Autoimmune Gastritis: अमेरिका के टेक एंटरप्रीन्योर ब्रायन जॉनसन इन दिनों गंभीर स्वास्थ्य संबंधित समस्या को लेकर चर्चा में है. हाल ही में उन्होंने अपनी हेल्थ को लेकर बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि वो ऑटोइम्यून गैस्ट्राइटिस ( Autoimmune Gastritis – AIG) नाम की बीमारी का शिकार हुए हैं. ये एक लाइलाइज बीमारी होती है. इस बीमारी में शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से पेट की अंदरूनी परत पर जिसे स्टमक लाइनिंग कहा जाता है उसपर ही हमला करने लगता है. अब जान लेते हैं कि आखिर ऑटोइम्यून गैस्ट्राइटिस क्या होता है.
जानकारी के अनुसार ये एक ऐसी बीमारी होती है जिसमें शरीर इम्युन सिस्टम से ही लड़ने लगता है. यानी पेट में मौजूद उन सेल्स को नुकसान पहुंचाने लगता है जो पेट में एसिड और पाचन के लिए जरूरी तत्वों को बनाती हैं. इसके कारण शरीर में आयरन और विटामिन B12 जैसे जरूरी पोषक तत्वों का अवशोषण कम होने लगता है. धीरे-धीरे यह एनीमिया और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बन सकता है. अब आइए एक नजर इसके लक्षणों पर डालते हैं.
क्या हैं इसके लक्षण?
इस बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती दौर में इसके लक्षण साफ नजर नहीं आते. कई लोगों में वर्षों तक बीमारी छिपी रह सकती है. हालांकि समय के साथ ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
- लगातार थकान और कमजोरी
- शरीर में आयरन की कमी
- विटामिन B12 की कमी
- चक्कर आना
- हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन
- मतली या पेट से जुड़ी परेशानी
- त्वचा का पीला पड़ना
ब्रायन जॉनसन को कैसे चला बीमारी का पता?
ब्रायन जॉनसन कई वर्षों से लगातार लो फेरिटिन (Low Ferritin) यानी शरीर में आयरन स्टोर कम होने की समस्या से जूझ रहे थे. उन्होंने डाइट बदली और आयरन सप्लीमेंट भी लिए, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ. इसके बाद डॉक्टरों ने ब्लड टेस्ट, एंडोस्कोपी और पेट की बायोप्सी की, जिससे ऑटोइम्यून गैस्ट्राइटिस की पुष्टि हुई.
क्या इस बीमारी का इलाज संभव है?
फिलहाल ऑटोइम्यून गैस्ट्राइटिस का कोई स्थायी इलाज नहीं है. डॉक्टर इसके लक्षणों को नियंत्रित करने और शरीर में आयरन व विटामिन B12 की कमी को पूरा करने पर ध्यान देते हैं. मरीजों की नियमित जांच भी की जाती है, क्योंकि लंबे समय तक यह बीमारी रहने पर पेट के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. अगर किसी व्यक्ति में लंबे समय तक आयरन या विटामिन B12 की कमी बनी रहती है और सप्लीमेंट लेने के बाद भी सुधार नहीं होता, तो डॉक्टर आगे की जांच कराने की सलाह देते हैं. समय पर बीमारी की पहचान होने से इसके प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

