Blood Pressure Monitoring: हाई ब्लड प्रेशर यानी बढ़ा हुआ बीपी सिर्फ दिल की बीमारी नहीं है, यह दिमाग के लिए भी बहुत बड़ा खतरा बन सकता है. डॉक्टरों के अनुसार, अगर ब्लड प्रेशर को समय रहते कंट्रोल कर लिया जाए तो लगभग 40 से 45 प्रतिशत स्ट्रोक के मामलों को रोका जा सकता है. कई लोग यह मान लेते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ बीपी बढ़ना सामान्य है, लेकिन डॉक्टर इसे गलत मानते हैं. चाहे उम्र कोई भी हो, 130/80 के आसपास का ब्लड प्रेशर सबसे बेहतर माना जाता है. अगर किसी व्यक्ति को किडनी या दूसरी गंभीर बीमारी है तो उसका बीपी इससे भी कम रखना जरूरी हो सकता है. फिट रहे इंडिया ने इस खास मुद्दे पर दिल्ली अपोलो हॉस्पिटल में न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर PN Renjen से खास बातचीत की.
लगातार हाई बीपी रहने से शरीर की नसों पर दबाव बढ़ता है. इसका असर दिमाग की नसों पर भी पड़ता है. कई बार दिमाग की नस फट जाती है, जिससे ब्रेन हेमरेज हो सकता है. दूसरी स्थिति में, हाई बीपी धीरे-धीरे नसों को सख्त और मोटा कर देता है. इससे खून के छोटे-छोटे थक्के बनने लगते हैं, जो दिमाग तक पहुंचकर स्ट्रोक का कारण बन सकते हैं. डॉक्टर बताते हैं कि नसों के अंदर एक खास परत होती है, जिसे एंडोथेलियम कहा जाता है. हाई बीपी इस परत को नुकसान पहुंचाता है और वहीं से क्लॉट बनने शुरू हो जाते हैं.
डेली लाइफस्टाइल से कैसे खतरे को करें कम?
डॉक्टरों का कहना है कि स्ट्रोक के कई खतरे ऐसे हैं जिन्हें हम अपनी जीवनशैली बदलकर कम कर सकते हैं. ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखना बेहद जरूरी है. धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना, रोज थोड़ा व्यायाम करना और संतुलित खाना खाना भी स्ट्रोक के खतरे को कम करता है. हालांकि उम्र, लिंग और परिवारिक इतिहास जैसी कुछ चीजें हमारे नियंत्रण में नहीं होती.
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स्ट्रोक आने से पहले संकेत देता है शरीर
स्ट्रोक आने से पहले शरीर कई बार संकेत देता है, लेकिन लोग अक्सर उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं. इसे मिनी स्ट्रोक या TIA कहा जाता है. इसमें कुछ समय के लिए चेहरा टेढ़ा होना, हाथ में कमजोरी महसूस होना, बोलने में दिक्कत, संतुलन बिगड़ना या धुंधला दिखाई देना जैसे लक्षण हो सकते हैं. कई बार ये लक्षण आधे घंटे या एक घंटे बाद अपने आप ठीक भी हो जाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि खतरा टल गया. डॉक्टरों के मुताबिक, ऐसे संकेत मिलते ही तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए क्योंकि समय पर इलाज मिलने से 70 से 75 प्रतिशत मरीजों की हालत में सुधार किया जा सकता है.
दोबारा स्ट्रोक आने का खतरा हाई
अगर किसी व्यक्ति को एक बार स्ट्रोक हो चुका है तो दोबारा स्ट्रोक होने का खतरा और बढ़ जाता है. इसलिए डॉक्टर मरीजों को नियमित दवाइयां लेने की सलाह देते हैं. Aspirin जैसी दवाइयां खून का थक्का बनने से रोकती हैं और Statins दिमाग और दिल दोनों को सुरक्षित रखने में मदद करती हैं. डॉक्टरों का साफ कहना है कि ब्लड प्रेशर को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. सही समय पर जांच, नियमित दवाइयां और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर स्ट्रोक और ब्रेन अटैक जैसी गंभीर बीमारियों से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है.
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