होमExplainersगाड़ी चलाते-चलाते सो गया.. जानें क्यों और किस कंडिशन में होता है...

गाड़ी चलाते-चलाते सो गया.. जानें क्यों और किस कंडिशन में होता है ऐसा

What Is Narcolepsy: अगर किसी व्यक्ति को बात करते-करते, काम करते-करते या गाड़ी चलाते समय अचानक नींद आ जाए तो इसे सामान्य थकान न समझें. यह Narcolepsy नाम के न्यूरोलॉजिकल स्लीप डिसऑर्डर का संकेत हो सकता है.

What Is Narcolepsy: फर्ज कीजिए कि आपसे कोई व्यक्ति बात कर रहा है और वो बात करते-करते सो जाए. या फिर कार चला रहा है, और कार चलाते-चलाते सो जाए तो? बेशक आप घबरा जाएंगे. सबसे पहला सवाल आएगा कि सामने वाला व्यक्ति बेहोश हो गया है. लेकिन आपको पता चले कि वो बेहोश नहीं सो गया है, तो जरूर गुस्सा आएगा. लेकिन ऐसा उस व्यक्ति के साथ एक बीमारी के कारण हो रहा है.

इस बीमारी को कहा जाता है नार्कोलेप्सी. इसके दो प्रकार होते हैं. पहला टाइप-1 जिसमें व्यक्ति अपनी मसल्स पर कंट्रोल खोता है और उसको टेंप्रेरी नुकसान ही होता है. इसे कैटाप्लेक्सी कहा जाता है. यानी जब बीमारी नॉर्मल है तब तक इसे कैटाप्लेक्सी ही कहा जाता है. लेकिन जब मामला गंभीर हो जाता है और व्यक्ति को नुकसान पहुंचने लगे और ये टाइप-2 अपने दूसरे प्रकार में चले जाए तो इसे कहा जाता है नार्कोप्लेसी. आज इसी के बारे में बात करेंगे क्या है ये डिसऑर्डर? कितना इससे नुकसान पहुंच सकता है डिटेल में जानेंगे.

कहीं भी सो सकते हैं व्यक्ति

ऐसे लोग जो नार्कोलेप्सी का शिकार होते हैं वो कहीं भी सो सकते हैं. कहीं भी मतलब कहीं भी फिर चाहे वो आपसे बात कर रहा हो, गाड़ी चला रहा हो या कोई भी काम कर रहा हो तो वो सो सकता है. क्योंकि उन्हें नींद के अटैक आते हैं, और ये एक बीमारी है जिसे चाहकर भी नहीं रोका जा सकता है. इसपर डॉक्टर्स का कहवा है कि ये एक न्यूरोलॉजिकल स्लीप डिसऑर्डर है. यानी इस कंडिशन में व्यक्ति का दिमाग ये नहीं समझ पा रहा है कि व्यक्ति को कब सोना चाहिए और कब जागना चाहिए, ये तय नहीं हो पाता है.

क्या है इसका कारण?

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इसका सबसे बड़ा कारण यही है कि व्यक्ति के माइंड में ओरेक्सिन नाम के कैमिकल की कमी हो गई है. ये एक ऐसे तरह के कैमिकल है जो हमें जगाए रखने में मदद करते हैं. अगर इसकी कमी हो जाती है तो दिमाग सही तरीके से काम नहीं कर पाता और ये बॉडी को ये नहीं बता पाता कि अभी जागना है या फिर सोना है. अब आप सोच रहे होंगे कि ये कैमिकल क्यों खत्म हो जाता है? तो फिलहाल इसके जवाब की खोज चल रही है. लेकिन इसे ऑटोइम्यून डिसऑर्डर से जुड़ी बीमारी माना जाता है.

नार्कोलेप्सी के क्या लक्षण होते हैं?

अब इनके लक्षणों की अगर बात करें तो मुख्य तौर पर चार लक्षण होते हैं. पहला दिन में बहुत अधिक नींद आती है. पीड़ित व्यक्ति बार-बार झपकियां लेने लगता है. नींद आती रहती है, इस नींद पर कंट्रोल नहीं होता जिससे की डेली रूटीन काफी अफेक्ट होती है. दूसरे में व्यक्ति मसल्स में कंट्रोल खो देता है. कमजोरी कुछ सेकंड या फिर एक मिनट तक रह सकती है किसी अटैक की तरह. एकदम से बहुत हंसी आना, मजाक की बात पर इमोशनल हो जाता है. ये दूसरा लक्षण है जिसे कैटैप्लेक्सी ट्रिगर हो सकती है.

तीसरा लक्षण है कि सोते समय में या फिर जागते समय सपना और हकीकत के बीच जैसा अनुभव होना. कई मामलों में ऐसा लगेगा कि अभी मेरे साथ जो हुआ वो सपना था या फिर असल में घटा. आपको लगेगा कि दरवाजे की घंटी बजी कोई आया है. लेकिन बाहर कोई नहीं होगा. हालांकि ऐसा सबके साथ कभी न कभी होता है. लेकिन बार-बार हो रहा है तो ये नार्कोलेप्सी हो सकता है. चौथा और आखिरी लक्षण है कि व्यक्ति कुछ समय के लिए अपने आपको पैरालाइज महसूस करने लगता है. अचानक घुटन महसूस होने लगती है. यहां तक वो हिल नहीं पाता है. सिर्फ एक या दो मिनट आपको पैरालिसिस का एहसास हो सकता है. लेकिन कुछ समय बाद व्यक्ति को होश आ जाता है. ये कंडिशन स्लीप पैरालिसिस कहा जाता है. बार-बार हो तो इसे नार्कोलेप्सी कहा जाता है.

यह भी पढ़ें: बार-बार पेशाब आना हो सकता है प्रोस्टेट की बीमारी का संकेत! यूरोलॉजिस्ट ने बताए चेतावनी वाले लक्षण

(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं.)

author avatar
sarthak arora Senior Sub Editor
अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
sarthak arora
sarthak arora
अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
RELATED ARTICLES

खांसी हो रही है तो कब पीना चाहिए कफ सिरप? जानें कब पड़ती है दवा की जरूरत

Khansi Mein Cough Syrup Kab Peena Chahiye: : खांसी शुरू होते ही कफ सिरप पीना सही है या नहीं? जानें सूखी और बलगम वाली खांसी में क्या फर्क है, कब दवा लेनी चाहिए और किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से मिलना जरूरी है.

Baby Teething Symptoms: दांत निकलते समय बच्चा क्यों रोता है? जानें चिड़चिड़ापन कम करने के आसान और सुरक्षित उपाय

Baby Teething Symptoms: जानें दांत निकलते समय बच्चे क्यों रोते और चिड़चिड़े हो जाते हैं. एक्सपर्ट्स के बताए सुरक्षित उपाय और देखभाल के आसान टिप्स.

World IVF Day 2026: कब कराना चाहिए IVF? जानिए किसे होती है जरूरत, सफलता किन बातों पर करती है निर्भर

World IVF Day 2026: IVF क्या है, किन लोगों को इसकी जरूरत पड़ती है, कब फर्टिलिटी एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए और सफलता किन बातों पर निर्भर करती है, जानिए.

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Most Popular

क्या होता है यूरिक एसिड? जानें बढ़ जाए तो कैसे कर सकते हैं कंट्रोल

High Uric Acid Symptoms: यूरिक एसिड क्या होता है, क्यों बढ़ता है, इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं और इसे कैसे कंट्रोल करें? जानिए डाइट, वजन और लाइफस्टाइल से जुड़े जरूरी उपाय.

ऐसे बनाएं रिच प्रोटीन ब्रेकफास्ट, मिनटों में होगा तैयार

High Protein Breakfast: सुबह का नाश्ता पूरे दिन की एनर्जी का काम करता है. इसलिए गलती से भी सुबह का नाश्ता स्किप नहीं होना चाहिए.

खांसी हो रही है तो कब पीना चाहिए कफ सिरप? जानें कब पड़ती है दवा की जरूरत

Khansi Mein Cough Syrup Kab Peena Chahiye: : खांसी शुरू होते ही कफ सिरप पीना सही है या नहीं? जानें सूखी और बलगम वाली खांसी में क्या फर्क है, कब दवा लेनी चाहिए और किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से मिलना जरूरी है.

जमीन पर बन रही थी सोया चाप, वायरल वीडियो के बाद मचा हड़कंप!

Soya Chaap Viral Video: सोया चाप बनाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें हाइजीन को लेकर सवाल उठे हैं. जानें क्या है पूरा मामला, फूड सेफ्टी विभाग ने क्या कार्रवाई की और किन बातों का रखें ध्यान.

Recent Comments