World Parkinsons Day: हर साल की तरह 11 अप्रैल 2026 को वर्ल्ड पार्किंसंस के रूप में मनाया जाता है. ये एक ऐसी बीमारी है जो हमारी शरीर में धीरे-धीरे बदलाव लाती है. हम इन्हें काफी हल्के में लेते हैं और इग्नोर कर देते हैं. आपको बता दें कि कई लोग इसे कमजोरी, थकान या फिर बढ़ती हुई उम्र का असर मानते हैं और नजरअंदाज कर देते हैं.
लेकिन असल में ये आखिर है क्या दिल्ली फोर्टिस अस्पताल से न्यूरोलॉजिस्ट नेहा पंडिटा ने फिट रहे इंडिया ने पार्किंसंस पर खास बातचीत की. नेहा बताती हैं कि पार्किंसंस पूरी तरह से शरीर की बीमरी नहीं बल्कि ये दिमाग की बीमारी है. उन्होंने बताया कि इसका ट्रीटमेंट है. इस बातचीत में हमने जानने की कोशिश की क्या है ये बीमारी, किन्हें होती है कैसे होती है. मरीज को कैसा फील होता है. इन सभी चीजों पर हमने बाचतीत की आइए डिटेल में जानते हैं.
उम्र के कारण या फिर कमजोरी कर रही इशारा?
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है हमारी बॉडी में कई समस्याएं सामने आती है. सबसे पहली समस्या होती है कमजोरी. लोग ये सोचने लगते हैं कि अब तो उम्र हो गई है और इस उम्र में तो ऐसा होता ही है, इसका कुछ नहीं किया जा सकता. लेकिन जिसे आप महज सिर्फ कमजोरी समझ रहे हैं, वो सिर्फ कमजोरी नहीं बल्कि किसी बीमारी की ओर भी इशारा करते हैं. अगर बढ़ती हुई उम्र के साथ आपको कुछ परेशानियां सता रही है जिसे आप नॉर्मल समझ रहे हैं, तो इग्नोर न करें. संभव है कि ये कहीं पार्किंसंस के शुरुआती लक्षण न हो.
फिट रहे इंडिया ने जब डॉक्टर नेहा पंडिटा से बात की तो उन्होंने बताया कि पार्किंसंस अक्सर 60 साल के बाद वाले लोगों को ये समस्या होती है. लेकिन 10 प्रतिशत ऐसे मरीज उनके पास आते हैं जिनकी उम्र 40 से 50 साल की होती है. डॉक्टर नेहा ने बताया कि जब उनके पास क्लिनीक में पेशंट आते हैं तो वो तब आते हैं जब समस्या बढ़ी हुई होती है. यानी जब इस बीमारी की शुरुआत में आपको लक्षण दिखाई देते हैं आप उसे इग्नोर कर देते हैं. जैसे हांथ कांपना, चाल बिल्कुल धीमी हो जाती है. इसे महज उम्र का तकाजा मानकर लोग इग्नोर कर देते हैं.
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कैसे शुरु होता है पार्किंसंस?
डॉक्टर ने बताया कि पार्किंसंस जब शुरू होता है तो दो तरह के लक्षण दिखाई देते हैं एक नॉन मोटर Symptoms और एक मोटर Symptoms दिखाई देते हैं. उन्होंने बताया कि जब पार्किंसंस की शुरुआत होती है तो नॉन मोटर Symptoms से शुरुआत ही होती है. नॉन मोटर Symptoms का मतलब होता है नींद न आने की समस्या होना, नींद में बाते करना, नींद में हाथ पैर चलाना, आप पेशाब नहीं कंट्रोल कर पाते, चक्कर आना. ये सभी पार्किंसंस के लक्षण होते हैं. डॉक्टर ने बताया कि लोग इस तरह के लक्षणों को इग्नोर कर देते हैं. लेकिन ये आगे चलकर मोटर सिंप्टंप्स में बदलने लगते हैं, जो काफी खतरनाक साबित हो सकता है. इसलिए ऐसे लक्षणों को आपको इग्नोर नहीं करना चाहिए.
डॉक्टर ने बताया कि पार्किंसंस की पहचान के लिए आप इन बातों का खास ख्याल रखें जैसे अगर आपको चलने में दिक्कत हो रही है. यानी चलते-चलते स्टिफनेस यानी अकड़न महसूस हो रही है, आपकी चाल धीमी हो गई है, तीसरा है हांथों में कंपकंपी होना. जैसे एक हाथ कांप रहे हैं, या फिर दोनों भी कभी-कभार कांप सकते हैं, चौथा लक्षण उन्होंने बताया बैलंस यानी अगर आप बैलंस खो देते हैं, तो इन लक्षणों को इग्नोर न करें. इस तरह के लक्षण दिखने पर नजीदी डॉक्टर को जरूर दिखाएं.
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Disclaimer: इस लेख में प्रकाशित जानकारी डॉक्टर/एक्सपर्ट के निजी विचार हैं. इसमें दी गई जानकारी किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत मेडिकल सलाह या इलाज का विकल्प नहीं है. किसी भी स्वास्थ्य समस्या या उपचार के लिए कृपया अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें. लेखक और वेबसाइट इस जानकारी के आधार पर किए गए स्वयं उपचार के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे


