Quick Tricks To Overcome Laziness: ऑफिस में लंच टाइम के बाद अक्सर आलस आने लगता है. कई लोग डेस्क पर बैठे-बैट उबासी लेने लगते हैं. नींद की वजह से काम में भी रूकावट आती है. वहीं एसी की ठंडी-ठंडी हवा नींद को ओर बढ़ाने लगती है. ऐसे में कई बार एंप्लॉय डेस्क पर ही एक झपकी भी ले लेते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ तरीकों की मदद से आप अपनी सुस्ती, आलस को भगा सकते हैं. चलिए जानते हैं.
गर्मी में सुस्ती आना आम बात है. क्योंकि बढ़ते तापमान में शरीर अपने तापमान को कंट्रोल करने के लिए एनर्जी खर्च करने लगता है. वहीं बॉडी टेम्प्रेंचर कंट्रोल करने के लिए शरीर को ज्यादा एनर्जी खर्च करनी पड़ती है. इस दौरान पसीना ज्यादा आता है, जिससे शरीर में पानी और नमक की कमी हो सकती है. इसके अलावा गर्मी में ब्लड प्रेशर थोड़ा कम हो सकता है और डाइजेस्टिव सिस्टम धीमी हो जाती है, जिससे शरीर भारी और थका हुआ महसूस करता है. इसी कारण गर्मी के मौसम में सुस्ती, कमजोरी और नींद जैसा महसूस होना सामान्य माना जाता है. लेकिन कुछ तरीके अनपा आप इसे आसानी से दूर भगा सकते हैं.
ऐसे दूर भागेगा आलस
फल जरूर खाएं
गर्मियों के दिनों में सुस्ती, आलस आना आम बात है. लेकिन इन्हें दूर भगाने के लिए आप दोपहर के समय फलों का सेवन कर सकते हैं. मौसमी फलों को डाइट का हिस्सा जरूर बनाएं. दरअसल फल नेचुरल शुगर (फ्रक्टोज), विटामिन, मिनरल और पानी से भरपूर होते हैं. ये शरीर में होने वाली पानी की कमी को दूर करेंगे. ये शरीर को तुरंत एनर्जी देकर थकान और सुस्ती को कम करते हैं.
खासकर केला, सेब, संतरा और तरबूज जैसे फल ब्लड शुगर को संतुलित रखते हैं और शरीर को हाइड्रेट भी करते हैं, जिससे दिमाग और शरीर दोनों एक्टिव रहते हैं. इन्हें रोजाना डाइट का हिस्सा बनाएं.
सब्जियों की मात्रा बढ़ाएं
भारतीय थाली में अक्सर लोग दाल-चावल और रोटी सब्जी को प्रयोरिटी देती हैं. लेकिन ये भोजन सुस्ती और आलस बढ़ाने का काम करता है. इन थाली में या आप टिफिन में परिवर्तन कर रोटी और चावल की संख्या कम करके इनमें सब्जियों की मात्रा को बढ़ाए. दरअसल सब्जियों में जरूरी विटामिन, मिनरल और फाइबर पाए जाते हैं. गर्मियों में इनका सेवन हल्का और पचाने वाला होता है. इन्हें सेवन से शरीर में भारीपन नहीं लगता और डाइजेस्टिव सिस्टम भी ठीक रहता है.
हरी सब्जियों में आयरन, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो ब्लड सर्कुलेशन और एनर्जी लेवल को बेहतर बनाते हैं. इससे शरीर और दिमाग दोनों एक्टिव रहते हैं और आलस कम महसूस होता है.
पानी की कमी न होने दें
शरीर में पानी की कमी न होने दें. ऑफिस में काम के दौरान बीच-बीच में पानी पीते रहें. इसके अलावा अपने पास इलेक्ट्रॉलाइट्स वाले पेय पदार्थ जरूर रखें. इनके सेवन से न तो जल्दी प्यास लगती है न ही शरीर में पानी की कमी होती. ये शरीर में पानी की कमी भी दूर रखते हैं. ORS, नारियल पानी, नींबू पानी जैसे पेय पदार्थ अपने पास रखें.
ब्रेक लेना जरूरी
खाना खाने के तुरंत बाद डेस्क पर न बैठें. थोड़ा ब्रेक लेकर टहलने जाएं. इसके अलावा आप बीच-बीच में भी ब्रेक लेते रहे. ब्रेक लेने से आपका खाना भी डाइजेस्ट होगा और शरीर भी एक्टिव बना रहेगा. टहलने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है. आलस और सुस्ती दूर भागती है.
बता दें कि अक्सर लोग आलस, सुस्ती को दूर भगाने के लिए एनर्जी ड्रिंक्स और कैफीन युक्त चीज़ों का सेवन करते हैं. लेकिन ये हेल्थ के लिहाज से हानिकारक होते हैं. इसिलए अगर आप हेल्दी और सेहतमंद रहने के लिए कुछ टिप्स अपना सकते हैं.
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FAQs
सवाल: किन खानपान की आदतों से भोजन के बाद आने वाली सुस्ती कम हो सकती है?
जवाब: एक बार में बहुत ज्यादा खाने के बजाय छोटे और संतुलित भोजन लें. आहार में प्रोटीन, फाइबर, फल और सब्जियां शामिल करें तथा तले-भुने और अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें. इससे भोजन के बाद सुस्ती कम महसूस होती है.
सवाल: खाना खाने के बाद आलस से बचने के लिए क्या करना चाहिए?
जवाब: भोजन के तुरंत बाद लेटने के बजाय 10-15 मिनट हल्की वॉक करें. पर्याप्त पानी पिएं और भोजन की मात्रा संतुलित रखें. इससे पाचन बेहतर होता है और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है.
सवाल: खाना खाने के बाद आलस या नींद क्यों आती है?
जवाब: खाना खाने के बाद शरीर पाचन प्रक्रिया पर अधिक ऊर्जा खर्च करता है. भारी, तला-भुना या ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन करने से ब्लड शुगर में बदलाव होता है, जिससे सुस्ती और नींद महसूस हो सकती है.
(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

