Vitamin D Deficiency In Babies: अगर बच्चों का विकास बचपन में सही ढंग से नहीं किया जाए तो उसकी कमी उम्र भर उसके शरीर में दिखाई देती है. वह कुपोषण का शिकार हो जाता है. शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है. वहीं एक्सपर्ट कहते हैं कि शिशुओं के विकास के लिए विटामिन डी बेहद जरूरी है. अगर विटामिन डी की कमी हो जाए तो शरीर कैल्शियम और फॉस्फोरस जैसे दो जरूरी मिनरल्स एब्जॉर्ब नहीं कर पाता. ऐसे में बच्चों की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं.
एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर शिशुओं के शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाए तो आगे चलकर बच्चे को क्रॉनिक डिजीज होने के चांस ज्यादा रहते हैं. वहीं डायबिटीज या हड्डियों से जुड़ी बीमारी होने का खतरा रहता है. आज के आर्टिकल में हम जानेंगे कि विटामिन डी की कमी कैसे पहचान सकते हैं, इसके अलावा इसकी कमी होने पर शरीर क्या संकेत देता है?
माताएं रखें अपना ख्याल
गर्भवती महिलाओं को यह जानना जरूरी है कि गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए विटामिन डी की पूर्ति मां द्वारा होती है. ऐसे में गर्भवती महिलाएं सुबह की धूल लें. रोजाना सुबह और शाम की हल्की धूप में बैठे. इसके अलावा वह विटामिन D से भरपूर फूड्स का सेवन करें. जैसे, अंडे की जर्दी, फैटी फिश (जैसे सैल्मन, सार्डिन), मशरूम और फोर्टिफाइड दूध, दही.
वहीं विटामिन डी कैल्शियम के अवशोष के लिए जरूरी है. इसलिए माताओं को विटामिन डी के साथ-साथ बैलेंस्ड डाइट भी लेनी चाहिए. इसमें कैल्शियम का खास ख्याल रखें. डाइट में दूध, पनीर, दही और हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करें. इसके अलावा माताएं विटामिन D की गोलियां डॉक्टर की सलाह से ले सकती हैं.ध्यान रहे कि बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी प्रकार की सप्लीमेंट ना लें.
विटामिन डी की कमी से नुकसान
अगर शिशुओं में विटामिन डी की कमी हो जाती है तो उसे भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. उसकी हड्डियां कमजोर हो सकती है. उसका शरीर जल्दी बीमार हो सकता है. विटामिन डी की कमी से हाथ-पैर टेढ़े हो सकते हैं. मेडिकल भाषा में इसे रिकेट्स कहा जाता है. इसके अलावा जिन बच्चों के शरीर में विटामिन डी की कमी पाई जाती है. उन्हें उठने, बैठने, घुटने के बल चलने में परेशानी हो सकती है. विटामिन डी की कमी से मांसपेशियों में कमजोरी हो सकती है और बच्चा सुस्त नजर आ सकता है. विटामिन डी की कमी से आगे चलकर डेंटल समस्याएं भी बढ़ सकती हैं.
विटामिन डी की कमी से इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है और शिशु आसानी से बीमारी और इंफेक्शन का शिकार हो सकते हैं.
विटामिन डी की कमी से कैल्शियम एब्जॉर्ब करने में मदद मिलती है, लेकिन इसकी कमी होने पर कैल्शियम एब्जॉर्प्शन कम हो सकता है और मांसपेशियों में ऐंठन या दर्द हो सकता है.
विटामिन डी की कमी खतरनाक क्यों?
विटामिन डी कमी इसलिए खतरनाक होती है क्योंकि ये शरीर में कैल्शियम और फास्फोरस को एब्जॉर्ब करने में मदद करता है. ऐसे में कैल्शियम शरीर को नहीं मिल पाता, और शरीर में कैल्शियम की मात्रा कम होने लगती है. गौरतलब है कि शरीर में कैल्शियम की कमी का असर हड्डियों पर पड़ता है. इसलिए गर्भावस्था के दौरान मां को बच्चे के सही विकास के लिए विटामिन डी का खास ख्याल रखने की जरूरत है.
इन संकेतों से पता चलेगा बच्चे में विटामिन D की कमी
शिशुओं में विटामिन डी की कमी हो गई है. ऐसे में शरीर कुछ खास प्रकार के संकेत देता है. जैसे, जोड़ों में दर्द, बैठने-उठने में दिक्कत, चलने में परेशानी. पैरों में हर समय दर्द की शिकायत, कमजोरी, ड्राई स्किन जैसे लक्षण नजर आते हैं. वहीं अगर आपके बच्चे का शरीरिक विकास नहीं हो रहा तो समझ जाए कि उसके शरीर में विटामिन डी की कमी है, खासतौर पर लंबाई का रूक जाना. बार-बार फ्रैक्चर या चोट लगने पर हड्डी टूटने का खतरा, दांत निकलने में देरी होना, बार-बार बीमार पड़ने भी इस बात का संकेत है कि शिशु के शरीर में विटामिन डी की कमी है.
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FAQs
सवाल. बच्चों में विटामिन D की कमी के संकेत क्या हैं?
जवाब: जोड़ों और पैरों में दर्द, हड्डियों की कमजोरी, चलने-फिरने में दिक्कत, जल्दी थकान और ड्राई स्किन इसके सामान्य संकेत हैं.
सवाल. बच्चों में विटामिन D की कमी क्यों होती है?
जवाब: धूप की कमी, विटामिन D युक्त आहार न लेना और शरीर में पोषक तत्वों का सही अवशोषण न होना इसकी मुख्य वजह हैं.
सवाल. बच्चों में विटामिन D की कमी कैसे पूरी करें?
जवाब: रोज़ कुछ समय धूप में रखें, विटामिन D युक्त भोजन दें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से विटामिन D सप्लीमेंट दें.
(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

