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घरेलु नुस्खें अस्थमा के मरीजों पहुंचा सकते नुकसान! ध्यान रखें ये बातें

World Asthma Day 2026: आज का दिन वर्लड अस्थमा डे के रूप में मनाया जाता है. अस्थमा के ट्रिगर्स की एक बार पहचान करने के बाद लाइफ को और भी आसान बनाया जा सकता है.

World Asthma Day 2026: जब हमारे सांसों की नली में सूजन या फिर सुकड़न हो जाती है, तो ये कंडिशन क्रॉनिक अस्थमा की श्रेणी में गिना जाता है. इतना ही नहीं अगर नलियों में एक्स्ट्रा म्यूकस बनने लगता है तो व्यक्ति को सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है. हर साल 5 मई को वर्ल्ड अस्थमा डे (World Asthma Day 2026) के रूप में मनाया जाता है.

फिलहाल अस्थमा का कोई स्थाई इलाज नहीं है. लेकिन ये बिल्कुल भी नहीं है कि आप एक सामान्य जीवन नहीं जी सकते. अस्थमा के ट्रिगर्स की एक बार पहचान करने के बाद लाइफ को और भी आसान बनाया जा सकता है. साथ ही लाइफस्टाइल में अगर कुछ सुधार किया जाए तो इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. आज हम बात करने वाले हैं कि आखिर अस्थमा को आप कैसे मैनेज कर सकते हैं. आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए जिससे ये कंट्रोल में आ सके.

अस्थमा से कैसे करें बचाव? How To Prevent From Asthma

AC का करें इस्तेमालः एयर कंडिशनिंग का इस्तेमाल करने के लिए इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये रूम के ट्रेंप्रेचर को तो कंट्रोल करता ही है इसके साथ-साथ हवा में मौजूद पोलन को भी अंदर आने से रोकता है. जिससे घर के अंदर नमी कम आती है, और धूल मिट्टी भी कम होती है. हालांकि जिन लोगों के पास एसी नहीं है वो अपने घर की खिड़कियां बंद रखें.

बेडरूम में बदलावः अपने काम से लौटने के बाद सबसे अधिक समय हम अपने बेडरूम में ही बिताते हैं. इसलिए बेडरूम में कुछ ऐसा बदलाव करना है जहां किसी चीज से धूल हो रही है तो ऐसी चीजों को कम करें. तकिया और गद्दों को अच्छे से साफ करें. घर में अगर कालीन है, तो पॉसिबल हो तो उसे हटा दें. ये कुछ उपाय हैं जिन्हें आप अपना सकते हैं.

यहां देखें पूरा VIDEO

क्या इनहेलर लेना आखिरी स्टेज है?

अस्थमा को लेकर कई लोगों के मन में सवाल हैं, और कुछ गलतफहमी भी है. दरअसल कई लोग सोचते हैं कि इनहेलर लेना मतलब बीमारी की आखिरी स्टेज है या फिर इसकी आदत पड़ जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं है. इनहेलर अस्थमा के इलाज का एक सुरक्षित और जरूरी हिस्सा है. हालांकि, बिना डॉक्टर की सलाह के इनहेलर या कोई भी दवा शुरू नहीं करनी चाहिए। सही जांच और डायग्नोसिस के बाद ही इलाज लेना जरूरी है.

अस्थमा एक ऐसी बीमारी है जिसमें सांस की नलियों में सूजन आ जाती है और वे छोटी हो जाती हैं, लेकिन अच्छी बात यह है कि यह एक “रिवर्सिबल” स्थिति है, यानी सही इलाज और सावधानी से इसे कंट्रोल किया जा सकता है.

क्या हैं अस्थमा के लक्षण? What are the Symptoms of Asthma

इसके आम लक्षण हैं.

  1. सांस फूलना
  2. सीने में जकड़न
  3. खांसी और सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आना. यह समस्या बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक किसी को भी हो सकती है.

प्रदूषण अस्थमा का एक बड़ा कारण है, लेकिन इसके अलावा भी कई ट्रिगर होते हैं जैसे धूल, पराग (पोलन), पालतू जानवरों के बाल, किचन का धुआं, स्मोकिंग, मौसम में बदलाव और इंफेक्शन। यहां तक कि पहाड़ों या साफ हवा वाली जगहों पर रहने वाले लोगों को भी अस्थमा हो सकता है, क्योंकि यह एलर्जी और शरीर की संवेदनशीलता पर भी निर्भर करता है.

किन लोगों को रहता है अधिक खतरा

जिन लोगों को पहले से एलर्जी है, परिवार में अस्थमा का इतिहास है या फेफड़ों की कोई पुरानी बीमारी रही है, उन्हें इसका खतरा ज्यादा होता है. ऐसे लोगों को अपने ट्रिगर्स को पहचानना और उनसे बचना बहुत जरूरी है. डॉक्टर सलाह देते हैं कि अस्थमा के मरीजों को धुआं, धूल और तेज गंध से दूरी बनानी चाहिए. किचन में तड़का लगाते समय अगर खांसी आती है, तो यह भी एक संकेत हो सकता है कि आप उस धुएं के प्रति संवेदनशील हैं. इसी तरह परफ्यूम, अगरबत्ती या हवन का धुआं भी कई लोगों में समस्या बढ़ा सकता है.

घरेलु नुस्खें पहुंचा सकते नुकसान

आजकल कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के देसी इलाज या घरेलू नुस्खों पर भरोसा करते हैं, जो कभी-कभी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए किसी भी तरह का इलाज शुरू करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है. साथ ही, हल्की-फुल्की एक्सरसाइज और ब्रीदिंग एक्सरसाइज फेफड़ों को मजबूत बनाने में मदद करती हैं.

डॉक्टर मानते हैं कि जैसे हम रोज ब्रश करते हैं, उसी तरह नियमित एक्सरसाइज भी हमारी दिनचर्या का हिस्सा होनी चाहिए. कुल मिलाकर, अस्थमा एक आम लेकिन कंट्रोल की जा सकने वाली बीमारी है. सही जानकारी, समय पर इलाज और थोड़ी सी सावधानी से सांस की परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

यह भी पढ़ें: बदलता मौसम अस्थमा मरीजों के लिए बन रहा परेशानी? डॉक्टर से जानें क्या करें

(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं. )

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sarthak arora Senior Sub Editor
अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
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