Endometriosis Symptoms in Hindi: अक्सर महिलाओं को लगता है कि पीरियड्स में दर्द होना बिल्कुल नॉर्मल है और इसे सहना ही पड़ता है. लेकिन हर दर्द सामान्य नहीं होता. अगर पीरियड्स का दर्द इतना ज्यादा हो कि आपकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, आप स्कूल, कॉलेज या ऑफिस न जा पाएं, हर महीने बार-बार पेनकिलर लेनी पड़े या दर्द की वजह से आपकी क्वालिटी ऑफ लाइफ खराब हो रही हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.
हल्का दर्द आम बात है, लेकिन बहुत ज्यादा दर्द किसी बीमारी का संकेत हो सकता है.ऐसी ही एक बीमारी है एंडोमेट्रियोसिस. महिलाओं के यूट्रस यानी बच्चेदानी के अंदर एक लाइनिंग होती है जिसे एंडोमेट्रियम कहा जाता है. पीरियड्स के दौरान यही लाइनिंग ब्लीडिंग के रूप में शरीर से बाहर निकलती है. लेकिन एंडोमेट्रियोसिस में यह लाइनिंग जैसी कोशिकाएं यूट्रस के बाहर पहुंचने लगती हैं. ये ओवरी, ट्यूब्स, आंतों, ब्लैडर और पेट के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकती हैं. हर महीने पीरियड्स के समय ये टिश्यू भी एक्टिव होते हैं, जिससे सूजन, दर्द और अंदरूनी अंगों का आपस में चिपकना शुरू हो जाता है. यही वजह है कि यह बीमारी समय के साथ गंभीर होती चली जाती है.
पीरियड्स के दर्द और एंडोमेट्रियोसिस में फर्क कैसे समझें?
सामान्य पीरियड्स दर्द कुछ समय के लिए होता है और रोजमर्रा के काम पूरी तरह नहीं रोकता। लेकिन एंडोमेट्रियोसिस का दर्द अलग होता है. अगर दर्द इतना ज्यादा हो कि हर महीने पेनकिलर लेनी पड़े, कई दिनों तक दर्द बना रहे या आपकी सामान्य जिंदगी रुक जाए, तो यह चिंता की बात हो सकती है.
एंडोमेट्रियोसिस के मुख्य लक्षण
सबसे बड़ा संकेत है बहुत ज्यादा पीरियड्स पेन. इसके अलावा कुछ महिलाओं को सेक्स के दौरान दर्द होता है. कई महिलाओं को स्टूल पास करते समय दर्द या ब्लीडिंग भी हो सकती है. कुछ मामलों में पेशाब में खून आना भी देखा जाता है. कई महिलाओं को नीचे पेट में हमेशा हल्का-हल्का दर्द बना रहता है, जिसे क्रॉनिक पेल्विक पेन कहा जाता है. अगर कोई महिला लंबे समय से प्रेग्नेंट होने की कोशिश कर रही है लेकिन कंसीव नहीं कर पा रही, तो एंडोमेट्रियोसिस उसकी एक वजह हो सकती है.
महिलाएं अक्सर इसे देर से क्यों पहचान पाती हैं?
बहुत सी महिलाएं दर्द को सामान्य समझकर सालों तक नजरअंदाज करती रहती हैं. समाज में भी महिलाओं की तकलीफ को “सहन करने वाली बात” मान लिया जाता है. कई बार डॉक्टर भी शुरुआती लक्षणों को सामान्य पीरियड्स पेन समझ लेते हैं. इसी वजह से एंडोमेट्रियोसिस का सही पता लगने में औसतन 5 से 7 साल तक लग जाते हैं.
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एंडोमेट्रियोसिस का पता कैसे चलता है?
सबसे पहले डॉक्टर महिला की पूरी हिस्ट्री समझते हैं और लक्षणों के बारे में विस्तार से पूछते हैं. इसके बाद फिजिकल एग्जामिनेशन किया जाता है. अल्ट्रासाउंड से बड़े सिस्ट दिखाई दे सकते हैं, लेकिन कई बार एंडोमेट्रियोसिस अल्ट्रासाउंड में पकड़ में नहीं आता. ऐसे में एमआरआई ज्यादा मददगार साबित होता है क्योंकि उससे अंदर की सूजन, चिपकाव और बीमारी की गंभीरता बेहतर तरीके से दिखाई देती है. कुछ मामलों में लैप्रोस्कोपी की जरूरत पड़ती है. यह एक छोटी सर्जरी होती है जिसमें कैमरे की मदद से पेट के अंदर देखकर बीमारी की पुष्टि की जाती है.
चॉकलेट सिस्ट क्या होता है?
एंडोमेट्रियोसिस में ओवरी के अंदर खून जमा होकर सिस्ट बन सकता है. यह पुराना खून गाढ़ा भूरा दिखाई देता है, जो चॉकलेट जैसा लगता है. इसलिए इसे चॉकलेट सिस्ट कहा जाता है.
क्या एंडोमेट्रियोसिस सिर्फ शादीशुदा महिलाओं को होता है?
नहीं, यह बीमारी किशोर उम्र की लड़कियों में भी हो सकती है. अगर किसी स्कूल या कॉलेज जाने वाली लड़की को बहुत ज्यादा पीरियड्स पेन हो रहा है, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
एंडोमेट्रियोसिस का इलाज कैसे होता है?
अगर बीमारी शुरुआती स्टेज में है और ज्यादा गंभीर नहीं है, तो डॉक्टर हार्मोनल दवाइयों से इलाज शुरू करते हैं. ये दवाएं कम डोज में दी जाती हैं और आजकल काफी सुरक्षित मानी जाती हैं. इन दवाओं से दर्द और बीमारी के लक्षण काफी हद तक कंट्रोल किए जा सकते हैं. अगर सिस्ट बड़े हों, अंग आपस में चिपक गए हों या बीमारी ज्यादा फैल चुकी हो, तो लैप्रोस्कोपिक सर्जरी करनी पड़ सकती है. इसमें छोटे-छोटे कट लगाकर कैमरे की मदद से एंडोमेट्रियोसिस वाले हिस्सों को हटाया जाता है.
क्या हार्मोनल दवाओं से नुकसान होता है?
सोशल मीडिया पर हार्मोनल दवाओं को लेकर कई गलतफहमियां फैली हुई हैं. आजकल इस्तेमाल होने वाली दवाएं पहले की तुलना में काफी लो डोज और सुरक्षित होती हैं. शुरुआत में कुछ महिलाओं को हल्की मतली या उल्टी जैसा महसूस हो सकता है, लेकिन शरीर धीरे-धीरे दवा के अनुसार ढल जाता है.
लाइफस्टाइल का कितना असर पड़ता है?
खराब लाइफस्टाइल, ज्यादा तनाव, नींद की कमी, मोटापा, स्मोकिंग और शराब जैसी आदतें एंडोमेट्रियोसिस का खतरा बढ़ा सकती हैं. अगर परिवार में किसी महिला को एंडोमेट्रियोसिस रहा है, तो दूसरी महिलाओं में भी इसकी संभावना बढ़ सकती है.
क्या प्रेग्नेंसी से एंडोमेट्रियोसिस ठीक हो जाता है?
यह एक बहुत बड़ा मिथ है. सिर्फ बच्चा हो जाने से एंडोमेट्रियोसिस खत्म नहीं होता। अगर बीमारी गंभीर है, तो कई बार प्रेग्नेंसी होना भी मुश्किल हो जाता है. इसलिए सही इलाज जरूरी है.
सर्जरी के बाद जिंदगी कैसी रहती है?
अगर सही तरीके से सर्जरी की जाए और बीमारी को पूरी तरह हटाया जाए, तो महिलाओं को काफी राहत मिल सकती है. दर्द कम हो जाता है, पेनकिलर की जरूरत नहीं पड़ती और फर्टिलिटी भी बेहतर हो सकती है. लेकिन कुछ मामलों में बीमारी दोबारा भी हो सकती है, इसलिए रेगुलर फॉलोअप जरूरी होता है.
एंडोमेट्रियोसिस को नजरअंदाज न करें
हर पीरियड्स पेन सामान्य नहीं होता. अगर दर्द आपकी जिंदगी पर असर डाल रहा है, हर महीने दवाइयों के सहारे रहना पड़ रहा है या ऊपर बताए गए लक्षण दिख रहे हैं, तो एक बार गायनेकोलॉजिस्ट से जरूर सलाह लें. समय पर पहचान और सही इलाज से इस बीमारी को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है और महिलाओं की जिंदगी पहले से कहीं बेहतर बन सकती है.
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