Side Effect Of Power Nap: अक्सर घर की महिलाएं, बच्चों के स्कूल की तैयारी करवाने से लेकर पति के ऑफिस का लंच बनाने तक के लिए सुबह जल्दी उठ जाती हैं. उसके बाद वह महिलाएं फटाफट घर के अन्य काम भी निपटा लेती हैं. सुबह-सुबह जल्दी उठने से अक्सर शरीर में थकान हो जाती है. जिसके बाद वह महिलाएं दोपहर का समय अपनी थकान उतारने के लिए सोती हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि दोपहर के समय सोना कितना खतरनाक हो सकता है या कितने देर सोने से हेल्थ पर बुरा असर नहीं पड़ता?
दरअसल दोपहर के समय थोड़ी देर की नींद फायदेमंद भी हो सकती है और नुकसानदायक भी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि कोई व्यक्ति कितनी देर और किस समय सोते हैं. वहीं दोपहर की नींद का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा भी नहीं होता. यह इस बात पर डिपेंड करता है कि कोई व्यक्ति रात में कितनी देर तक सो रहा है, या फिर वह दिनभर कितनी शारीरिक या मानसिक मेहनत करता है. इसका सीधा संबंध शरीर की एनर्जी, काम करने की क्षमता मूड और रात की नींद से जुड़ा होता है।
दोपहर के समय सोना कितना फायदेमंद
बता दें कि एक्सपर्ट के अनुसार दोपहर में सोना हर व्यक्ति के हिसाब से अलग होता है। जैसे वह व्यक्ति रात में कितना सो रहा हैं, यानि अगर उसकी रात की नींद पूरी नहीं हुई तो वह उस नींद को पूरी करने के लिए दिन में अगर थकान महसूस करें तो वह दोपहर के समय थोड़ी नींद ले सकता है। हां, लेकिन ज्यादा देर तक या घंटों तक सोना वो भी खासकर दोपहर के समय वह नुकसानदायक हो सकता है।
कितनी नींद लेना होगा फायदेमंद
अगर किसी व्यक्ति ने रात को अपनी नींद पूरी नहीं की है तो वह दोपहर के समय में 20 से 30 मिनट की छोटी नींद ले सकता है, यह नींद दिमाग को आराम देगी और व्यक्ति को फिर से एनर्जेटिक महसूस कराएगी। वहीं अगर इतनी देर तक सोने से भी नींद पूरी नहीं होती तो 45 मिनट तक का आराम भी किया जा सकता है।
लेकिन ध्यान रहे कि अगर यह नींद घंटों में बदल जाती है तो वह नुकसानदायक मानी जाती है। जैसे कई लोग अक्सर दोपहर के समय थकान उतारने के लिए सो जाते हैं लेकिन वह अक्सर घंटों-घंटों तक सोते रहते हैं, इस प्रकार की नींद यानि 45 मिनट के उपर की नींद सेहत पर बुरा असर डाल सकती है। व्यक्ति को एक घंटे या 45 मिनट से ज्यादा देर नहीं सोना चाहिए।
क्या होगा ज्यादा देर सोने से?
अगर वयक्ति दिन में ज्यादा देर सो जाता है यानि अगर कोई व्यक्ति दिन में 45 मिनट से ज्यादा समय तक सोता है तो उसे सेहत से जुड़ी समस्याएं झेलनी पड़ सकती हैं। एक्सपर्ट के अनुसार ज्यादा देर तक सोने से व्यक्ति को भारीपन, सुस्ती और सिरदर्द जैसी परेशानिनयां परेशान कर सकती हैं। वहीं इससे अपकी बायोलॉजिकल क्लॉक भी बिगड़ सकता है। इससे दोपहर में ज्यादा देर सोने से अच्छा है कि आप जरूरत की नींद ही लें।
क्यों हो सकता है दोपहर में सोना खतरनाक?
दरअसल एक्सपर्ट की मानें तो दोपहर के समय सोने से आपकी बायोलॉजिकल क्लॉक बिगड़ सकती है. बता दें कि हमारा शरीर एक बायोलॉजिकल क्लॉक पर काम करता है. इसे जैविक घड़ी भी कहा जाता है। हमारी 24 घंटे की जैविक घड़ी मूल शारीरिक और व्यावहारिक कार्यों को नियंत्रित करती है.
एक्सपर्ट की मानें तो आपको दोपहर का समय सिर्फ थकान उतारने के लिए सोना चाहिए। क्योंकि लंबी देर की नींद न केवल आपके बायोलॉजिकल क्लॉक पर असर होगा बल्कि आपके स्वास्थ्य पर भी इसका असर दिखाई देगा। दिन के समय ज्यादा देर तक सोने से आपके पूरे दिन की दिनचर्या पर असर होगा। क्योंकि लंबे समय तक सो लेने के बाद रात में नींद आने में दिक्कत हो सकती है. वहीं ज्यादा देर सोने के बाद उठते समय शरीर भारी लग सकता है और दिमाग पूरी तरह एक्टिव होने में समय ले सकता है. कई लोगों को आलस, सुस्ती और काम में मन न लगने की समस्या भी होने लगती है. अगर यह आदत रोज की बन जाए, तो शारीरिक एक्टिवनेस कम हो सकती है. ऐसे में दोपहर में थोड़ा आराम करें, लेकिन ज्यादा देर तक न सोएं, ताकि शरीर का संतुलन बना रहे.
अच्छी क्वालिटी वाली नींद कैसे लें?
अच्छी क्वालिटी की नींद के लिए रोज सोने और उठने का समय लगभग एक जैसा रखें. रात में सोने से पहले मोबाइल, टीवी और ज्यादा तेज रोशनी से दूरी बनाएं. हल्का भोजन करें और बहुत देर रात तक जागने से बचें. सोने का कमरा शांत, साफ और आरामदायक होना चाहिए. दिनभर थोड़ी शारीरिक एक्टिविटी करने से भी नींद बेहतर आती है.
अगर दोपहर में सोना हो, तो बहुत ज्यादा देर न सोएं. चाय, कॉफी या भारी भोजन का सेवन रात के समय कम करना भी मददगार हो सकता है. रोज की सही आदतें अच्छी नींद के लिए बहुत जरूरी मानी जाती हैं.
(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


