World Health Day 2026: हम अक्सर दिल को भावनाओं से जोड़कर देखते हैं. प्यार, दुख, खुशी लेकिन सच्चाई ये है कि दिल सबसे पहले एक ऐसा ऑर्गन है, जो हमारी पूरी जिंदगी को चलाए रखता है. इसी जरूरी विषय पर हमने एक खास पॉडकास्ट किया भारत के मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट Dr. Ashok Seth के साथ, जिनका 40 साल से ज्यादा का अनुभव है. इस बातचीत में उन्होंने बहुत ही आसान भाषा में बताया कि आखिर क्यों दिल की सेहत को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है और किन बातों को लेकर लोगों में सबसे ज्यादा गलतफहमियां हैं.
दिल हमारे शरीर का इंजन है, जो हर मिनट लगभग 5 लीटर खून पूरे शरीर में पहुंचाता है और दिनभर में करीब 1 लाख बार धड़कता है. सोचिए, एक ऐसा ऑर्गन जो बिना रुके लगातार काम करता है, उसका ख्याल रखना कितना जरूरी है.
कौन है डॉक्टर अशोक सेठ?
Dr. Ashok Seth भारत के सबसे प्रसिद्ध और अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञों (Cardiologists) में से एक हैं, जिनका नाम कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है. वे वर्तमान में Fortis Escorts Heart Institute, नई दिल्ली में Chairman of Cardiology के पद पर कार्यरत हैं और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी (angioplasty और stenting) में उनका योगदान वैश्विक स्तर पर माना जाता है.
डॉ. अशोक सेठ ने अपने करियर में 50,000 से ज्यादा एंजियोप्लास्टी प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक की हैं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है. उन्होंने भारत में कई आधुनिक हृदय उपचार तकनीकों को शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे लाखों मरीजों को बेहतर इलाज मिल सका। उनकी विशेषज्ञता खासतौर पर जटिल हार्ट ब्लॉकेज, स्टेंटिंग और मिनिमली इनवेसिव प्रक्रियाओं में मानी जाती है.
पद्म श्री अवॉर्ड से नवाजा गया
उनकी उपलब्धियों के लिए भारत सरकार ने उन्हें Padma Shri, Padma Bhushan और Padma Vibhushan जैसे देश के उच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया है. डॉ. सेठ न केवल एक कुशल डॉक्टर हैं, बल्कि वे स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के लिए भी सक्रिय रहते हैं और अक्सर लोगों को हार्ट हेल्थ, लाइफस्टाइल और समय पर जांच की अहमियत के बारे में जागरूक करते हैं. उनके अनुभव और ज्ञान की वजह से उन्हें भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के टॉप कार्डियोलॉजिस्ट्स में गिना जाता है.
हर लाइफ को बेसिक जानकारी जरूरी है
अगर दिल की धड़कन अचानक रुक जाए, जिसे कार्डियक अरेस्ट कहा जाता है, तो हमारे पास सिर्फ कुछ मिनट ही होते हैं. अगर उस समय सही कदम जैसे सीपीआर (चेस्ट कंप्रेशन) तुरंत शुरू कर दिए जाएं, तो किसी की जान बचाई जा सकती है. यही वजह है कि हर आम इंसान को बेसिक लाइफ सपोर्ट की जानकारी होना बेहद जरूरी है.
बहुत से लोग मानते हैं कि हार्ट अटैक का मतलब सिर्फ सीने में तेज दर्द होता है, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है. कई बार हार्ट अटैक के लक्षण बहुत सामान्य लग सकते हैं, जैसे गैस, एसिडिटी, घबराहट, पसीना आना या सांस फूलना. खासकर महिलाओं और डायबिटीज के मरीजों में ये लक्षण और भी अलग और हल्के हो सकते हैं, जिस वजह से लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं. यही लापरवाही बाद में गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है. Dr. Ashok Seth ने खास तौर पर बताया कि अगर कोई लक्षण आपको “अनयूजुअल” लगे और दवा लेने के बाद भी 20-30 मिनट में ठीक न हो, तो तुरंत अस्पताल जाकर ईसीजी करवाना चाहिए.
महिलाओं में हार्ट डिजीज मौत का सबसे बड़ा कारण
महिलाओं के मामले में यह खतरा और भी ज्यादा है, क्योंकि अक्सर उनके लक्षण क्लासिक नहीं होते और वे उन्हें मेनोपॉज या थकान समझकर टाल देती हैं. जबकि सच्चाई यह है कि महिलाओं में भी हार्ट डिजीज मौत की सबसे बड़ी वजह है. इसलिए उनके लिए समय-समय पर चेकअप कराना और अपने शरीर के संकेतों को समझना बेहद जरूरी है.
कोलेस्ट्रॉल को लेकर भी काफी भ्रम है. हर बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल खतरनाक नहीं होता, लेकिन जिन लोगों को पहले से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या हार्ट की समस्या है, उनके लिए इसे कंट्रोल में रखना बहुत जरूरी हो जाता है. डॉक्टर के अनुसार, खराब कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल जितना कम हो, उतना बेहतर होता है. कई बार सिर्फ लाइफस्टाइल बदलने से यह कंट्रोल हो सकता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर दवाइयां लेना भी उतना ही जरूरी है. दवा से डरकर उसे न लेना उतना ही खतरनाक है जितना बिना जरूरत के दवा लेना.
साइलेंट किलर है डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर
हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि ये बिना किसी लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाते रहते हैं. यही कारण है कि 20 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार अपना ब्लड प्रेशर जरूर चेक कराना चाहिए. बहुत से लोग यह मान लेते हैं कि जब तक कोई परेशानी महसूस नहीं हो रही, तब तक सब ठीक है, जबकि असल में नुकसान अंदर ही अंदर होता रहता है.
क्या है सबसे आसान और असरदार उपाय
अगर बात करें सबसे आसान और असरदार उपाय की, तो वह है रोजाना चलना. सिर्फ 30 मिनट की ब्रिस्क वॉक, हफ्ते में पांच दिन, आपके हार्ट अटैक के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है. इसके साथ ही नमक कम करना, बाहर का तला-भुना खाना कम करना और स्मोकिंग छोड़ना जैसी आदतें दिल की सेहत को बेहतर बनाती हैं. Dr. Ashok Seth का साफ कहना है कि “फिट दिखना और फिट होना अलग-अलग चीजें हैं.” कई लोग बाहर से फिट दिखते हैं, लेकिन अंदर से उनके रिस्क फैक्टर्स छुपे हुए होते हैं, जो कभी भी समस्या बन सकते हैं.
इस पूरे पॉडकास्ट का सबसे बड़ा मैसेज यही है कि दिल की बीमारी अचानक नहीं होती, बल्कि हमारी रोजमर्रा की आदतों का नतीजा होती है. अगर हम समय रहते अपने लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव कर लें, नियमित जांच कराते रहें और शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें, तो हम न सिर्फ दिल बल्कि पूरी सेहत को बेहतर बना सकते हैं.
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Disclaimer: इस लेख में प्रकाशित जानकारी डॉक्टर/एक्सपर्ट के निजी विचार हैं. इसमें दी गई जानकारी किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत मेडिकल सलाह या इलाज का विकल्प नहीं है. किसी भी स्वास्थ्य समस्या या उपचार के लिए कृपया अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें. लेखक और वेबसाइट इस जानकारी के आधार पर किए गए स्वयं उपचार के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे


