Women Health After 35: महिलाओं की जिंदगी में एक समय ऐसा आता है जब शरीर धीरे-धीरे हार्मोनल बदलावों से गुजरना शुरू करता है. इस दौर को Perimenopause और बाद में Menopause कहा जाता है. यह कोई बीमारी नहीं है, बल्कि महिलाओं की बॉडी का एक नेचुरल फेज है। हालांकि, इस दौरान शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर असर पड़ सकता है. कई महिलाएं इसे सामान्य थकान, तनाव या उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जबकि शरीर काफी पहले से संकेत देना शुरू कर देता है.
जब किसी महिला को लगातार 12 महीनों तक पीरियड्स नहीं आते, तब उसे Menopause कहा जाता है. इससे पहले का समय Perimenopause कहलाता है, जो 4 से 10 साल तक चल सकता है. आमतौर पर Menopause की उम्र 46 से 55 साल के बीच मानी जाती है, लेकिन आजकल कई महिलाओं में यह बदलाव 35-40 की उम्र में भी दिखाई देने लगा है. इस दौरान शरीर में Estrogen और Progesterone हार्मोन कम होने लगते हैं, जिसकी वजह से कई तरह के बदलाव महसूस हो सकते हैं.
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शरीर पहले ही देने लगता है संकेत
Perimenopause के दौरान पीरियड्स अनियमित होने लगते हैं. किसी महिला के पीरियड्स जल्दी आने लगते हैं, किसी के देरी से आते हैं, तो किसी में ब्लीडिंग ज्यादा या कम हो सकती है. इसके अलावा जल्दी थकान होना, बार-बार मूड बदलना, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा या रोना आना, नींद पूरी न होना, चीजें भूलने लगना और लगातार कमजोरी महसूस होना भी आम लक्षण हैं. कई महिलाओं को ऐसा लगता है कि वे पहले जैसा काम करने के बाद भी ज्यादा थक जाती हैं.
Menopause में वजन तेजी से क्यों बढ़ता है?
35-40 के बाद शरीर का मेटाबॉलिज्म धीरे होने लगता है. साथ ही शरीर का Muscle Mass भी कम होने लगता है. हार्मोनल बदलावों की वजह से फैट खासतौर पर पेट के आसपास जमा होने लगता है. कई महिलाओं को लगता है कि वे पहले जितना ही खा रही हैं, फिर भी वजन बढ़ रहा है. दरअसल इस समय शरीर कैलोरी पहले जितनी तेजी से बर्न नहीं कर पाता. तनाव, खराब नींद और Emotional Eating भी Weight Gain को बढ़ा सकते हैं. एक स्टडी के मुताबिक Perimenopause के दौरान महिलाएं हर साल करीब 1.5 किलो तक वजन बढ़ा सकती हैं.
सिर्फ Walking नहीं, Strength Training भी जरूरी
डॉक्टर्स के मुताबिक इस उम्र में केवल वॉक करना काफी नहीं होता. Walking शरीर के लिए अच्छी है, लेकिन Muscle Preservation यानी मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने के लिए Strength Training बेहद जरूरी है. उम्र बढ़ने के साथ शरीर में मसल्स कम होने लगते हैं और यही वजह है कि आगे चलकर कमजोरी, हड्डियों में दर्द और Mobility की समस्या बढ़ सकती है. अगर महिलाएं 35 के बाद नियमित रूप से Strength Training शुरू करें, तो वे लंबे समय तक खुद को एक्टिव और फिट रख सकती हैं, हफ्ते में कम से कम तीन से चार दिन हल्की Weight Training, योग और नियमित शारीरिक गतिविधि बहुत मदद कर सकती है.
Diet का असर सबसे ज्यादा पड़ता है
इस दौर में डाइट को लेकर लापरवाही शरीर पर सीधा असर डालती है. ज्यादा शुगर, जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड और अत्यधिक चाय-कॉफी शरीर की समस्याएं बढ़ा सकते हैं. वहीं प्रोटीन, हरी सब्जियां, फल, मिलेट्स और फाइबर से भरपूर भोजन शरीर को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है. डॉक्टरों का कहना है कि महिलाओं को इस उम्र में अपनी डाइट को सिर्फ Weight Loss नहीं बल्कि Healthy Aging के नजरिए से देखना चाहिए.
हड्डियों और दिल की सेहत पर भी असर
Estrogen हार्मोन महिलाओं की हड्डियों और Heart Health को प्रोटेक्ट करता है. जब यह हार्मोन कम होने लगता है, तो हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और Heart Disease का खतरा भी बढ़ सकता है. यही वजह है कि Menopause के बाद Bone Density कम होने और Osteoporosis का रिस्क बढ़ जाता है। इसलिए Calcium, Vitamin D और सही Exercise बेहद जरूरी हो जाते हैं.
कौन-कौन से टेस्ट जरूरी हैं?
40 की उम्र के बाद महिलाओं को नियमित हेल्थ चेकअप जरूर करवाने चाहिए. डॉक्टरों के अनुसार हर साल ब्लड टेस्ट, थायरॉइड, शुगर, Vitamin D, Vitamin B12 और Lipid Profile जैसे टेस्ट जरूरी हैं. इसके अलावा Ultrasound, Mammography, Pap Smear और Bone Density Test भी समय-समय पर कराते रहना चाहिए ताकि किसी भी बीमारी का समय रहते पता चल सके.
Mental Health और Sleep भी प्रभावित होती है
हार्मोनल बदलावों का असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है. कई महिलाओं को Anxiety, Stress, Irritability और Depression जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं. नींद पूरी न होना भी बहुत कॉमन है. ऐसे समय में Exercise, Yoga, Pranayam और Screen Time कम करना काफी मदद कर सकता है. डॉक्टरों के अनुसार ज्यादा Sugar और लगातार मोबाइल स्क्रोलिंग भी मानसिक तनाव बढ़ा सकते हैं.
Early Menopause को हल्के में न लें
अगर किसी महिला को 35-40 की उम्र में Menopause शुरू हो जाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसे Early Menopause कहा जाता है और इसमें हड्डियों, दिल और शरीर की Overall Health पर ज्यादा असर पड़ सकता है. ऐसे मामलों में डॉक्टर Hormone Replacement Therapy यानी HRT की सलाह भी दे सकते हैं, लेकिन यह हर महिला के लिए अलग-अलग जरूरत और मेडिकल हिस्ट्री के हिसाब से तय किया जाता है.
सही Lifestyle से आसान हो सकता है यह दौर
Menopause महिलाओं की जिंदगी का एक स्वाभाविक पड़ाव है. अगर समय रहते शरीर के संकेतों को समझ लिया जाए और Lifestyle में जरूरी बदलाव कर लिए जाएं, तो यह समय काफी आसान बनाया जा सकता है. नियमित Exercise, अच्छी Diet, पर्याप्त नींद, समय पर टेस्ट और डॉक्टर की सलाह महिलाओं को लंबे समय तक स्वस्थ और एक्टिव बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाते हैं.
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