What is a gastro diet: एक समय ऐसा आते है जब आंतों की कार्यक्षमता कमजोर पड़ने लगती है. ऐसे में खाना पचने में कई तरह की दिक्कते आती है. यही वजह है कि पेट में भारीपन, गैस, एसिडिटी और खट्टी डकारे आने लगती है. ऐसे में व्यक्ति सही तरीके से कुछ खा भी नहीं पाता. इसे अपच की समस्या भी कहा जाता है. ये समस्याएं बढ़ती उम्र में ज्यादा देखने को मिलती है. इसलिए बढ़ती उम्र में डाइट का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है.
उम्र बढ़ने खासतौर पर 40 उम्र के बाद आंतों की कार्यक्षमता कमजोर होने लगती है. आंतें पहले की तरह ठीक से काम नहीं कर पातीं. इसका पूरा असर डाइजेस्टिव सिस्टम पर पड़ता है. वहीं कई लोग ऐसी बहुत सी दवाई का सेवन करने लगते हैं जिस कारण उनका खाना सही से डाइजेस्ट हो जाए. लेकिन अगर वह अपनी डाइट में कुछ खास प्रकार का ध्यान रखेंगे तो इस समस्या से काफी हद तक बचे रहेंगे. इसलिए कहा भी जाता है कि बढ़ती उम्र में डाइट का खास तौर पर ध्यान रखने की जरूरत होती है.
बढ़ती उम्र में क्या-क्या खाना चाहिए?
हमारे डाइजेस्टिव सिस्टम के लिए फाइबर युक्त चीज़ें सपोर्ट करती है. इसलिए अपनी डाइट में फाइबर युक्त भोजन को शामिल करें. साबुत अनाज, दाल, हरी सब्जियां और मौसमी फल को शामिल करना ना भूलें. इनके साथ ही आपको अपनी डाइट में हल्के और सुपाच्य भोजन शामिल करने चाहिए जो आसानी से पच जाएं. जैसे, दलिया, खिचड़ी और सूप आदि.
वहीं बढ़ती उम्र में प्रोबायोटिक फूड्स भी शामिल करने चाहिए. इनमें अच्छे बैक्टीरिया पाए जाते हैं. बढ़ती उम्र में पाचन तंत्र कमजोर होने लगता है और आंतों में अच्छे बैक्टीरिया कम होने लगते हैं. इसलिए प्रोबायोटिक्स फूड्स शामिल करें. जैसे, दही, छाछ, इडली-डोसा इनमें गुड बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो डाइजेस्टिव सिस्टम को सपोर्ट करते हैं. एक्सपर्ट कहते हैं कि प्रोबायोटिक्स पाचन सुधारने, रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाने और हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करते हैं. डाइट के अलावा रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन भी करते रहें.
इन चीजों से बचें
बढ़ती उम्र में तेल-भुना, मसालेदार और प्रोसेस्ड खाना खाने से बचें. इस तरह का खाना आंतों को कमजोर करता है, वहीं डाइजेस्टिव सिस्टम पर भार डालता है. जैसे, समोसा, पकोड़े, भटूरे, फ्रेंच फ्राइज़, जंक फूड और स्ट्रीट फूड से खास तौर पर दूरी बनाकर रखें. साथ ही तीखी लाल मिर्च, भारी मसाले (गरम मसाला) से बनी सब्जियां का सेवन ना करें. वहीं नूडल्स, बिस्कुट, रेडी-टू-ईट सूप, फ्रोजन मीट, और डिब्बाबंद फलों और खानों से भी दूरी बनाकर रखनी चाहिए. इस तरह के खानों में ट्रांस फैट पाया जाता है. जरूरत से ज्यादा नमक होता है, जो ब्लड प्रेशर बढ़ाने और डाइजेस्टिव सिस्टम पर भार डालने का काम करता है. इनके सेवन से डाइजेस्टिव सिस्टम सही तरीके से खाना पचा नहीं पाता.
पेट को कभी बूढ़ा नहीं होने देगी ये डाइट
दरअसल 40 साल के बाद पाचन शक्ति कमजोर होने लगती है. पेट की अंदरूनी परत जिसे गट लाइनिंग कहा जाता है, जब यह परत मजबूत रहती है, तो भोजन अच्छे से पचता है, पोषक तत्व आसानी से शरीर में पहुंचते हैं और पेट में सूजन, जलन या संक्रमण होने का खतरा कम रहता है. इसलिए डाइट में ऐसे फूड्स शामिल करने चाहिए जो पेट पर एक्सट्रा भार ना डालें.
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FAQs
सवाल: 40 की उम्र के बाद पाचन से जुड़ी सबसे आम समस्या क्या होती है?
जवाब: उम्र बढ़ने के साथ पाचन शक्ति कमजोर होने लगती है, जिससे गैस, कब्ज, अपच और पेट फूलने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं.
सवाल: गैस्ट्रो डाइट क्या है?
जवाब: गैस्ट्रो डाइट ऐसी डाइट है जिसमें फाइबर, प्रोबायोटिक्स, प्रीबायोटिक्स और पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं, जो आंतों और पेट की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं.
सवाल: 40 के बाद पेट को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
जवाब: संतुलित आहार लें, पर्याप्त पानी पिएं, नियमित व्यायाम करें, प्रोसेस्ड फूड कम खाएं और पर्याप्त नींद लें, ताकि पाचन तंत्र लंबे समय तक स्वस्थ रहे.
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