WHO Shake the Salt Habit: विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने खाने में नमक के सेवन को लेकर एक नई गाइडलाइंस जारी की है. इस गाइडलाइंस में जानकारी दी गई है कि आखिर एक व्यक्ति कितना अधिक नमक का सेवन कर रहा है. जिसके कारण दिल और किडनी पर काफी असर पड़ रहा है. क्योंकि ये हमारे दिल और किडनी पर काफी अफेक्ट करता है.
अब इसपर रोकथाम के लिए WHO ने Shake The Salt Habit नाम का प्लान बनाया है. इस प्लान की मदद से लोगों को नमक के सेवन से होने वाली बीमारियों से काफी हद तक बचाया जा सकेगा. आइए डिटेल में जान लेते हैं कि आखिर क्या इस गाइडलाइंस में जानकारी दी गई है. इसपर WHO की न्यूट्रिशन एंड फूड सेफ्टी की डायरेक्टर डॉक्टकर Luz Maria De Regil ने बताया है कि अधिक नमक के सेवन से हर साल लगभग 17 लाख लोगों की मौत हो रही है.
क्या है SHAKE प्लान
WHO के इस शेक प्लान का मतलब क्या है तो बता दें कि इसमें S का अर्थ है सर्विलांस, H का अर्थ है Harness Industry, A का अर्थ है Adoption of Standards, K का अर्थ है Knowledge, E का अर्थ है Environment. इस प्लान की मदद से सर्विलांस यानी सरकारों को निर्देश दिया गया है कि ये चेक किया जाए कि आखिर कितनी मात्रा में नमक का सेवन कर रहे हैं. साथ ही किन चीजों में कितनी मात्रा में नमक डाला जा रहा है.
इसी तरह हार्नेस इंडस्ट्री में बिस्किट, चिप्स, ब्रेड और सॉस बनाने वाली कंपनियों के लिए निर्देश दिए गए हैं, कि अपने प्रॉडक्ट्स में नमक की मात्रा को कम किया जाए. A Adoption of Standards का अर्थ है कि मार्केट में बिकने वाले पैकेट वाले सामान में ये लिखा जाए तो कितना सोडियम है. जिसकी मदद से ग्राहक अपनी समझदारी के साथ उसका चुनाव कर सके. K यानी नॉलेज का अर्थ है कि आम जनता के बीच जाग्रुकता फैलाना. ये बताना कि अधिक नमक के सेवन से आप सिर्फ हाई बीपी का ही नहीं शिकार हो रहे बल्कि ये मौत का भी कारण बन सकता है. इसी तरह E यानी एनवॉयरोमेंट यानी पर्यावरण सभी स्कूल, अस्पताल और सरकारी कैंटीन में कम नमक वाला खाना अनिवार्य हो.
2013 में रखा गया था लक्ष्य
ऐसा नहीं है कि इससे पहले इस तरह की गाइडलाइंस जारी नहीं की गई. बस फर्क इतना है कि सख्ती उतनी नहीं थी. क्योंकि पुरानी गाइडलाइंस में नमक कम करने के साथ-साथ पोटैशियम वाले खाने को बढ़ाने की भी सलाह दी गई थी. जिसकी मदद से ब्लड प्रेशर को कंट्रोल आसानी से किया जा सके. वहीं 2013 में दुनियाभर में कई देशों ने साथ मिलकर ये लक्ष्य तय किया था कि 2025 तक नमक के इस्तेमाल को 30 प्रतिशत तक की कमी लाई जाए. हालांकि उस दौरान सिर्फ लोगों को ऐसी सलाह दी जाती थी कि नमक का खुद से कम सेवन करें. यानी कंपनियों के लिए ऐसे निर्देश नहीं थे. लेकिन अब इस नई गाइडलाइंस में सिर्फ लोगों को ही नहीं बल्कि फूड इंडस्ट्री और कंपनियों को भी टारगेट किया गया है.
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