वहीं लगातार बारिश और बाढ़ के कारण चूहों और जानवरों का पेशाब, गंदगी इधर से उधर फैल जाती है. पानी में मिल जाती है. वहीं वॉटर ओवर फलो
में लोग नंगे पैर चलते हैं या फिर गंदे पानी में उतर जाते हैं. ऐसे में उनके शरीर पर कट, खरोंच या घाव होता है, तो Leptospira बैक्टीरिया आसानी से शरीर में प्रवेश कर सकता है, जो रैट फीवर का कारण बनता है.
रैट फीवर के लक्षण
रैट फीवर को सामान्य समझकर नजरअंदाज ना करें. ये खतरनाक हो सकता है. समय रहते पहचानें इसके लक्षण. रैट फीवर होने के लक्षण होते हैं, तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द (खासकर पिंडलियों में), कमजोरी, मतली या उल्टी, आंखों का लाल होना और शरीर में दर्द शामिल हैं. एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर समय रहते ना पहचाना जाए तो ये पीलिया में बदल सकता है. किडनी, लिवर तक पर गंभीर असर डाल सकता है. ऐसे में सांस लेने में तकलीफ, फेफड़ों से खून आना और मेनिन्जाइटिस जैसी समस्याएं हो सकती है. ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
रैट फीवर से बचाव कैसे करें?
- बारिस के दिनों में रैट फीवर से बचने के लिए आपको जलभराव वाले एरिया में जाने से बचना चाहिए.
- खासतौर पर नंगे पैर जाने से बचना चाहिए.
- अगर ऐसे पानी में जाना जरूरी हो तो वाटरप्रूफ जूते और दस्ताने पहनें.
- शरीर पर कट या घाव हो तो उसे अच्छी तरह ढककर रखें.
- हाथों को साबुन से धोएं, साफ और सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करें.
- घर और आसपास चूहों की संख्या कम रखने के लिए साफ-सफाई बनाए रखें.
- तेज बुखार या अन्य लक्षण दिखने पर खुद दवा लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं.
- समय पर इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है.
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FAQs
सवाल: रैट फीवर क्या है?
जवाब: रैट फीवर (लेप्टोस्पायरोसिस) एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो संक्रमित चूहों या अन्य जानवरों के पेशाब से फैलता है.
सवाल:रैट फीवर के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
जवाब: तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, आंखों का लाल होना, कमजोरी, मतली और उल्टी इसके सामान्य लक्षण हैं.
सवाल: रैट फीवर से बचाव कैसे करें?
जवाब: बारिश में गंदे पानी से बचें, नंगे पैर न चलें, घाव को ढककर रखें, साफ-सफाई बनाए रखें और लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

