Sleep Disorders: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग काम, मोबाइल, सोशल मीडिया और देर रात तक जागने की आदत के कारण अपनी नींद से समझौता कर रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अच्छी नींद सिर्फ आराम के लिए नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए भी बेहद जरूरी है? खराब नींद धीरे-धीरे कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है.
इसी विषय पर हमने बात की पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. निखिल मोदी से, जिन्होंने नींद, स्लीप डिसऑर्डर और स्लीप एपनिया से जुड़ी कई अहम जानकारियां साझा कीं.
अच्छी नींद क्यों है जरूरी?
विशेषज्ञों के अनुसार, व्यक्ति को अपने दिन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा सोने में बिताना चाहिए. यानी एक वयस्क के लिए रोजाना 6 से 8 घंटे की अच्छी और गहरी नींद बेहद जरूरी है. हालांकि सिर्फ घंटों की संख्या ही मायने नहीं रखती, बल्कि यह भी जरूरी है कि आप किस समय सोते हैं. अगर आप रात 2-3 बजे सोकर सुबह 10-11 बजे उठते हैं, तो यह स्वस्थ नींद नहीं मानी जाती.
क्या होती है सर्केडियन रिदम?
हमारे शरीर में एक जैविक घड़ी (Biological Clock) होती है, जिसे सर्केडियन रिदम (Circadian Rhythm) कहा जाता है. यह सूरज की रोशनी और अंधेरे के अनुसार काम करती है. सुबह शरीर के कुछ हार्मोन और केमिकल्स हमें सक्रिय रखते हैं, जबकि रात में शरीर आराम और रिकवरी मोड में चला जाता है. देर रात तक जागने से यह प्राकृतिक चक्र बिगड़ जाता है, जिससे शरीर पर तनाव बढ़ता है.
देर रात जागने के नुकसान
अगर आप देर रात तक मोबाइल, लैपटॉप या टीवी देखते हैं और उसी समय खाना भी खाते हैं, तो इसके कई नुकसान हो सकते हैं.
- एसिडिटी और गैस की समस्या
- पेट फूलना
- तनाव हार्मोन बढ़ना
- हाई ब्लड प्रेशर
- हार्ट डिजीज का खतरा
- मानसिक थकान
विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल कम उम्र में हार्ट अटैक के मामलों में खराब नींद और अनियमित लाइफस्टाइल की भी बड़ी भूमिका है.
कितने घंटे की नींद जरूरी है?
नींद की जरूरत उम्र के अनुसार बदलती है.
- नवजात शिशु: 12-14 घंटे
- बच्चे: 9-12 घंटे
- किशोर: 8-10 घंटे
- वयस्क: 6-8 घंटे
अगर आप रोजाना 6 घंटे से कम सोते हैं, तो लंबे समय में इसका असर स्वास्थ्य पर पड़ सकता है.
क्या ज्यादा सोने के बाद भी थकान रहती है?
कई लोग 8-10 घंटे सोने के बाद भी थका हुआ महसूस करते हैं. इसके पीछे कारण हो सकते हैं:
- स्लीप एपनिया
- नार्कोलेप्सी
- तनाव
- मोटापा
- खराब नींद की गुणवत्ता
ऐसे मामलों में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
क्या है स्लीप एपनिया?
स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें सोते समय सांस बार-बार रुक जाती है.
जब व्यक्ति सोता है तो गले की मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं. कुछ लोगों में इससे सांस का रास्ता संकरा या बंद हो जाता है, जिससे ऑक्सीजन की कमी होने लगती है.
- स्लीप एपनिया के लक्षण
- तेज खर्राटे आना
- सोते समय सांस रुकना
- रात में घुटन महसूस होना
- बार-बार नींद खुलना
- सुबह उठकर थकान महसूस होना
- दिन में नींद आना
- ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
क्या खर्राटे लेना हमेशा स्लीप एपनिया का संकेत है?
नहीं, हर खर्राटे लेने वाले व्यक्ति को स्लीप एपनिया नहीं होता. नाक की हड्डी टेढ़ी होने, एलर्जी, साइनस या टॉन्सिल्स की समस्या के कारण भी खर्राटे आ सकते हैं. लेकिन अगर खर्राटों के साथ सांस रुकने जैसी समस्या हो तो जांच करवानी चाहिए.
स्लीप एपनिया की जांच कैसे होती है?
इसके लिए स्लीप स्टडी (Polysomnography) नामक टेस्ट किया जाता है.
इस टेस्ट में डॉक्टर सोते समय व्यक्ति की:
- सांस
- ऑक्सीजन लेवल
- हार्ट रेट
- दिमाग की गतिविधियां
जैसी चीजों की निगरानी करते हैं.
आजकल यह जांच घर पर भी करवाई जा सकती है.
स्लीप एपनिया का इलाज
इलाज मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है.
- वजन कम करना
- साइनस या टॉन्सिल का इलाज
- CPAP मशीन का इस्तेमाल
- कुछ मामलों में सर्जरी
CPAP मशीन सोते समय सांस का रास्ता खुला रखने में मदद करती है.
अच्छी नींद के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स
- रोज एक ही समय पर सोएं और उठें
सुबह 5 से 7 बजे के बीच उठने की आदत बनाएं.
- नियमित एक्सरसाइज करें
सुबह की वॉक और व्यायाम नींद की गुणवत्ता बेहतर बनाते हैं.
- दिन में ज्यादा न सोएं
जरूरत हो तो सिर्फ 10-15 मिनट की पावर नैप लें.
- शाम के बाद चाय-कॉफी कम करें
शाम 6 बजे के बाद कैफीन से बचें.
- जल्दी डिनर करें
सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले खाना खा लें.
- मोबाइल और टीवी से दूरी बनाएं
सोने से एक घंटा पहले स्क्रीन टाइम बंद कर दें.
क्या स्लीपिंग पिल्स लेना सुरक्षित है?
डॉ. निखिल मोदी के अनुसार, बिना डॉक्टर की सलाह के कभी भी स्लीपिंग पिल्स नहीं लेनी चाहिए.
इसके नुकसान हो सकते हैं:
- लत लगना
- सांस रुकने का खतरा
- बेहोशी
- गंभीर मामलों में जान का खतरा
हालांकि स्लीपिंग पिल्स सीधे किडनी को नुकसान नहीं पहुंचातीं, लेकिन इनके गलत इस्तेमाल से शरीर पर गंभीर असर पड़ सकता है.
क्या शराब से नींद बेहतर आती है?
कई लोगों को लगता है कि शराब पीने से नींद अच्छी आती है, लेकिन यह धारणा गलत है. शराब नींद की गुणवत्ता को खराब करती है और लंबे समय में कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

