होमWellnessHome Remediesबारिश में हो सकता है रैट फीवर! ये सावधानियां आएंगी काम

बारिश में हो सकता है रैट फीवर! ये सावधानियां आएंगी काम

Rat fever symptoms: देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर शुरू हो चुका है. कहीं रूक-रूक कर बारिश आ रही है तो कहीं लगातार बारिश हो रही है.

Rat fever symptoms: देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर शुरू हो चुका है. कहीं रूक-रूक कर बारिश आ रही है तो कहीं लगातार बारिश हो रही है. ऐसे में पल-पल बदलता मौसम सेहत पर खास प्रभाव डालता है. ये सेहत पर कई तरह से असर करता है. ऐसा मौसम खासतौर पर कमजोर इम्यूनिटी वालों पर असर डालता है. उन्हें गले में खराश और बुखार जैसी समस्याएं बढ़ जाती है.

वहीं इन दिनों में खासतौर पर कहा जाता है कि रैट बुखार जैसी समस्या भी देखने को मिलती है. आज के आर्टिकल में हम जानेंगे कि क्या होता है रैट फीवर? इससे कैसे बचा जाएं? एक्सपर्ट कहते हैं कि रैट फीवर का समय पर इलाज नहीं करनवाने से यह जानलेवा साबित हो सकता है. इसलिए बारिश के दिनों में तेज बुखार आने पर तुरंत इसके लक्षण पहचानें और डॉक्टर से चेकअप जरूर कराएं.

क्या होता है रैट फीवर?

रैट फीवर (Rat Fever) को साइंटिस्ट भाषा में लेप्टोस्पायरोसिस कहा जाता है. यह एक बैक्टीरियल बीमारी है, जो Leptospira नामक बैक्टीरिया के कारण फैलती है. यह बीमारी जानवरों (जैसे चूहों, कुत्ते, सूअर, गाय) के पैशाब से फैलती है. वहीं गौरतलब है बारिश के मौसम में वॉटर ओवरफ्लो हो जाता है जिसके कारण चारों तरफ बैक्टीरिया, फंगस और फंफूदी फैलना का खतरा होता है. वहीं बैक्टीरियल बीमारियों के तेजी से फेलने का खतरा होता है. इसलिए बारिश के दिनों में रैट फीवर बढ़ जाता है.

कैसे फैलता है रैट फीवर?

बारिश के दिनों में रैट फीवर फैलने का खतरा ज्यादा रहता है. जगह-जगह दूषित पानी रहता है. वहीं लगातार बारिश और बाढ़ के कारण चूहों और जानवरों का पेशाब, गंदगी इधर से उधर फैल जाती है. पानी में मिल जाती है. वहीं वॉटर ओवर फलो
में लोग नंगे पैर चलते हैं या फिर गंदे पानी में उतर जाते हैं. ऐसे में उनके शरीर पर कट, खरोंच या घाव होता है, तो Leptospira बैक्टीरिया आसानी से शरीर में प्रवेश कर सकता है, जो रैट फीवर का कारण बनता है.

रैट फीवर के लक्षण

रैट फीवर को सामान्य समझकर नजरअंदाज ना करें. ये खतरनाक हो सकता है. समय रहते पहचानें इसके लक्षण. रैट फीवर होने के लक्षण होते हैं, तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द (खासकर पिंडलियों में), कमजोरी, मतली या उल्टी, आंखों का लाल होना और शरीर में दर्द शामिल हैं. एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर समय रहते ना पहचाना जाए तो ये पीलिया में बदल सकता है. किडनी, लिवर तक पर गंभीर असर डाल सकता है. ऐसे में सांस लेने में तकलीफ, फेफड़ों से खून आना और मेनिन्जाइटिस जैसी समस्याएं हो सकती है. ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

रैट फीवर से बचाव कैसे करें?

  • बारिस के दिनों में रैट फीवर से बचने के लिए आपको जलभराव वाले एरिया में जाने से बचना चाहिए.
  • खासतौर पर नंगे पैर जाने से बचना चाहिए.
  • अगर ऐसे पानी में जाना जरूरी हो तो वाटरप्रूफ जूते और दस्ताने पहनें.
  • शरीर पर कट या घाव हो तो उसे अच्छी तरह ढककर रखें.
  • हाथों को साबुन से धोएं, साफ और सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करें.
  • घर और आसपास चूहों की संख्या कम रखने के लिए साफ-सफाई बनाए रखें.
  • तेज बुखार या अन्य लक्षण दिखने पर खुद दवा लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं.
  • समय पर इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है.

यह भी पढ़ें: मानसून में kitchen की सफाई जरूरी, अपनाएं ये टिप्स

FAQs

सवाल: रैट फीवर क्या है?

जवाब: रैट फीवर (लेप्टोस्पायरोसिस) एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो संक्रमित चूहों या अन्य जानवरों के पेशाब से फैलता है.

सवाल:रैट फीवर के प्रमुख लक्षण क्या हैं?

जवाब: तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, आंखों का लाल होना, कमजोरी, मतली और उल्टी इसके सामान्य लक्षण हैं.

सवाल: रैट फीवर से बचाव कैसे करें?

जवाब: बारिश में गंदे पानी से बचें, नंगे पैर न चलें, घाव को ढककर रखें, साफ-सफाई बनाए रखें और लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

author avatar
Surbhi . Content Writer
लिखने-पढ़ते लिखने की रूचि पैदा हुई. पिछले 1 साल से मीडिया इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं. फिलहाल फिट रहे इंडिया के साथ बतौर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. इससे पहले जनता टीवी में सोशल मीडिया डिपार्टमेंट में काम किया. उन्हें लाइफस्टाइल, फूड, हेल्थ से जुड़े विषय में लिखने-पढ़ने और नई चीजें जानने का खूब शौक है.
Surbhi .
Surbhi .
लिखने-पढ़ते लिखने की रूचि पैदा हुई. पिछले 1 साल से मीडिया इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं. फिलहाल फिट रहे इंडिया के साथ बतौर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. इससे पहले जनता टीवी में सोशल मीडिया डिपार्टमेंट में काम किया. उन्हें लाइफस्टाइल, फूड, हेल्थ से जुड़े विषय में लिखने-पढ़ने और नई चीजें जानने का खूब शौक है.
RELATED ARTICLES

बरसात के मौसम में शरीर में दर्द क्यों होता है? कम करने के 5 टिप्स

5 Tips to Reduce Body Pain and Stiffness During the Monsoon: कई लोगों को बारिश के दिनों में शरीर में अकड़न-जकड़न की समस्या रहती है.

Cancer Survivors: मेंटल हेल्थ कम करने में मदद करेगा स्मार्टफोन, नई स्टडी के दावे

Digital Mental Health Treatment: जब कई मरीजों तक समय पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं नहीं पहुंच पाती तो यह गंभीर स्थिति बन सकती है.

ग्लोइंग स्किन के लिए सिर्फ 2 मिनट ही काफी, ऐसे करें स्किन केयर

Glowing Skin hacks: चेहरा धोना के बाद 2 मिनट अगर आप सही तरीके से स्किन केयर करते हैं तो आप ग्लोइंग स्किन बरकरार रख सकते हैं.

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Most Popular

बुखार में नहाना चाहिए या नहीं? जानें क्या कहते हैं Expert

Bukhar Mein Nahana Chahiye Ya Nahi: क्या बुखार में नहाने से बुखार बढ़ जाता है? जानें डॉक्टरों की सलाह, कब गुनगुने पानी से नहाना सुरक्षित है और किन परिस्थितियों में नहाना टाल देना चाहिए.

खाना नहीं खा पा रही एक्टर दीपिका कक्कड़, जानें हेल्थ अपडेट, देखा पूरा वीडियो

Sehat Ki Khabar Fit Rahe India: सेहत की खबर फिट रहे इंडिया में हम जानेंगे आज की तीन बड़ी खबरों के बारे में.

घर-मंदिरो में जलने वाली धूपबत्ती से हो सकता है Air Pollution! Dr. Arvind Kumar से जानें

Lung Health Expert: दिल्ली छोड़ देने से प्रदूषण से बचा जा सकता है? पहाड़ी इलाकों की हवा भी अब पहले जैसी शुद्ध नहीं रही? डॉ. ने कई मिथकों का खुलासा किया.

बरसात के मौसम में शरीर में दर्द क्यों होता है? कम करने के 5 टिप्स

5 Tips to Reduce Body Pain and Stiffness During the Monsoon: कई लोगों को बारिश के दिनों में शरीर में अकड़न-जकड़न की समस्या रहती है.

Recent Comments